दैनिक भास्कर हिंदी: Inside Edge 2: किए गए क्रिकेट जगत के कई खुलासे, सराहनीय है एक्टर्स की एक्टिंग

December 7th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। वेब सीरीज इनसाइड ऐज 2 रिलीज हो चुकी है। इसके पहले सीजन को काफी पसंद किया गया था। इसमें क्रिकेट जगत से जुड़ी चीजों को दिखाया गया था। वेबसीरीज के ​सीजन वन में दिखाया गया था कि  पीपीएल (पॉवर प्रमियर लीग) कैसे खेला जाता है और उसमें कैसे स्पॉट फिक्सिंग होती है। दूसरे सीजन में इसी कहानी को आगे बढ़ाया गया है। इसमें नीलामी से मैच खत्म होने तक की पूरी स्टोरी दिखाई गई है। क्रिकेट से राजनेता और बड़े बिजनेस मैन का कनेक्शन भी दिखाया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि कैसे क्रिकेट में गैरकानूनी काम हो रहा है। इसे देखकर समझ आता है कि जल्द ही इसका तीसरा सीजन भी आएगा। 

फिलहाल हम जानते हैं इन साइड एज के दूसरे सीजन की कहानी को। 

इस सीरीज में रिचा चड्ढा का नाम जरीना मलिक है। उनकी एक्टिंग काफी शानदार है। वह पॉवर के लिए भूखी महिला लग रही हैं। गली बॉय के एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी (प्रशांत कन्नौजिया) की एक्टिंग भी बढ़िया है। उन्होंने एक परेशान तेज गेंदबाज की भूमिका अदा की है। सिद्धांत की दमदार अदाकारी के चलते कम स्पेस दिया गया। इस वजह से दर्शक नाराज है। 

मिस्टर मनोहर लाल हांडा (ऋषि चड्डा) का करैक्टर ह्यूमरस है। अंगद बेदी (अरविंद वशिष्ठ) ने भी अच्छी एक्टिंग की है। आमिर बशीर (यशवर्धन भाई साहब पाटिल) की एक्टिंग औसत है। उनका रोल काफी लंबा है। वहीं मंत्रा यानी यशवर्धन की बेटी (सपना बब्बी) का किरदार भी काफी अहम है। सपना की एक्टिंग भी औसत है।

पिछली बार दिखाया गया था कि विक्रांत धवन (विवेक ओबरॉय) की मौत हो चुकी है, लेकिन इस बार वह लौट आए हैं। सीजन 2 में उनका रोल छोटा, लेकिन अहम है। एंडिंग देखकर लगता है कि तीसरे सीजन में वह फिर से उभर कर आएंगे। इस वेब सीरीज में कई लंबे सीन हैं, जो बोर कर सकते हैं। वहीं कहानी में कई ऐसे प्लाट हैं जो समझ में नहीं आता है कि क्यों हैं। जैसे, चीयर लीडर सैंडी (एली अवराम) का किरदार और डोपिंग का प्लाट। कहानी में डोपिंग की बात शुरू होती है और बगैर किसी नतीजे पर पहुंचे खत्म हो जाती है।

कई किरदार अपने निजी जीवन की बातें करते हैं। इसे ज्यादा जगह दी गई है। यह भी बोर करता है क्योंकि दर्शक खेल के पीछे का खेल देखना चाहते हैं। प्यार और मोहब्बत नहीं। इसे जबरदस्ती खींचा गया है। किरदार बेहद ज्यादा संख्या में हैं। इससे आप कंफ्यूज होते हैं। कुछ किरदारों के बिना भी काम चल सकता था। निर्देशन ठीक-ठाक है। स्क्रिन प्ले और अच्छा हो सकता था।

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