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बचपन से क्रिकेट के दीवाने रहे सुशांत रोज फोन पर करते थे पिता बात

June 14th, 2020 18:00 IST
 बचपन से क्रिकेट के दीवाने रहे सुशांत रोज फोन पर करते थे पिता बात

हाईलाइट

  • बचपन से क्रिकेट के दीवाने रहे सुशांत रोज फोन पर करते थे पिता बात

पटना, 14 जून (आईएएनएस)। बॉलीवुड व टेलीविजन अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भले ही दुनिया से रुखसत हो चुके हों, लेकिन उनके बचपन के दोस्तों को अब भी उनके बचपन की बातें याद हैं।

सुशांत सिंह का बचपन पटना में गुजरा था। राजीवनगर के रहने वाले सुशांत बचपन से ही क्रिकेट के दीवाने थे। वे दोस्तों के साथ सड़कों पर भी क्रिकेट खेला करते थे।

एमएस धोनी-द अनटोल्ड स्टोरी, छिछोरे जैसी कई अच्छी फिल्मों में अभिनय कर चुके सुशांत की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट कैरेंस हाईस्कूल स्कूल में हुई थी। इसके बाद वह दिल्ली चले गए। डेल्ही कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से उन्होंने मैकेनिल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। सुशांत की 4 बहनें भी हैं।

पटना स्थित घर में सुशांत के पिता कृष्ण कुमार सिंह अकेले हैं। उनकी और घर की देखभाल करने वाली केयरटेकर लक्ष्मी बताती हैं कि सुशांत उन्हें दीदी कहकर पुकारते थे। लक्ष्मी बताती हैं, बाबू (सुशांत) करीब हर रोज अपने पिताजी से बात करता था। दो दिन पहले ही वह बोला था कि दीदी, कोरोना से बचकर रहिएगा।

उन्होंने कह, सुशांत ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि इस बार वह पटना आएगा तो पिताजी को ले जाएगा और फिर कहीं किसी पहाड़ी पर घूमने ले जाएगा। लेकिन बाबू तो नहीं आया, उसकी जगह यह मनहूस खबर आ गई।

लक्ष्मी ने बताया कि सुशांत की बड़ी बहन चंडीगढ़ में रहती हैं, जो पटना के लिए रवाना हो रही हैं।

आसपास के लेागों को भी सुशांत से कभी कोई शिकायत नहीं रही। आसपास के लोग कहते हैं कि एक साल पहले भी जब वह यहां आए थे तो उनमें स्टार बन जाने को लेकर अहंकार नजर नहीं आता था।

सुशांत के निधन की खबर सुनकर उनके पटना स्थित आवास पहुंचीं पूर्व सांसद लवली आनंद ने कहा कि सुशांत आत्महत्या करने जैसा कदम उठाने वाला लड़का नहीं था। वह तो दूसरों को मोटिवेट करने वाला लड़का था।

सुशांत सिंह का पैतृक आवास पूर्णिया जिले के बड़हरा कोठी में है। पटना के राजीवनगर में रहकर उन्होंने पढ़ाई की थी। सुशांत ने अपने कॅरियर की शुरुआत टीवी एक्टर के तौर पर की थी।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत एक साल पहले बिहार के पूर्णिया स्थित अपने पैतृक गांव बड़हरा कोठी के मलडीहा पहुंचे थे। यहां से वह अपने परिवार के साथ मुंडन कराने खगड़िया जिले के बोरने स्थित भगवती मंदिर गए। अभिनेता ने भगवती के दर्शन करने के बाद ननिहाल स्थित घर में जाकर कुल देवी का आशीर्वाद भी लिया था। उसके बाद फिर मंदिर पहुंचकर समाजिक और हिंदू रीति-रिवाज से उनका मुंडन संस्कार किया गया था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।