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केज और पार्क के नए एल्बम में इन बातों का होगा जिक्र

June 17th, 2020 18:30 IST
 केज और पार्क के नए एल्बम में इन बातों का होगा जिक्र

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  • केज और पार्क के नए एल्बम में इन बातों का होगा जिक्र

नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। ग्रैमी पुरस्कार विजेता रिकी केज और नामित लोनी पार्क दुनिया भर के तमाम हिस्सों से अन्य ग्रैमी पुरस्कार विजेताओं के साथ मिलकर 21 जून को विश्व संगीत दिवस के मौके पर एक घंटे के कॉन्सर्ट का आयोजन करेंगे और इस दौरान संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत लक्ष्यों पर आधारित गीतों पर अपनी प्रस्तुति देंगे।

टीम ने मिलकर माय अर्थ सॉन्ग्स का निर्माण किया है, जिसके तहत प्रकृति की मांग और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरियाली से समृद्ध धरती को सुनिश्चित करने व इस वक्त व्याप्त असंतुलनों की जांच करते हुए उन सुधारात्मक कार्यों की बात की जाएगी, जिन्हें लोगों द्वारा किए जाने की आवश्यकता है।

पर्यावरण में सुधार और स्थिरता पर आधारित ऐसे 27 गीत हैं, जिन्हें पांच से ग्यारह साल तक के बच्चों को ध्यान में रखकर लिखा गया है।

आईएएनएस लाइफ ने इस पर रिकी केज और लोनी पार्क से बात की, जिसके कुछ अंश इस प्रकार हैं -

इस कॉन्सर्ट के बारे में हमें कुछ बताइए और इसके पीछे क्या तर्क है?

पार्क : यह कॉन्सर्ट वैसे तो बच्चों के लिए है, लेकिन इससे सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की जाएगी। रिकी केज, डोमिनिक डीक्रूज और मैंने एक विशिष्ट एकीकृत थीम के साथ सारे गीत लिखे हैं। दुनिया भर में तमाम कॉन्सर्ट में प्रस्तुति देने के दौरान रिकी पर्यावरण संबंधी अभियानों में गहराई से शामिल हुए हैं। हमने इस बात पर चर्चा की कि वयस्कों के लिए इस धरती में अपनी बुरी आदतों को बदलना काफी चुनौतीपूर्ण है। हमने एक दीर्घकालिक प्रभाव की मांग को महसूस किया। हमें इस वक्त चाहिए कि आने वाली पीढ़ी शुरुआत से ही अच्छी आदतों व अभ्यासों का पालन करें।

यह बच्चों में भी एक जागरूकता लेकर आएगा, जिसे वे जिंदगी भर निभाएंगे। ऐसे में बच्चों के लिए उटपटांग गानों को गाने से अच्छा है, हमें उन्हें हमारी धरती, समानता, सहिष्णुता और पहल करने से संबधित गीतों को गाने के दिशा में प्रेरित करना चाहिए। हममें यकीन है कि इस सम्पूर्ण विश्व पर एक खास प्रभाव पड़ेगा। इसलिए हमने संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित विषयों पर गीत लिखने शुरू कर दिए।

जब हमने गाने लिख लिए, तो उन्हें शिक्षा प्रणली और यूनीसेफ जैसे संगठनों द्वारा अपनाया और समर्थित किया जाने लगा। तब जाकर हमें लगा कि यह उन 85 करोड़ बच्चों के लिए लॉकडाउन के दौरान इस पर एक कॉन्सर्ट करने का एक उपयुक्त समय है, जिन्हें स्कूल न जाने के लिए मजबूर किया जाता है।

बच्चों पर इस पहल के लिए ध्यान दिया जाना कितना जरूरी है?

केज : अगर हम एक ऐसी पीढ़ी की मांग करते हैं, जिसमें नागरिक पर्यावरण के प्रति जागरूक हो, तो हमें बच्चों से ही इसकी शुरुआत करनी होगी। ये गीत पचास लाख से अधिक स्कूली पुस्तकों में पहले ही शामिल हो चुके हैं। माय अर्थ सॉन्ग्स को इसके नवाचार, रचनात्मकता व ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच के लिए जर्मनी के बॉन में संयुक्त राष्ट्र द्वारा सम्मानित व मान्यता प्राप्त किया जा चुका है। इस महामारी के दौरान दुनिया भर के देशों और उनके स्कूल सिस्टम को बच्चों को निर्बाध शिक्षा देने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और इससे बच्चों की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। यह कॉन्सर्ट बच्चों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें उनके पर्यावरण के बारे में आवश्यक जानकारियां भी उपलब्ध कराएगी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।