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कोविड-19 : भारत ने इटली को पीछे किया, सामने आए 2.36 लाख मामले

June 06th, 2020 13:00 IST
 कोविड-19 : भारत ने इटली को पीछे किया, सामने आए 2.36 लाख मामले

हाईलाइट

  • कोविड-19 : भारत ने इटली को पीछे किया, सामने आए 2.36 लाख मामले

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। भारत ने कोरोनावायरस महामारी से संक्रमति हुए लोगों की संख्या में इटली को पीछे कर दिया है। देश में पिछले 24 घंटों में 294 नई मौतों के साथ ही कोविड-19 संक्रमण के 9 हजार 887 नए मामले सामने आए, जिसके बाद से कुल संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 2 लाख 36 हजार 657 हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी।

कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर दो महीने तक लागू लॉकडाउन के अनलॉक के पहले चरण में यह उछाल देखने को मिला है। वहीं, सरकार ने अगले सप्ताह से धार्मिक स्थानों को खोलने की योजना बनाई है।

कोविड-19 संक्रमण के सामने आए कुल मामलों में से वर्तमान में 1 लाख 15 हजार 942 लोग महामारी से ग्रस्त हैं, जबकि उपचार के बाद पूर्ण रूप से स्वस्थ हुए 1 लाख 14 हजार 72 लोगों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है। वहीं, महामारी की चपेट में आकर 6 हजार 642 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

भारत में सबसे अधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है, जहां सर्वाधिक 80 हजार 229 मामले आए हैं। इसके बाद 28 हजार 694 मामलों के साथ तमिलनाडु, 26 हजार 334 मामलों के साथ दिल्ली और 19 हजार 94 मामलों के साथ गुजरात का स्थान है।

अकेले महाराष्ट्र में वर्तमान में 42 हजार 224 एक्टिव मामले हैं। इसके बाद 15 हजार 311 मामलों के साथ राष्ट्रीय राजधानी का स्थान है। तमिलनाडु और गुजरात में यह आंकड़ा क्रमश: 12 हजार 700 और 4 हजार 901 है।

वहीं, कोरोनावायरस से संक्रमित हुए लोगों का वैश्विक आंकड़ा बढ़कर 67 लाख के पार पहुंच चुका है, जबकि महामारी की चपेट में आकर मरने वालों की संख्या 3 लाख 94 हजार से अधिक हो गई है।

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने नवीनतम आंकड़े जारी कर कहा, दुनियाभर में शनिवार सुबह तक कुल 67 लाख 31 हजार 824 लोग कोविड-19 संक्रमण से संक्रमित हुए, जिनमें से मरने वालों की संख्या 3 लाख 94 हजार 787 रही।

सीएसएसई ने कहा कि दुनिया में महामारी से संक्रमित हुए और इससे मरने वालों लोगों की संख्या अमेरिका में सबसे अधिक है।

कोरोना संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित देश अमेरिका में कुल 1 लाख 9 हजार 127 मौतों के साथ ही संक्रमण के सर्वाधिक 18 लाख 97 हजार 239 मामले दर्ज किए गए हैं।

कोविड-19 संक्रमण के 6 लाख 14 हजार 941 मामलों के साथ ब्राजील इसके बाद दूसरा सबसे प्रभावित देश है, जबकि रूस 4 लाख 49 हजार 256 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है।

वहीं, 2 लाख 84 हजार 734 मामलों के साथ ब्रिटेन, 2 लाख 40 हजार 978 मामलों के साथ स्पेन, 2 लाख 36 हजार 184 मामलों के साथ भारत, 2 लाख 34 हजार 531 मामलों के साथ इटली, 1 लाख 90 हजार 180 मामलों के साथ फ्रांस, 1 लाख 87 हजार 400 मामलों के साथ पेरू, 1 लाख 84 हजार 924 मामलों के साथ जर्मनी, 1 लाख 68 हजार 340 मामलों के साथ तुर्की, 1 लाख 67 हजार 156 मामलों के साथ ईरान, 1 लाख 22 हजार 499 मामलों के साथ चिली और 1 लाख 10 हजार 26 मामलों के साथ मेक्सिको महामारी से अन्य सबसे अधिक प्रभावित हुए देशों में शामिल हैं।

सीएसएसई के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मौतों के आंकड़े की बात की जाए, तो अमेरिका के बाद कुल 40 हजार 344 मौतों के साथ ब्रिटेन दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वहीं, यूरोपीय देशों में यह आंकड़ा सर्वाधिक है।

महामारी के चलते हुई 10 हजार से अधिक मौतों वाले अन्य देशों में 34 हजार 21 मौतों के साथ ब्राजील, 33 हजार 774 मौतों के साथ इटली, 29 हजार 114 मौतों के साथ फ्रांस, 27 हजार 134 मौतों के साथ स्पेन और 13 हजार 170 मौतों के साथ मेक्सिको शामिल हैं।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।