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उप्र में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की बने सूची : हाईकोर्ट

May 15th, 2020 21:31 IST
 उप्र में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की बने सूची : हाईकोर्ट

हाईलाइट

  • उप्र में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की बने सूची : हाईकोर्ट

प्रयागराज, 15 मई (आईएएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए राज्य की सीमाओं पर कड़ी निगरानी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उप्र में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की सूची बनाई जाए और उनकी कड़ी निगरानी की जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए राज्य सरकार को शुक्रवार को कई सख्त निर्देश दिए हैं। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को 15 दिनों के लए अनिवार्य रूप से क्वारंटीन किया जाए तथा उनके स्वास्थ्य की निगरानी के लिए हर चार सौ व्यक्ति पर एक अधिकारी की नियुक्ति की जाए। कोर्ट ने इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और कार्यवाही रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की सूची बनाने के लिए कहा है।

प्रयागराज में कोरोना से इंजीनियर की मृत्यु और क्वारंटीन सेंटरों की दुर्दशा की शिकायत को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्घार्थ वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है।

कोर्ट ने कहा है कि जो लोग हाईवे से अपने निजी साधन या पैदल प्रदेश में आए हैं, उनका पता लगाकर उन्हें निगरानी सूची में शामिल किया जाए। कोर्ट ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आस पास प्रदेश के बाहर से आए व्यक्ति की जानकारी मिले तो वह शासन द्वारा जारी फोन नंबर पर इसकी सूचना तत्काल दे, ताकि उसे निगरानी सूची में शामिल किया जा सके और बीमार होने पर इलाज हो सके। अदालत ने क्वारंटीन सेंटर की सफाई और सेनेटाइजेशन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि वह बाहर से आए लोगों के सुनियोजित तरीके से ठहरने की व्यवस्था करे। कोर्ट ने 18 मई को कार्यवाही रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने प्रयागराज में कई निर्देशों के बावजूद अस्पतालों में जांच व इलाज की सुविधाएं उपलब्ध न कराने पर नाराजगी जताई और कहा है कि अस्पतालों व क्वारंटीन सेंटर में व्याप्त गंदगी व अव्यवस्था तथा शारीरिक दूरी बनाए रखने के दिशानिर्देश का पालन न करने के फोटोग्राफ स्वयं सच्चाई बता रहे हैं।

अदालत ने सरकार से पूछा है कि वह शहर के अस्पतालों व सामुदायिक केंद्रों में जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं दे पा रही है।

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