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उप्र : कोरोना की दहशत के बीच पटरी पर लौटनी शुरू हुई जिंदगी

June 01st, 2020 22:31 IST
 उप्र : कोरोना की दहशत के बीच पटरी पर लौटनी शुरू हुई जिंदगी

हाईलाइट

  • उप्र : कोरोना की दहशत के बीच पटरी पर लौटनी शुरू हुई जिंदगी

लखनऊ, 1 जून (आईएएनएस)। कोरोनावायरस को रोकने के लिए लागू रहे लॉकडाउन के चार चरण समाप्त होने के बाद अब सोमवार से अनलॉक-1 शुरू हो गया। इसके साथ उत्तर प्रदेश में जिंदगी पटरी पर लौटनी शुरू हो गई। हालांकि लोगों में कोरोना का दहशत बना हुआ है, जिसके कारण लोग सारी सावधानियां बरतते नजर आए।

सरकारी कार्यालय खुल गए, और सड़कों पर कुछ जगह जाम भी देखा गया। बसों और टैम्पो में लोगों को मास्क और सैनिटाइजर के साथ देखा गया।

लॉकडाउन की लंबी अवधि बाद अनलॉक-1 की व्यवस्था लागू होने से लोग घरों से निकल कर बाजारों में पहुंचे। इस दौरान दुकानदार पूरी सावधानी बरत रहे हैं। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में मास्क पहनने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

बस सेवा प्रारंभ होने के पहले दिन उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन सेवा के मंत्री अशोक कटारिया और प्रबंध निदेशक राजशेखर ने हालात का जायजा लिया।

परिवहन मंत्री ने कहा कि यह प्रथम चरण है, और दूसरे चरण में अंतरराज्यीय सेवाओं का संचालन शुरू किया जाएगा।

यात्रियों की जांच और सैनिटाइजर की उपलब्धता चेक करने के बाद परिवहन मंत्री ने बस अड्डे से निकल रही गोंडा-बलरामपुर रूट की बस में प्रवेश किया। यात्रियों के चेहरे पर मास्क लगा देख उन्होंने सवाल किया कि क्या सैनिटाइजर से हाथ धुलवाया गया था। यात्रियों के हामी भरने के बाद मंत्री ने वाया बरेली दिल्ली जा रही बस में प्रवेश किया। यात्रियों से फीडबैक लेने के बाद मास्क और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था देखी। इस दौरान मंत्री ने एक यात्री का खुद सैनिटाइजर से हाथ धुलवाया। साथ ही कहा कि बिना मॉस्क के वह सफर न करें।

लखनऊ से कानपुर जाने वाले यात्रियों के लिए सिर्फ चारबाग से बसों का संचालन शुरू हुआ। वहीं, कैसरबाग बस स्टेशन पर बाराबंकी, सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई, बहराइच, गोंडा व रायबरेली, लालगंज, फतेहपुर, सुल्तानपुर, आजमगढ़, गाजियाबाद जाने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें बसों में सवार होने दिया गया।

राजधानी लखनऊ में चारबाग और आलमबाग, कैसरबाग में सिटी बस और ऑटो-टेम्पो चलते हुए दिखाई दिए। लखनऊ ऑटो ओनर्स-चालक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज दीक्षित ने बताया कि अभी 50 प्रतिशत ऑटो चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह से ही रवींद्रालय, चारबाग में प्रत्येक ऑटोरिक्शा को सैनिटाइज किया जा रहा है। सभी को मास्क पहनने के लिए अनिवार्य किया गया है।

सिटी बसों में बैठे लोगों की जेब में सैनिटाइजर और चेहरे पर मास्क लगा हुआ नजर आ रहा था। एक यात्री रामकुमार चारबाग से हजरतगंज कुछ खरीदारी करने निकले थे। वह वायरस को लेकर डरे थे। उनके साथ उनका बेटा था, जो मास्क लगाए और लोगों को वायरस के बारे में सचेत कर रहा था।

सोमवार को चारबाग रेलवे स्टेशन से तीन ट्रेनों का भी संचालन हुआ। सुबह छह बजे गोमती एक्सप्रेस रवाना हुई। इस पर चढ़ने के लिए यात्री एक घंटे पहले ही स्टेशन पर आ चुके थे। यात्रियों को बताया जा रहा था कि केवल कन्फर्म टिकट वाले ही प्लेटफॉर्म पर जाएं। वहीं प्लेटफॉर्म एक के मेन गेट से पहले यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की गई और हाथों को सेनिटाइज किया गया। छह बजे तय समय पर 283 यात्रियों के साथ ट्रेन रवाना हुई। हर यात्री को रेलवे के कर्मचारियों के द्वारा बताया जा रहा था कि ट्रेन में क्या करना, क्या नहीं।

अपर मुख्य सचिव, गृह, अवनीश अवस्थी ने कहा, मुख्यमंत्री ने स्टेशन पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रीनिंग के लिए कहा है। रेलवे स्टेशन पर हर यात्री को कोरोना से बचाव के संबंध में हैंडबिल उपलब्ध कराया जाएगा। आज से रेल सेवा प्रारम्भ होने के ²ष्टिगत सभी रेलवे स्टेशनों पर थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। स्टेशन पर प्रशासन, पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अनिवार्य रूप से तैनात रहने को मुख्यमंत्री ने कहा है।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।