हेल्थ अलर्ट: बांग्लादेश में बढ़े खसरा के मामले, WHO ने जाहिर की चिंता

बांग्लादेश में बढ़े खसरा के मामले, WHO ने जाहिर की चिंता
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 1,170 संदिग्ध केस सामने आए हैं जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 38,301 हो चुकी है। बांग्लादेश में खसरा बीमारी का प्रकोप अभी भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 5,146 खसरा केस की पुष्टि हुई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश में खसरा बिमारी का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। बांग्लादेश में बढ़ते खसरा के प्रकोप को लेकर WHO ने चिंता जाहिर की। नए पहचाने गए केस में से 942 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 893 मरीजों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई। बांग्लादेश के विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) कमजोर हुआ है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने जानकारी देते हुए बताया कि चार और बच्चों की मौत के साथ 15 मार्च से अब तक मृतकों की संख्या 280 हो गई है। इसी अवधि में 115 नए पुष्ट केस दर्ज किए गए, जिसके साथ कुल संक्रमणों की संख्या 5,146 तक पहुंच गई। 15 मार्च से अब तक कुल मौतों में 49 की पुष्टि खसरे से हुई है, जबकि 231 मौतें संदिग्ध मामलों में दर्ज की गई हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 1,170 संदिग्ध केस सामने आए हैं जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 38,301 हो चुकी है। बांग्लादेश में खसरा बीमारी का प्रकोप अभी भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 5,146 खसरा केस की पुष्टि हुई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि वैक्सीनेशन और निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है, संक्रमण तेजी से फैल सकता है। डब्ल्यूएचओ ने सलाह दी है कि सभी नगर क्षेत्रों में खसरे के टीके की दोनों खुराकों का कवरेज कम से कम 95 प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में संदिग्ध मामलों की शीघ्र पहचान के लिए एकीकृत निगरानी प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने सरकार से तुरंत कदम उठाने की अपील की है। हेल्थ एक्सपर्टने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो खसरे का व्यापक प्रकोप फैल सकता है। एक संक्रमित व्यक्ति औसतन 16 से 18 लोगों को संक्रमित कर सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

प्रमुख अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, 2025 में नेशनल वैक्सीनेशन कवरेज घटकर करीब 60 फीसदी रह गया, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 2010 से 2022 के बीच यह 85 से 92 प्रतिशत के बीच बना हुआ था।

Created On :   2 May 2026 5:55 PM IST

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