नई आफत: चीन की तरह अमेरिका में भी तेजी से फैल रहा निमोनिया! बच्चों पर इसका ज्यादा असर, बड़ी संख्या में अस्पताल में भर्ती

चीन की तरह अमेरिका में भी तेजी से फैल रहा निमोनिया! बच्चों पर इसका ज्यादा असर, बड़ी संख्या में अस्पताल में भर्ती
  • चीन की तरह अमेरिका में संक्रमण बढ़ा
  • वायरस का असर बच्चों पर सबसे ज्यादा

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। चीन की तरह अमेरिका में भी निमोनिया की बीमारी फैलती जा रही है। जिसकी वजह से वहां के अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। चीन में इस बीमारी की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। इसके इलाज के लिए देश के बड़े-बड़े हॉस्पिटल के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। वहीं अब इस बीमारी का प्रकोप अमेरिका के ओहियो राज्य में फैलता हुआ देखाई दे रहा है। जिसकी वजह से वहां चीन जैसे हालात बनते हुए नजर आ रहे हैं। वॉरेन काउंटी के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अगस्त से अब तक 142 चाइल्ड मेडिकल मामले सामने आए हैं, जिन्हें व्हाइट लंग सिंड्रोम नाम दिया गया है।

इस रहस्यमयी बीमारी को लेकर वॉरेट काउंडी के एक अधिकारी ने कहा कि, व्हाइट लंग सिंड्रोम ओहयो मेडिकल डिपार्टमेंट के लिए चुनौती बना हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि ये बीमारी ठीक वैसी ही है, जैसी चीन में देखी जा रही है। है। इसको लेकर अनेक यूरोपीय राष्ट्र इसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

चीन वाला वायरस अमेरिका में भी दिख रहा

अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने इस बीमारी को लेकर सूत्रों के हवाले से बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर सब कुछ नॉर्मल है। लेकिन इसके बावजूद इस पर गौर फरमाने की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी तरह की कोई नई समस्या उत्पन्न न हो। इन सबके बावजूद ओहियो के अधिकारी इस बात की जांच में लगे हुए हैं कि बीमारी की लहर का आखिर कारण क्या है? रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्लेषक ये नहीं मानते कि ये कोई नई सांस से संबंधित बीमारी है। इसके बजाय, उनका मानना ​​है कि एक ही समय में कई वायरसों के मिलकर फैलना व्हाइट लंग सिंड्रोम का कारण हो सकता है।

बच्चों पर ज्यादा कर रहा प्रहार

इस बीमारी के चपेट में अधिकांश छोटे बच्चे आ रहे हैं। रिसर्च में पाया गया है कि औसतन 8 रोगियों में से 3 वर्ष से भी कम उम्र के बच्चे शामिल हैं, जो माइकोप्लाज्मा निमोनिया से पीड़ित हैं। इस बीमारी में हानिकारक वायरस फेफड़ों के संक्रमण का कारण बनते हैं। बैक्टीरिया से संबंधित सांस न लेने वाली बीमारी आमतौर पर हर कुछ वर्षों में बढ़ता है।

डेनमार्क और नीदरलैंड में निमोनिया का खतरा

एक रिसर्च के मुताबिक, कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन, मास्क पहनने और स्कूल बंद होने से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है, जिसकी वजह से बच्चे मौसमी संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गए हैं। इसे लेकर वॉरेन काउंटी के अधिकारियों ने कुछ गाइडलाइन जारी की है ताकि इस संक्रमण से बच्चे बचे रहें। इस बीमारी से बचे रहने के लिए वॉरेन काउंटी ने सलाह दी है कि समय-समय पर हाथ धोने, खांसी आने पर मुंह पर कपड़ा रखने , बीमार होने पर घर पर रहने और टीकों के बारे में अपडेट रहे।

विशेषज्ञों की तरह से बताए गए इस बीमारी का लक्ष्ण मुख्य बुखार, खांसी और थकान हैं। नीदरलैंड और डेनमार्क की स्टडी में पाया गया है कि निमोनिया के मामलों में रहस्यमय स्पाइक्स दर्ज हुआ है, जिनमें से कई को आंशिक रूप से माइकोप्लाज्मा है।

Created On :   1 Dec 2023 6:16 AM GMT

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