दैनिक भास्कर हिंदी: क्या युद्ध का संकेत है अमेरिका का साउथ कोरिया के साथ युद्धाभ्यास?

October 13th, 2017

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। नॉर्थ कोरिया से तनावपूर्ण संबंधों के बीच अमेरिकी नौसेना, दक्षिण कोरिया के साथ 16 से 26 अक्टूबर के बीच एक बड़े नौसेना अभ्यास की शुरुआत करने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों और अमेरिकी युद्धक विमानों का कोरियाई प्रायद्वीप के ऊपर से गुजरने के बाद इस युद्ध अभ्यास से सामरिक रणनीतिकारों का मानना है कि अब स्थितियां बेहद जटिल दौर में प्रवेश कर गई हैं। रणनीतिकार इस हलचल को युद्ध की तैयारियों के तौर पर देख रहे हैं। युद्ध की आशंका से कोरियाई प्रायद्वीप के अन्य देश भी चिंतित हो उठे हैं। गौरतलब है कि बीते मंगलवार ट्रंप ने अपने सैन्य प्रमुखों और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ बातचीत की थी, जिसमें नॉर्थ कोरिया के मिसाइल परीक्षण का जवाब देने पर चर्चा की गई थी।

अमेरिकी विमानों ने भरी थी उड़ानें
इस सप्ताह US B-1B बॉम्बर्स ने दक्षिण कोरिया के ऊपर से उड़ान भरी थी, जो सीधे तौर पर प्योंगयांग के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन का एक तरीका था। इससे कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने कहा था, 'नॉर्थ कोरिया के साथ अब सिर्फ एक चीज काम करेगी।' ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया का हवाला देते हुए यह भी कहा था 'यह तूफान से पहले की शांति है।' अगले सप्ताह अमेरिका और दक्षिण कोरिया बड़े नौसेना अभ्यास की शुरुआत भी करेंगे। यह अभ्यास भी नॉर्थ कोरिया के परमाणु और मिसाइल परीक्षणों के खिलाफ अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के मकसद से किया जाएगा। 

ट्रंप ने की सैन्य प्रमुखों से चर्चा
व्हाइट हाउस के मुताबिक, बीते मंगलवार ट्रंप ने अपने सैन्य प्रमुखों और रक्षा मंत्री जिम मैटिस के साथ बातचीत की थी, जिसमें नॉर्थ कोरिया के मिसाइल परीक्षण का जवाब देने पर चर्चा की गई। पूर्व एयरफोर्स ब्रिगेडियर रॉब गिवन्स के मुताबिक, 'अगर हम नॉर्थ कोरिया के कुछ रणनीतिक लक्ष्यों पर हमला करने का फैसला लेंगे तो यह बहुत जल्दी में लिया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका प्योंगयांग को डराने के लिए कोई फैसला नहीं लेता तब तक अमेरिकी नागरिकों को यही लगता रहेगा कि उनपर हमला होने वाला है। फिलहाल, ऐसे संकेत हैं अमेरिका या नॉर्थ कोरिया 1950-53 के बीच हुए युद्ध को फिर से दोहराने की तैयारी में हैं, जिससे यह प्रायद्वीप तबाह हो गया था। 

निर्णायक दौर में पहुंची स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि अब स्थितियां तनावपूर्ण दौर में प्रवेश कर गई हैं। अमेरिका अब मान कर चल रहा है कि उ. कोरिया के साथ युद्ध लगभग तय है। यही वजह है कि उसने निर्णायक तैयारियां शुरू कर दी हैं। ट्रंप और उनके सैन्य अधिकारियों के हालिया बयानों के विश्लेषण से भी समझा जा सकता है कि अब स्थिति निर्णायक दौर में पहुंचती जा रही है। व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ जॉन केली ने गुरूवार को कहा कि अमेरिकियों को नॉर्थ कोरिया के बढ़ते परमाणु और मिसाइल क्षमता को लेकर चिंतित होना चाहिए। केली ने यह भी कहा था कि नॉर्थ कोरिया को अमेरिका पर हमला करने की क्षमता हासिल करने से रोकना होगा। 

तनाव के बीच युद्धाभ्यास जारी 
दूसरी ओर, नॉर्थ कोरिया से तनावपूर्ण संबंधों के बीच अमेरिकी नौसेना ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया 16 से 26 अक्टूबर के बीच एक बड़े नौसेना अभ्यास की शुरुआत करेंगे। यह अभ्यास नॉर्थ कोरिया के परमाणु और मिसाइल परीक्षणों के खिलाफ अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए किया जाएगा। नॉर्थ कोरिया के हथियार कार्यक्रमों के कारण पिछले कुछ महीनों में कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका के प्रतिबंधों की अवहेलना करते हुए प्योंगयांग ने कई मिसाइलों का प्रक्षेपण किया और अपने छठे और सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण को अंजाम दिया। अमेरिका ने तब से क्षेत्र में अपने दो करीबी देशों दक्षिण कोरिया और जापान के साथ सैन्य अभ्यास को बढ़ा दिया है। एक बयान में अमेरिका के सातवें फ्लीट ने कहा कि इस अभ्यास में दक्षिण कोरिया के जंगी जहाजों को भी शामिल किया जाएगा। बयान में बताया गया कि यह अभ्यास जापान सागर और पीला सागर में किया जाएगा।