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ट्रंप के साथ बैठक से पहले रात में सैर को निकले थे किम, लोगों से मिलकर ली सेल्फी

June 12th, 2018 12:05 IST
ट्रंप के साथ बैठक से पहले रात में सैर को निकले थे किम, लोगों से मिलकर ली सेल्फी

हाईलाइट

  • ट्रंप से मुलाकात से पहले रात में शहर घूमने निकले किम जोंग उन, गार्डन में की सैर
  • पहली बार पब्लिक सेल्फी में दिखाई दिए नार्थ कोरियाई लीडर किम जोंग उन
  • सिंगापुर के विदेशमंत्री विवियन बालाकृष्णन ने उन्हें सिंगापुर के महत्वपूर्ण स्थलों की सैर कराई

डिजिटल डेस्क, सिंगापुर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच आज सुबह हुई बहुप्रतीक्षित मुलाकात के पहले उत्तर कोरियाई तानाशाह ने रात खास तरह से बिताई। किम रात करीब 9 बजे अपने पांच सितारा होटल कपेला (Capella) से अचानक बाहर निकले और सिंगापुर के एक गार्डन में सैर के लिए जा पहुंचे। उनके साथ उनके निकट सहयोगी और अंगरक्षक भी मौजूद थे। सिंगापुर सरकार के सुरक्षा सैनिक भी इस दौरान उनके साथ-साथ चलता रहा। 


रात में गार्डन की सैर को निकले
उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हुई हैं। स्वयं किम इस तनाव से बिल्कुल प्रभावित नहीं है। रात में वह अपनी मुलाकात के निश्चित परिणामों के प्रति पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे थे। यही वजह है कि वह अपनी सिंगापुर यात्रा को पूरी तरह इन्ज्वाय कर पा रहे हैं। बहुप्रतीक्षित मुलाकात से पहले की रात किम जोंग उन ने बिल्कुल अलग तरीके से गुजारी। बिना किसी पूर्व योजना के किम रात करीब 9 बजे अचानक अपने पांच सितारा होटल से बाहर निकले और सिंगापुर के एक गार्डन की सैर को निकल पड़े। इस दौरान उनके साथ उनके सहयोगी और निजी अंकरक्षक भी मौजूद थे। सिंगापुर सरकार का सुरक्षा दस्‍ता भी इस दौरान किम के साथ-साथ चल रहा था।


लोगों से गर्मजोशी से मिले, खिंचाई सेल्फी
किम जोंग उन सबसे पहले गार्डन बाय द बे पहुंचे। यह इलाका सिंगापुर की एक खुली जगह है। इस जगह पर उनके साथ सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्‍णन और सिंगापुर के शिक्षा मंत्री भी मौजूद थे। इस दौरान यहां फ्लावर वॉल के पास इन तीनों नेताओं ने सेल्‍फी भी ली। उल्लेखनीय है कि सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन भारतीय मूल के हैं। किम और ट्रंप की इस मुलाकात में बालाकृष्णन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गार्डन की सैर के दौरान किम बेहद खुश नजर आ रहे थे। वह गार्डन में मौजूद लोगों की ओर देख कर मुस्‍कुराए और हाथ हिला कर उनका अभिवादन किया। इस दौरान उत्तर कोरियाई नेता के साथ उनकी बहन और अन्य करीबी सहयोगी भी मौजूद थे।


सनकी राजनेता की छवि तोड़ना चाहते हैं किम
इसके अलावा उत्तर कोरिया के चैनल का कैमरामैन भी किम के साथ मौजूद था। किम की यात्रा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर को उत्तर कोरिया में प्रसारित किया जा रहा है। यही वजह है कि उत्तर कोरियाई नेता के साथ लगभग हर समय कैमरामैन साथ चल रहा है। इन दिनों किम अपनी छवि को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं। उनकी दुनिया के सामने एक सनकी तानाशाह की छवि बनी हुई है। अब वह इस छवि को तोड़ कर एक जिम्मेदारी राष्ट्राध्यक्ष के रूप में अपने को स्थापित करना चाहते हैं। ट्रंप से मुलाकात भी उनकी इसी कोशिश का नतीजा है। 


मीटिंग पर खर्च हुए 100 करोड़ से अधिक 
गौरतलब है कि किम जोंग एयर चाइना के विमान से सिंगापुर पहुंचे हैं, तो ट्रंप अमेरिका के एयरफोर्स वन से यहां पहुंचे हैं। इस मुलाकात में कोई कमी न रह जाए इसके लिए मेजबान सिंगापुर ने जबरदस्त तैयारी की है। इस तैयारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मीटिंग पर भारतीय रुपयों में करीब 100 करोड़ से अधिक का खर्च आया है। 
 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।