comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

ब्रिटेन ने नस्लवाद के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष का आग्रह किया

June 09th, 2020 18:00 IST
 ब्रिटेन ने नस्लवाद के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष का आग्रह किया

हाईलाइट

  • ब्रिटेन ने नस्लवाद के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष का आग्रह किया

लंदन, 9 जून (आईएएनएस)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने नस्लवाद और भेदभाव को हराने के लिए देशवासियों से शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से काम करने का आग्रह किया है। मंगलवार को यह जानकारी दी गई।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के एकमात्र अश्वेत राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र द वॉइस के लिए एक लेख में जॉनसन ने लिखा कि सरकार 25 मई को अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद लोगों के गुस्से और अन्याय को नकारने की भावना को नजरअंदाज नहीं कर सकती। निहत्थे अफ्रीकी-अमेरिकी फ्लॉयड की अमेरिका में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि फ्लॉयड की मृत्यु ने गुस्से और अन्याय को नकारने की भावना को जगाया , एक ऐसी भावना जिसका सामना अश्वेत, अल्पसंख्यक जातीय समूहों के लोग शिक्षा में, रोजगार में, आपराधिक कानून के आवेदन में भेदभाव के रूप में करते हैं।

उन्होंने लिखा, हम उस भावना की गहराई को अनदेखा नहीं कर सकते हैं जो उस दृश्य को देखकर उभरा है, जिसमें एक अश्वेत शख्स पुलिस के हाथों अपनी जान गंवाते हुए नजर आ रहा है।

जॉनसन का मानना है कि ब्रिटेन 40 साल पहले की तुलना में बहुत कम नस्लवादी समाज है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने ब्लैक लाइव्स मैटर के प्रदर्शनकारियों को सुना है और स्वीकार किया कि सभी के साथ समान रूप से व्यवहार किया जाना सुनिश्चित करने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है।

जॉनसन ने कहा, हमें स्पष्ट रूप से यह भी स्वीकार करना चाहिए कि पूर्वाग्रह को खत्म करने और अवसर पैदा करने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है और मैं जिस सरकार का नेतृत्व करता हूं वह इस प्रयास के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रदर्शन के दौरान सामाजिक दूरी नियमों का पालन करने वालों का प्रधानमंत्री ने आभार जताया। हालांकि, उन्होंने चेताया भी कि आगे के बड़े प्रदर्शनों ने कोरोनोवायरस महामारी को नियंत्रण में लाने के ब्रिटेन के प्रयासों को खतरे में डाल दिया है।

फलॉयड की मौत ने एक अंतर्राष्ट्रीय आक्रोश को जन्म दिया है और विश्व के कई हिस्सों की तरह ब्रिटेन के शहरों में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

मंगलवार को देश में और प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें लंदन और ऑक्सफोर्ड के प्रदर्शन शामिल हैं।

कमेंट करें
nT28s
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।