दैनिक भास्कर हिंदी: मसूद अजहर अब ग्लोबल टेररिस्ट, दुनिया के दबाव में झुका चीन, भारत की कूटनीतिक जीत

May 2nd, 2019

हाईलाइट

  • संयुक्त राष्ट्र ने JeM प्रमुख मौलाना मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर दिया है
  • भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।
  • ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने के बाद मसूद अजहर को कई बड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को पाकिस्तान की धरती पर पल रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) प्रमुख मौलाना मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर दिया। भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने के बाद मसूद अजहर को कई बड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। दुनियाभर के देशों में मसूद अजहर की एंट्री पर बैन लग जाएगा। वह किसी भी देश में आर्थिक गतिविधियां नहीं कर सकेगा। दुनिया भर के दबाव के बाद चीन को अपना टेक्निकल होल्ड हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा जिसके बाद मसूद अजहर के ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया जा सका है। बता दें कि इससे पहले 4 बार चीन अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव में अड़ंगा लगा चुका है।

भारत ने दिया समर्थन देने वाले देशों को धन्यवाद
मसूद अजहर के ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, 'इस काम में बड़े-छोटे (देशों), सभी का साथ मिला। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में मसूद अज़हर को आतंकी घोषित कर दिया गया है। समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद।' अमेरिका, ब्रिटेन समेत उन सभी देशों का धन्यवाद जो परिषद के अंदर और बाहर हैं। साथ ही साथ यह दिन उन लोगों के लिए बहुत ख़ास है जो आतंकवाद के लिए ज़ीरो टॉलरेंस चाहते हैं। अकबरुद्दीन ने कहा, 'यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत कई सालों से इसकी कोशिश करता रहा है। अब जाकर भारत को ये कामयाबी मिली है।'

क्या कहा चीन ने?
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव पर उसे आपत्ति नहीं है इसीलिए उसने अपना टेक्निकल बैन हटाया है। गेंग शुआंग ने कहा, 'चीन ने रचनात्मक और जिम्मेदार तरीके से संबंधित पक्षों के साथ संवाद किया है है। हाल ही में, प्रासंगिक देशों ने 1267 कमेटी में लिस्टिंग प्रस्ताव को संशोधित कर प्रस्तुत किया। संशोधित सामग्रियों के सावधानीपूर्वक अध्ययन और संबंधित पक्षों की राय को ध्यान में रखने के बाद, चीन को लिस्टिंग प्रस्ताव पर आपत्ति नहीं है।'

गेंग शुआंग ने कहा, 'इसे मुद्दे के उचित समाधान से पता चलता है कि अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी सहयोग में, हमें संयुक्त राष्ट्र के नियमों और प्रक्रियाओं को बनाए रखना होगा। पारस्परिक सम्मान के सिद्धांत का पालन करना होगा, मतभेदों को हल करना होगा और बातचीत के माध्यम से आम सहमति बनाना होगा और तकनीकी दिक्कतों के राजनीतिकरण को रोकना होगा।'

फ्रांस ने किया फैसले का स्वागत
संयुक्त राष्ट्र में अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट के रूप में लिस्ट करने के प्रस्ताव के प्रायोजकों में से एक फ्रांस, इस कदम का स्वागत करने वाला पहला देश है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लिया गया यह निर्णय हमारे प्रयासों के सफल होने का संकेत देता है।'

ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने का क्या होगा असर?
इस फैसले के बाद दुनियाभर के देशों में मसूद अजहर की एंट्री पर बैन लग जाएगा। वह किसी भी देश में आर्थिक गतिविधियां नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को मसूद के बैंक अकाउंट्स और प्रॉपर्टी को फ्रीज करना पड़ेगा। मसूद अजहर से संबंधित व्यक्तियों या उसकी संस्थाओं को कोई मदद नहीं मिलेगी। वहीं पाकिस्तान को भी मसूद अजहर के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने पड़ेंगे। बैन के बाद पाकिस्तान को मसूद अजहर के टेरर कैंप और उसके मदरसों को भी बंद करना पड़ेगा।

चीन चार बार लगा चुका है अड़ंगा
मसूद पर प्रतिबंध लगाने के लिए सबसे पहले 2009 में यूपीए सरकार ने प्रस्ताव पेश किया था। उस समय प्रस्ताव पेश करने वाला भारत अकेला देश था। इसके बाद जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने यह प्रस्ताव पेश किया।  भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र की अल कायदा प्रबंध समिति के समक्ष यह प्रस्ताव पेश किया था लेकिन चीन ने अपना टेक्निकल होल्ड लगा दिया था। 2017 में फिर एक बार मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए अमेरिका ने 2017 में संयुक्त राष्ट्र की समिति के समक्ष प्रस्ताव पेश किया। अमेरिका के इस प्रस्ताव का समर्थन ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने किया था। लेकिन चीन ने इस प्रस्ताव में भी अपना अड़ंगा लगा दिया था। 2019 में पुलवामा हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से संयुक्त राष्ट्र की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के समक्ष नया प्रस्ताव लाया गया लेकिन चीन ने इस प्रस्ताव पर भी टेक्निकल होल्ड लगा दिया था।