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जानिए, कौन हैं अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के पति,  19 साल की उम्र में गई थीं US 

जानिए, कौन हैं अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के पति,  19 साल की उम्र में गई थीं US 

हाईलाइट

  • कमला के पति एमहॉफ अपनी नई भूमिका में एक बैरियर ब्रेक्र होंगे।
  • पत्नी कमला हैरिस के करियर को उड़ान भरने में मदद की
  • कमला हैरिस उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी

न्यूयॉर्क (आईएएनएस)। दिसंबर 2020 में, ओपरा मैगजीन ने अमेरिका के पहले सेकेंड जेंटलमैन डग एमहॉफ को द अल्टीमेट हाइप मैन, हम सभी, जैसा कि हम सब साथी के रूप में डिजर्व करते हैं के रूप में वर्णित किया, जिस तरह से उन्होंने पत्नी कमला हैरिस के करियर को उड़ान भरने में मदद की, इससे इस बात में कोई शक नहीं कि वह उनके अल्टीमेट हाइप मैन हैं।उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहीं कमला के पति एमहॉफ अपनी नई भूमिका में एक बैरियर ब्रेक्र होंगे। एमहॉफ की यह दूसरी शादी है, उन्होंने 2014 में कमला से शादी की थी। 

नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस विषय पर संक्षेप में बात की, जब उन्होंने हैरिस का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना, लेकिन उनकी टिप्पणी टैक्नीकैलिटीज के बारे में थी। इस तथ्य के बारे में कि एमहॉफ पहले सेकेंड जेंटलमैन होंगे, जिन्हें अमेरिका जानेगा।

कमला और उनके पति के बीच रिश्तों में ऐसी गार्महट है कि दोनों सार्वजनिक डोमेन में इसे साझा करने को लेकर काफी सहज महसूस करते हैं। 7 नवंबर, 2020 को एमहॉफ की पिक्चर पोस्ट को ही ले लीजिए। उन्होंने हरे घास के मैदान की पृष्ठभूमि में कमला को गले लगाए तस्वीर पोस्ट की साथ में दो हॉर्ट और दो अमेरिकी झंडे वाली इमोजी भी पोस्ट कर लिखा, मुझे तुमपर बहुत गर्व है।

एमहॉफ दूसरा (या पहला) जीवनसाथी बनने वाले पहले यहूदी व्यक्ति भी होंगे। हैरिस और एमहॉफ की राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद के लिए पहली अंतर-नस्लीय जोड़ी होगी, और जिल बाइडेन की तरह एमहॉफ पढ़ाएंगे, जबकि हैरिस उपराष्ट्रपति पद पर काबिज होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगी।

एमहॉफ जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में आगामी वसंत सेमेस्टर में एंटरटेनमेंट लॉ विवाद पर व्याख्यान के साथ इसकी शुरुआत करेंगे। इसके अतिरिक्त, एमहॉफ प्रतिष्ठित जॉर्जटाउन लॉज इंस्टीट्यूट फॉर टेक्नोलॉजी लॉ एंड पॉलिसी में एक प्रतिष्ठित फेलो के रूप में काम करेंगे। साल 2020 के चुनाव के ठीक पहले एमहॉफ ने इंटरनेशनल लॉ फर्म डीएलए पाइपर की पार्टनरशिप छोड़ने की घोषणा की थी।

कमला हैरिस : एक माहिर मुसाफिर के व्हाइट हाउस पहुंचने का सफर

 अमेरिका की नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ओकलैंड, कैलिफोर्निया, अर्बाना शैम्पेन, इलिनॉय, बर्कले, क्यूबेक, कनाडा, वाशिंगटन, डी.सी. के बाद दो बार कैलिफोर्निया का सफर कर चुकी हैं, और अब व्हाइट हाउस पहुंचने जा रही हैं। जब कमला हैरिस आखिरकार देश के बेहद प्रभावशाली ओहदे पर पहुंची हैं तो यह अमेरिका में उनके लंबे सफर का एक परमोत्कर्ष है।

कमला हैरिस ने अपने संस्मरण द ट्रथ्स वी होल्ड में लिखा है, मैं 12 साल की थी और फरवरी में कैलिफोर्निया से दूर स्कूल के साल के मध्य में, 12 फीट बर्फ से ढके एक फ्रांसीसी भाषी विदेशी शहर में जाने का विचार परेशान कर देने वाला था।

अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति के रूप में हैरिस का आगमन पहियों की कहानी है, जो रुक-रुक कर चलती है, और नई दिशाओं में निकलती है। सबसे पहले, उनके माता-पिता अकादमिक उपलब्धि की तलाश में आए और फिर हैरिस ने अपने राजनीतिक करियर में चार चांद लगाया।

उन्होंने 2019 के एक साक्षात्कार के दौरान पत्रकार डैना गुडइयर को बताया था, मेरे बचपन की बहुत ज्वलंत स्मृति मेफ्लावर ट्रक थी। मेफ्लावर अमेरिका की सबसे बड़ी पूर्ण सेवा वाली मूविंग कंपनियों में से एक है। हैरिस ने गुडइयर से कहा, हम बहुत आगे बढ़ गए। लेकिन अमेरिकी शहरों के बीच हैरिस की यात्रा लगभग एक महिला यात्री के बाद आता है और हैं उनकी मां श्यामला गोपालन, जो तमिलनाडु की हैं। 

जब श्यामला 1958 में अमेरिका आई थीं तो तब वह 19 साल की थीं और अपने परिवार से विदेश में पढ़ने जाने वाली पहली शख्स थीं। उन्होंने एक ऐसी यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था, एक ऐसे देश में थीं, जहां पहले वह कभी नहीं गई थीं।

कमला के पिता डोनाल्ड हैरिस का भी कुछ ऐसा ही सफर रहा था। वर्ष 1961 में कमला के माता-पिता से मुलाकात हुई और 1963 में शादी हुई। कुल मिलाकर कमला हैरिस की कहानी एक मंजी हुई यात्री की है। जब वह उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी, तब यह उनकी मां की मातृभूमि मद्रास और पिता की मातृभूमि ब्राउन्स टाउन (जमैका) के लिए एक सर्वश्रेष्ठ उपहार होगा।

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डिजिटल इंडिया को गति देता रोहित मेहता का Startup Digital Gabbar

डिजिटल इंडिया को गति देता रोहित मेहता का Startup Digital Gabbar

डिजिटल डेस्क,भोपाल। "सफलता सिर्फ उनको नहीं मिलती जो सफल होने की इच्छा रखते है, सफल हमेशा वही होता है जो आगे बढ़ कर उन्हे पाने की चाहत रखते है।" ये उद्धहरण उनके लिए नहीं है जो आराम की जिंदगी को छोड़ कर बाहर नहीं निकालना चाहते, बल्कि ये उनपे लागू होती है जो निरंतर प्रयास करते रहते है।

इसी तर्ज पर चलते हुए, बिहार के पटना के शहर से आने वाले आईटी और तकनीक प्रेमी डबल मास्टर्स डिग्री धारी ने डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय यात्रा शुरू की थी, लेकिन आज वो इस मुकाम पर पहुँचे जाएंगे उन्होंने ऐसा नहीं सोचा होगा, की कुछ साल बाद, वह उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनेंगे जो digital content curation में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं।

उक्त व्यक्ति और कोई नहीं, बल्कि प्रसिद्ध digital marketer रोहित मेहता हैं, जो एक ब्लॉगर के रूप में उत्कृष्ट हैं और एक प्रख्यात आईटी विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने अपनी ज्ञानवर्धक ई-पुस्तकों के साथ दुनिया के साथ अपने ज्ञान को साझा करते हुए कई अहम भूमिकाएँ निभाई हैं।

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आज, रोहित मेहता डिजिटल गब्बर (Digital Gabbar) नामक भारत के सबसे बड़े डिजिटल कंटेंट प्लेटफ़ॉर्म के संस्थापक संपादक हैं, एक अभूतपूर्व विज़न जिसका नेतृत्व डिजिटल उत्साही लोगों के एक समूह द्वारा किया जा रहा है।

जीवन में अपनी विभिन्न गतिविधियों पर रोहित के साथ बातचीत में, वे कहते हैं, " हर दूसरे आदमी की तरह, मैं भी इंटरनेट की दुनिया में नया था जब मैनें इसमे कदम रखा था। शुरू से ही कुछ नया सीखने और उसको साझा करने की चाहते ने मुझे ब्लॉगिंग में अपना करियर शुरू करने की प्रेरणा दी, तब से मैंने पीछे नहीं देखा हर एक नए सुबह के साथ इच्छा सकती मजबूत होती गई, Digital Gabbar शुरू करने से पहले बहुत से ब्लॉग/वेबसाइटें शुरू की मगर खुशी (kick) नहीं मिली”।

"डिजिटल गब्बर केवल एक ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि हमारे पाठकों के साथ जुड़ने का जरिया है जो किसी भी सीमा से परे है। हम ब्लॉगिंग, एफिलिएट से सम्बंधित टिप्स और ट्रिक्स की अपडेटेड जानकारी साझा करते हैं। जैसे : मार्केटिंग, एसईओ, ड्रापशीपिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनी मेकिंग, गाइड्स, ट्यूटोरियल्स और बहुत कुछ।  

डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कैरियर का नेतृत्व करने के बाद, डिजिटल गब्बर की टीम लोकप्रिय डिजिटल मार्केटर्स, ब्लॉगर्स, YouTubers, उद्यमियों के साथ साक्षात्कार की एक श्रृंखला शुरू करने पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में डिजिटल इंडिया उनकी एक झलक दिखा सकें। जीवन की कहानियां जो प्रेरणा मिलती है वो सायद ही किसी और कार्य से मिलती होंगी।

रोहित मेहता के प्रमुख योगदान

आज दूरदर्शी रोहित मेहता ने डिजिटल मार्केटिंग, ब्लॉगिंग, एफिलिएट, एसईओ, ड्रापशीपिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनी मेकिंग मे अनेकों गाइड्स और सुझावों इत्यादि अपने पाठकों के डिजिटल गब्बर पे बिल्कुल मुफ़्त में साझा करते है।

साथ ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नए उधमियों को मुफ़्त मे सलाह भी साझा करते है। @bloggermehta से आप इन्हे फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम,ट्विटर इत्यादि पे संपर्क कर सकते है।

गब्बर रोहित का लक्ष्य

अपने ब्लॉग डिजिटल गब्बर के अनुशार रोहित बताते है की उनका लक्ष्य सिर्फ जानकारी को साझा करना नहीं है, बल्कि डिजिटल इंडिया के युवाओ से उसको अमल भी करवाना चाहते है। ताकि आने वालों कुछ सालों में डिजिटल के क्षेत्र में इंडिया युवा पीढ़ी किसी से काम न रहे। यही कारण है की इन्होंने डिजिटल गब्बर की शुरुवात हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओ में एक साथ की है।

https://www.digitalgabbar.com/ और https://www.digitalgabbar.in/ क्रमशः रोहित के इंग्लिश और हिंदी के ब्लॉग है।

साथ ही साथ रोहित मेहता ने अपने जैसे युवाओ और start-up को बढ़ावा देने के लिए Indian Gabbar के नाम से एक साइट शुरू किया है। Digital Gabbar सभी उधमी और startup को Indian gabbar के रूप में संबोधित करते हुए उनकी आर्टिकल को बिल्कुल मुफ़्त में साझा कर रहा है।

कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्थान आपनी कहानी प्रकाशित करने के लिए Indian Gabbar से संपर्क करें। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।