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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने टोलो न्यूज पर दिया साक्षात्कार , भारत पर टिप्पणी करने पर जम कर हुए ट्रोल

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने टोलो न्यूज पर दिया साक्षात्कार , भारत पर टिप्पणी करने पर जम कर हुए ट्रोल

हाईलाइट

  • फिर ट्रोल हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री
  • अफगानी न्यूज चैनल को दिया इंटरव्यू
  • भारत से जुड़े मसलों पर की चर्चा

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री "शाह महमूद कुरैशी" हाल में अपने एक इन्टरव्यू के  चलते काफी चर्चा में हैं, और अपने दिए हुए बयानों के चलते काफी आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है ।
हाल में शाह महमूद ने अफगानिस्तान के न्यूज़ चैनल टोलो न्यूज़ के प्रमुख "लोतफुल्लाह नजफीजादा" को साक्षात्कार दिया है, जो की काफी चर्चाओं में है। टोलो न्यूज़ ने अपने ट्विटर हैंडल से, साक्षात्कार के कई सारी वीडियो पोस्ट किए है , जिसके चलते पाकिस्तान विदेश मंत्री को काफ़ी ट्रोल किया जा रहा है।

लोतफुल्लाह के सवालों में फसे शाह महमूद …!!!
पाकिस्तानी विदेश मंत्री अपने साक्षात्कार में, कई सवालों पर उलझते और फंसते दिखे, साथ ही महमूद ने अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए ।
"अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी जरूरत से ज्यादा है"
 शाह महमूद से टोलो न्यूज़ द्वारा पूछे गए सवाल और उनके जवाब : 
सवाल: अफगानिस्तान में भारत कितने दूतावास हैं ?
जवाब : वैसे आधिकारिक रूप से तो कुल 4 दूतावास हैं, बाकी अनाधिकारिक कितने हैं ये आप को पता होगा।
इस सवाल पर आगे बात करते हुए कुरैशी ने कहा, "अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी जरूरत से ज्यादा है", देखा जाए तो ,अफगानिस्तान और भारत की सरहद एक दूसरे से नहीं मिलती है , और जाहिर है कि भारत के अफगानिस्तान साथ मज़बूत राष्ट्रिय संबंध हैं, और दोनों देशों के बीच द्विपक्षी संबंध है , और यह आपका अधिकार भी है , दोनों देशों के बीच कारोबार भी है, जिस से हमें कोई परेशानी नहीं है ।
सवाल: अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी आपको परेशान करती है ?
जवाब: अगर अफ़गानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किया जाए , फिर तो वह परेशानी वाली बात है ।

 तालिबान नेता की पाकिस्तान में मौजूदगी पर किए गए सवाल पर बिगड़े कुरैशी

टोलो न्यूज़ के प्रमुख लोतफुल्लाह के एक सवाल में तालिबानी नेता हैबतुल्लाह के ज़िक्र पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद बिगड़ते दिखे और यह कहा की तालिबान अफगानिस्तान में शांति चाहता है

सवाल: तालिबानी नेता हैबतुल्लाह और सिराजुद्दीन हक्कानी क्या पाकिस्तान में नहीं हैं ?
जवाब: आप आरोप लगा रहें है , वैसे आप अपनी सरकार से ही पूछें ।

इस पर आगे सवाल करते हुए लोतफुल्लाह ने कहा की तालिबानी नेता शेख अब्दुल हकीम , पिछले महीने अपने नेताओं से बात करने अफगानिस्तान आए थे , और उन्होंने आधिकारिक रूप से कहा था के वे पाकिस्तान से हैं ;
जिसका जवाब देते हुए शाह महमूद ने कहा ,मेरा उनसे इस पर कोई चर्चा नहीं हुई , और मुझे इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है, वैसे तालिबान भी अफ़गानिस्तान में शांति चाहता है। इस बात पर लोतफुल्लाह ने शाह महमूद को टोकते हुई कहा आप कैसे जानते हैं की तालिबान मुल्क में शांति चाहता है, जिसके जवाब में कुरैशी ने कहा के हमारी उनसे बात होती रही है ।

मंत्री शाह महमूद ने किया तालिबान का बचाव 

अफ़गानिस्तान में हो रही हिंसा पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बचाव करते दिखे , शाह महमूद ने कहा अगर आप दोबारा यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि मुल्क में तालिबान के कारण हिंसा हो रही तो, यह बात को बढ़ा चढ़ा कर बताना है, मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि तालिबान के अलावा और भी कई संगठन हैं जो स्थिति खराब करने की भूमिका निभा रहे हैं ,आईएसआईएस  जैसे ताकतें आपके मुल्क के अंदर मौजूद हैं। और हम तालिबानी नेताओं को पनाह नहीं दे रहे हैं और देखा जाए तो उनके कई सारे नेता अफ़गानिस्तान में मौजूद हैं।

डूरंड लाईन पर किया सवाल..!

साक्षात्कार में लोतफुल्लाह ने डूरंड लाईन पर भी सवाल किए। डूरंड लाइन वह सीमा का नाम है जो पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान को अलग अलग सरहदों में विभाजित करती है। जिसको अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाने को लेकर शाह महमूद से सवाल किया ।
सवाल: क्या डूरंड लाइन को अंतर्राष्ट्रीय सीमा मानना चाहिए ? 
जवाब: अगर आप एक साथ देना चाहते हैं और साथ विकास कर आगे बढ़ने के भावना रखते हैं तो ज़रूर डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के तौर पर स्वीकार कर लेना चाहिए । 
सवाल: क्या आप इस लिए अफ़गानिस्तान की सरकार से बात करेंगे ?
जवाब : वैसे इस पर कोई बातचीत की आवश्यकता नहीं है, और मेरा यह मानना है की डूरंड लाइन एक अंतरराष्ट्रीय सीमा है ।

9/11 हमले के बाद बदली अफ़गानिस्तान की स्थिति
 अफगनिस्तान में लंबे समय से तालिबान प्रभावी और मुल्क में तालिबानियों को बीते समय काफी हस्तक्षेप रहा परंतु 9/11 में हुए हमले के बाद वहां की स्थितियों में सुधार आया और मुल्क में चुनी हुई सरकार आई ,जिस के चलते पाकिस्तान की मुल्क पर पकड़ कमज़ोर पड़ने लगी और इस पर पाकिस्तान, मुल्क  में भारत की बढ़ती मौजूदगी पर सवाल उठाता रहा है।
और अफ़गानिस्तान की सरकार, पाकिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाते रहे हैं ।
 
अफ़गानिस्तान के एन.एस.ए की टिप्पणी पर नाराज़ हुए शाह महमूद 

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्लाह मोहिब की पिछले महीने पाकिस्तान पर की गई एक टिप्पणी को लेकर नाराज़गी जताई । द्रहसल मोहिब ने पिछले महीने पाकिस्तान पर अफ़गानिस्तान में आस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया था ।

11 सितंबर को अफ़गानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की वापसी 
 
अमरीकी राष्ट्रपति जोए बाईडन ने अफ़गानिस्तान में बचे हुए सैनिकों को वापस अमेरिका बुलाने की घोषणा अप्रैल के महीने में की थी , दरअसल आने वाली 11 सितंबर को अमेरिका में अलकायदा के हमले की बरसी है , अमेरिका का मानना है कि अलकायदा ने 9/11 का हमला अफ़गानिस्तान से किया था , जिसके चलते अमेरिका ने योजना तैयार कर वहां से अलकायदा को अस्थाई रूप से बाहर किया था और तालिबानियों को सत्ता से हटाया था।
आने वाले सितंबर महीने में अमेरिका अपने बचे हुए 2500-3000 सैनिकों को वापस बुलाने की बात कही है , वहीं ब्रिटेन भी अपने 750 सैनिकों को भी वापस बुला रहा है ।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।