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थाईलैंड रेस्क्यू ऑपरेशन: गुफा से बचाए गए सभी बच्चे, यूं अंजाम पर पहुंचा मिशन

July 11th, 2018 11:09 IST
थाईलैंड रेस्क्यू ऑपरेशन: गुफा से बचाए गए सभी बच्चे, यूं अंजाम पर पहुंचा मिशन

हाईलाइट

  • थाईलैंड रेस्क्यू ऑपरेशन रहा सफल, बचाए गए सभी बच्चे और कोच
  • तीन दिनों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
  • 23 जून से थाईलैंड की लुआंग गुफा में फंसे थे बच्चे और उनके फुटबॉल कोच।
  • गुफा में अभी भी 1 बच्चा और फुटबॉल कोच फंसे हुए हैं।
  • गुफा में अभी भी 1 बच्चा और फुटबॉल कोच फंसे हुए हैं।

डिजिटल डेस्क, बैंकाक। 23 जून से थाईलैंड की लुआंग गुफा में फंसे बच्चों और उनके फुटबॉल कोच को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। तीन दिनों से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत सभी 12 बच्चों और उनके कोच को बचा लिया गया है। मंगलवार को रेस्क्यू ऑपरेशन का तीसरा दिन था, जिसमें बचे हुए चार बच्चों और कोच को बाहर निकाल लिया गया। इन पांचों को एयरलिफ्ट कर हॉस्पिटल ले जाया गया है, जहां ये बाकी रेस्क्यू किए गए बच्चों के साथ ट्रीटमेंट ले रहे हैं।

इससे पहले पिछले दो दिनों में 8 बच्चों का रेस्क्यू किया गया था। सोमवार को 4 और मंगलवार को भी 4 बच्चों को बचाया गया था। बता दें कि बच्चों को बचाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन में गोताखोरों की एक टीम बनाई गई थी। इसमें विदेशी गोताखोर और थाइलैंड नेवी सील के गोताखोर शामिल थे। 2-2 गोताखार मिलकर एक-एक बच्चे को बाहर निकाल रहे थे। इन गोताखोरों ने अंधेरे और पानी से भरे सकरे रास्ते को पार करने में बच्चों की मदद करते हुए उन्हें गुफा से बाहर निकाला।
 



इस रेस्क्यू ऑपरेशन में थाइलैंड को विदेशी देशों से भी मदद मिली। अमेरिका, चीन, जापान, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के कई गोताखोर इस बचाव कार्य में लगे रहे। थाइलैंड और विदेशी देशों के कुल 90 गोताखोर इस ऑपरेशन में जुटे हुए थे। इस बचाव अभियान में एक हजार से ज्यादा थाइलैंड के जवान और विशेषज्ञ भी लगे हुए थे।

बच्चों को सुरक्षित वापस लाने के लिए गोताखोर की टीम ने जो प्लान बनाया था उसके तहत गोताखोर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर तैरते हुए गुफा के अंदर गए। बच्चों तक पहुंचने में गोताखोरों को 6 से 7 घंटे का वक्त लगा लेकिन सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को वहां से निकालकर लाना रही। बच्चों के लिए सिलेंडर के साथ इतने लंबे वक्त तक तैरना मुमकिन नहीं था। साथ ही बच्चे काफी थके हुए थे और खाने की कमी की वजह से कमजोर भी हो गए थे। इसलिए एक-एक बच्चे को लाने के लिए 2-2 गोताखारों को भेजा गया। बीच-बीच में बारिश की वजह से पानी का स्तर बढ़ने से भी ऑपरेशन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

ऐसे फंसे थे बच्चे
23 जून को स्थानीय समयानुसार करीब 10 बजे 12 बच्चों की यह फुटबॉल टीम अपने कोच समेत फुटबॉल की प्रैक्टिस के लिए पहुंची थी। प्रैक्टिस के बाद से यह टीम गायब थी। बच्चों के गायब होने का पता उस समय लगा जब बच्चों में से एक लड़के के माता-पिता ने टैम-लोंग- खुनाम नांगनोन नेशनल पार्क के कर्मियों को बताया कि उनका बेटे से संपर्क नहीं हो पा रहा है। बच्चों को ढुंढते हुए नेशनल पार्क के कर्मियों ने देखा कि 12 साइकिलें गुफा के प्रवेश द्वार पर खड़ी हैं। इसी के बाद से बच्चों को खोजने का अभियान शुरू हुआ।
 



बच्चे गुफा में क्यों गए इसके पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। किसी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि बच्चे गुफा में एक सरप्राइज पार्टी के लिए गए थे। वहीं एक मीडिया रिपोर्ट में टीम के एक अन्य सदस्य जो उस दिन गुफा में अपने दोस्तों के साथ नहीं गया था उसके हवाले से बताया है कि टीम इससे पहले भी तीन बार उस गुफा में जा चुकी है। गुफा में टीम के पहुंचने के बाद से ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। बाढ़ के पानी से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया था। इसके बाद कोच के साथ सारे बच्चे गुफा में भटकते हुए और फंसते चले गए थे।
 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।