दैनिक भास्कर हिंदी: अमेरिका-चीन के बीच शुरू हुआ ट्रेड वॉर, भारत की भी बढ़ेंगी मुश्किलें

September 5th, 2018

हाईलाइट

  • दुनिया के दो बड़े ताकतवर देश अमेरिका और चीन के बीच शुक्रवार को ट्रेड वॉर की शुरूआत होने वाली है।
  • आज रात से अमेरिका चीनी सामानों पर भारी-भरकम शुल्क लगाने जा रहा है।
  • चीन ने भी निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया है।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। दुनिया के दो बड़े ताकतवर देश अमेरिका और चीन के बीच शुक्रवार को ट्रेड वॉर की शुरूआत होने वाली है। आज रात से अमेरिका चीनी सामानों पर भारी-भरकम शुल्क लगाने जा रहा है। चीन ने भी डॉलर का बदला डॉलर से लेने के लिए अपना रुख साफ करते हुए निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अरबों अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा की चीनी वस्तुओं पर भारी-भरकम शुल्क लगाने का फैसला लिया था। दुनिया की शीर्ष दो अर्थव्यवस्थाओं के बीच पैदा हुए व्यापार युद्ध की जद में भारत के भी आने की आशंका बढ़ गई है। 

पिछले महीने जून में सिंगापुर में सपन्न शांगरी-ला वार्ता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत की विदेश नीति पर दिए बयान ने भी भारत-अमेरिका संबंध में बढ़ती असहमति की तरफ इशारा किया था। लिहाजा दोनों देशों के बीच बढ़ती असहमित इनके रिश्तों में मतभेद के संकेत तो दे ही रही है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की साख बढ़ाने की कोशिशों से भी कुछ खास फायदा होता नजर नहीं आ रहा है। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध में पिछले कुछ दिनों से तनाव के संकेत मिल रहे हैं और टू प्लस टू डायलॉग का स्थगन इसी कड़ी का हिस्सा है। रूस और भारत के बीच S-400 मिसाइल के और ईरान से तेल का व्यापार करने पर अमेरिका पहले ही भारत को चेतावनी दे चुका था। अमेरिका ने कहा था कि अगर भारत ईरान से तेल की खरीदी करता है तो अमेरिका बहुत चीजों को लेकर भारत पर प्रतिबंध लगा देगा। 

अमेरिका ने चीनी स्टील पर 25 और एल्युमुनियम पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाया है। माना जा रहा है कि ट्रंप के इस फैसले से चीन से अमेरिका आने वाली वस्तुएं 25 फीसदी महंगी हो जाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस टकराव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में खलबली पैदा हो जाएगी और विश्व व्यापार प्रणाली पर इसका काफी नकारात्मक असर पड़ेगा। उद्योग जगत में असहजता के नए संकेत उस वक्त देखने को मिले जब एक व्यापार सर्वेक्षण में फिर दिखाया गया कि अमेरिका के सेवा क्षेत्र में पहले से ही आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी दिक्कतें पेश आ रही हैं और व्यापार बंदिशें बढ़ने की आशंका से लागत में इजाफा दर्ज किया जा रहा है। आपूर्ति प्रबंधन संस्थान की सेवा उद्योग सर्वेक्षण समिति के प्रमुख एंथनी नाइव्स ने बताया कि हमने मुद्रास्फीति के संकेत देखने शुरू कर दिए हैं. व्हाइट हाउस के व्यापार अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती का मतलब है कि यदि यह युद्ध ज्यादा बढ़ता है तो ऐसी स्थिति में अमेरिका अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ज्यादा दर्द सह पाने में सक्षम है।

अमेरिका में रात और चीन में दोपहर से लागू
ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि वॉशिंगटन में आधी रात के बाद से चीनी सामानों पर शुल्क लागू हो जाएगा। पेइचिंग के हिसाब से शुक्रवार की दोपहर को यह टैरिफ लागू होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा है कि अगले दो हफ्तों में चीन से आयात होने वाले 16 अरब डॉलर के समान पर भी टैरिफ लगेगा। यह आंकड़ा 550 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो चीन से अमेरिका निर्यात किए जाने वाले सामानों से भी ज्यादा है।

पहली बार सीधे तौर पर टैरिफ वसूलेगा अमेरिका

ऐसा पहली बार होगा, जब अमेरिका सीधे तौर पर चीनी सामानों से टैरिफ वसूलेगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्रट के मुताबिक शुक्रवार को 12.01AM के बाद से चीन से आने वाले सामान से वॉशिंगटन में अमेरिकी कस्टम अधिकारी 25 फीसदी टैरिफ वसूलेंगे। ट्रंप आरोप लगाते रहे हैं कि चीन अमेरिका के साथ अनुचित कारोबार कर रहा है, जिससे अमेरिका को घाटा हो रहा है।

अमेरिका को नुकसान पहुंचाया तो चीन को ही घाटा
विरोध में चीन अपने यहां काम कर रहीं अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स बढ़ा सकता है। लेकिन ऐसा करने पर अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों में शिफ्ट हो सकती हैं। युआन का अवमूल्यन करने के साथ ही चीन यूएस ट्रेजरी में अपनी 1.2 ट्रिलियन डॉलक की होल्डिंग को भी कम कर सकता है। दोनों ही स्थिति में चीन को घाटा उठाना पड़ सकता है।

टेक्नोलॉजी क्षेत्र में लीडर बनना चाहता है चीन

शी चिनफिंग चीन को 2025 तक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लीडर बनाना चाहते हैं। अमेरिका से मिलती आर्थिक चुनौतियों के कारण चीन अपने मॉडल में बदलाव करने का इच्छुक नहीं है।