समुद्र में लुटेरों का फिर बढ़ा आतंक!: यमन के बंदरगाह से निकलते ही तेल टैंकर का अपहरण, सुरक्षा बलों को भेजा मैसेज

यमन के बंदरगाह से निकलते ही तेल टैंकर का अपहरण, सुरक्षा बलों को भेजा मैसेज
समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गहराए तनाव के बीच यमन के तट से एक बुरी खबर सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि तंजानिया के झंडे वाले एक तेल टैंकर को सोमाली समुद्री लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया।

डिजिटल डेस्क, सना। समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गहराए तनाव के बीच यमन के तट से एक बुरी खबर सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि तंजानिया के झंडे वाले एक तेल टैंकर को सोमाली समुद्री लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया। इसकी पुष्टि रविवार को सुरक्षा सूत्रों और स्थानीय अधिकारियों ने की है। अपहरण करने के बाद इस टैंकर को सोमालिया के अर्ध-स्वायत्त इलाके पुंटलैंड के बारी समुद्री इलाके में ले गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस टैंकर का नाम एमटी असाना है, जिसे शुक्रवार को यमन के मुकल्ला बंदरगाह से रवाना किया था।

हथियारबंद लुटेरों ने रोका जहाज

सूत्र कहते हैं कि इसके रवाना होते ही कुछ समय बाद सात हथियारबंद लुटेरों ने जहाज को रोक। इसके बाद उसे अपने कब्जे में लेकर पुंटलैंड के कालूला तट पर ले गए। वहीं, जहाजों की आवाजाही की देखरेख करने वाले सार्वजनिक ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, इस घटना के समय एमटी असाना अदन की खाड़ी में बहुत ही धीमा गति से चल रहा था। इसे सोमालिया के बोसासो बंदरगाह पहुंचना था।

संकट का भेजा मैसेज

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि जहाज को कब्जे में लेने के दौरान डिस्ट्रेस अलर्ट (संकट का संदेश) भी भेजा था। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि इस जहाज पर कुल कितने चालत दल के सदस्य मौजूद थे और उनके से किसी को चोट तो नहीं आई है। साथ ही उनकी राष्ट्रीयता के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिली है। इतना ही नहीं पुंटलैंड प्रशासन ने इस घटना के बारे में कोई आधिकारिक बयान भी नहीं जारी किया है।

लुटेरों की बढ़ी गतिविधियां

हालांकि, जहाज के मालिक या प्रबंधन की तरफ से भी को टिप्पणी सामने नहीं आई है। वहीं, इलाके में गश्त करने वाली अंतरराष्ट्रीय नौसेनिक बलों की ओर से कोई सार्वजनिक अपडेट नहीं मिला है। लेकिन हालिया महीनों में सोमाली समुद्री लुटेरों की एक बार फिर अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर में गतिविधियां बढ़ गई है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गश्त में कमी और समुद्री सुरक्षा संबंधी चुनौतियों की वजह से डकैती का खतरा फिर से बढ़ रहा है।

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