Iran-Russia Meeting: ईरान के बड़े नेता से मिले पुतिन, रूस ने अपने नागरिकों को दी ईरान न जाने की सलाह, क्या है बड़ी वजह?

डिजिटल डेस्क, मॉस्को। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक अहम जानकारी सामने आई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई की मुलाकात हुई है। इसके साथ ही रूस ने अपने नागरिकों को ईरान नहीं जाने की सलाह भी जारी की है। इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री ने 7 देशों के समकक्षों से फोन पर बातचीत भी की थी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान पर अमेरिकी हमले जारी हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिडटर्म चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
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क्रेमलिन ने बैठक पर क्या कहा?
रूसी राष्ट्रपति की इस बैठक के बाद क्रेमलिन ने एक बयान जारी किया, जिसमें इस मुलाकात की पुष्टि की गई। बयान में बताया गया कि इसमें पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव और देश की सैन्य खुफिया एजेंसी GRU के प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव शामिल हुए थे।
3 दिन पहले फोन पर हुई थी बातचीत
दोनों पक्षों के बीच यह मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब मॉस्को और तेहरान के बीच उच्चस्तरीय बातचीत फोन पर हुई थी। इसके बाद बातचीत का दायरा बढ़ा है। बैठक में सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय घटनाक्रम से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया। बताया जा रहा है कि क्रेमलिन में हुई बैठक से पहले 2 नवंबर को पुतिन और रेजाई के बीच फोन पर चर्चा हुई थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया था कि इस दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों, खासकर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा की थी।
यूक्रेन ने मांगा अंतरराष्ट्रीय समर्थन
दूसरी तरफ, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने 30वें इबेरो-अमेरिकन शिखर सम्मेलन के एक सत्र में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह यूक्रेन के लिए अपना समर्थन मजबूत करे। साथ ही उन्होंने कहा कि रूस की ओर से किए जा रहे अपराधों पर चुप न बैठे। इसके लिए उन्होंने रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग देने की अपील की। जेलेंस्की ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि देश को एयर डिफेंस सिस्टम और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए जरूरी उपकरणों की खास जरूरत है।
'यूक्रेन की जमीन हड़पने में सफल...'
जेलेंस्की ने आगे कहा कि अगर रूस उनकी जमीन का कुछ हिस्सा हड़पने और संप्रभुता का उल्लंघन करने में कामयाब हो जाता है, तो वह फिर इसे किसी तरह कानूनी रूप देकर दुनिया को इन कार्रवाइयों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की कोशिश करेगा।
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