ट्रंप और 'ये सात दिन': ईरान से जंग जारी रखने के लिए लेनी होगी अनुमति, ट्रंप के ही 10 सांसद युद्ध के खिलाफ, अब राष्ट्रपति के पास बचा एकमात्र विकल्प

ईरान से जंग जारी रखने के लिए लेनी होगी अनुमति, ट्रंप के ही 10 सांसद युद्ध के खिलाफ, अब राष्ट्रपति के पास बचा एकमात्र विकल्प
अमेरिका और ईरान तनाव के बीच वॉशिंगटन से बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जंग जारी रखने के लिए 7 दिन बचे हैं।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान तनाव के बीच वॉशिंगटन से बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जंग जारी रखने के लिए 7 दिन बचे हैं। अमेरिकी संविधान के मुताबिक, अमेरिका को किसी भी जंग को 60 दिन में संसद की मंजूरी लेनी होती है। यहां पर भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने खेल कर दिया है। ईरान पर अमेरिका ने पहला युद्ध 28 फरवरी, 2026 को किया था, लेकिन इसकी सूचना अमेरिकी संसद में 2 मार्च को दी गई थी। लेकिन अब उन्हें इस जंग की अनुमति लेनी होगी।

ट्रंप को कितने सांसदों का समर्थन

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप संसद का सामना नहीं करना चाहते हैं। 100 सदस्यों वाली सीनेट (सांसद) में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के 53 सांसद हैं, जबकि विपक्षी कमला हैरिस की डेमोक्रेटिक पार्टी के पास कुल 47 हैं। इतना ही नहीं ट्रंप की पार्टी के ही लगभग 10 सीनेट ईरान जंग के खिलाफ अपना विरोध कर चुके हैं। ऐसे में अब ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति इस जंग को समाप्त करना चाहते हैं।

60 दिनों के बाद राष्ट्रपति के पास सिर्फ एक ऑप्शन

अमेरिकी संविधान के मुताबिक, 60 दिनों के बाद राष्ट्रपति के पास एक विकल्प बचता है और वो हैं 30 दिन का अतिरिक्त समय लेना, जिसमें भी वे युद्ध नहीं कर सकते हैं, बल्कि अपनी सेना को सुरक्षित वापस बुलाना होता है।

इस कानून को लेकर पहले राष्ट्रपतियों की दलील

लेकिन इन सबके बीच एक सबसे बड़ा सवाल निकलकर आता है कि क्या ट्रंप इस समय सीमा को अनदेखा कर सकते हैं। ऐसा इसलिए भी यह सवाल सामने आता है कि इससे पहले भी कई राष्ट्रपति यह दलील दे चुके हैं कि संविधान राष्ट्रपति को सेना के प्रमुख के रूप में कई बड़े अधिकार देता है, इस वजह से इस प्रकार की कानूनी सीमाएं पूरी तरह से लागू नहीं होती है।

ओबामा और ट्रंप ले चुके हैं ये फैसले

उदाहरण के रूप में समझते हैं कि 2011 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया में 60 दिन के बाद भी सैन्य कार्रवाई जारी रखी थी। इस दौरान उनका कहना था कि इस तरह के कानून लागू नहीं होते हैं क्योंकि वहां लगातार लड़ाई जैसी स्थिति नहीं बनी हुई थी। खास बात यह है कि ट्रंप ने भी अपने कार्यकाल के दौरान 2019 में एक प्रस्ताव को विटो कर दिया था, इसमें यमन के साथ युद्ध खत्म करने की बात कही गई थीं।

Created On :   24 April 2026 5:36 PM IST

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