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बांग्लादेश : मौलवी शफी के परिजनों का दावा, उन्हें जमातियों ने मारा

November 15th, 2020 10:00 IST
 बांग्लादेश : मौलवी शफी के परिजनों का दावा, उन्हें जमातियों ने मारा

हाईलाइट

  • बांग्लादेश : मौलवी शफी के परिजनों का दावा, उन्हें जमातियों ने मारा

ढाका, 15 नवंबर (आईएएनएस)। खुद को बांग्लादेश का सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक इस्लामिक समूह बताने वाले हिफाजत-ए-इस्लाम में दरार पड़ गई है। इसका खुलासा खुद इसके संयुक्त महासचिव मेनुद्दीन रूही ने शनिवार को किया और कहा कि जमात-ए-इस्लामी के एजेंडे को लागू करने के लिए परिषद की एक अवैध बैठक की गई, इसमें छात्रों का विंग इस्लाम छात्र शिबिर भी शामिल थी।

इसी बीच संगठन के संस्थापक स्व. शाह अहमद शफी के बहनोई मोहम्मद मोईनुद्दीन ने दावा किया कि शफी को हाथजरी मदरसे में जमात शिबिर के व्यक्ति ने मारा था और हिफाजत के नेताओं से आग्रह किया कि शफी की मौत पर सुनवाई होने से पहले परिषद की कोई मीटिंग न रखें। बता दें कि शफी की सितंबर में 103 साल की आयु में मृत्यु हो गई थी।

चटगांव प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि शफी के बेटे अनस मदानी बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं क्योंकि उन्हें जमात की ओर से मौत की कई धमकियां मिल रही हैं। वहीं शफी की मौत से पहले जमात नेता और अन्य लोग हाथजरी मदरसे में नियमित रूप से बैठक कर रहे थे।

मोईनुद्दीन ने आरोप लगाया कि जमात के नेताओं ने मौखिक रूप से शफी को गाली दी और डराया और उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर किया। नतीजतन शफी बीमार पड़ गये और कोमा में चला गये।

उन्होंने यह भी कहा, उनकी मौत को सुनिश्चित करने के लिए शफी को ले जाने वाली एम्बुलेंस में पूरी तैयारियां की गईं थी। उनका ऑक्सीजन पाइप बार-बार निकाला गया। शफी को जमात-शिबिर ने योजनाबद्ध तरीके से मार दिया। हम उनके परिवार की ओर से सरकार से उनकी मौत की न्यायिक जांच की मांग करते हैं। हमें गहरा झटका लगा है कि अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

नेताओं के अनुसार, 1971 में मानवता के खिलाफ अपराध करने के दोषी पाए गए डेलवर हुसैन सईदी के बेटे जमात नेता शमीम सईदी ने हाल ही में मदरसे में अपने अनुयायियों को शामिल किया था। एक अन्य जमात नेता मौलाना मामुनुल हक और उनके सहयोगी हाथजरी मदरसे में ज्यादा ही सक्रिय हो गए हैं।

एसडीजे-एसकेपी

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।