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बच्चों ने शिवराज को लिखा पत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा की हकीकत की बयां

August 10th, 2020 16:19 IST
बच्चों ने शिवराज को लिखा पत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा की हकीकत की बयां

हाईलाइट

  • बच्चों ने शिवराज को लिखा पत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा की हकीकत की बयां

डिजिटल डेस्क, भोपाल। इन दिनों कोरोना ने दुनिया के हर हिस्से और हर वर्ग को प्रभावित कर रखा है। मध्यप्रदेश के भी बड़े हिस्से में कोरोना का असर है और बच्चों को भी इससे दो चार होना पड़ रहा है। यही कारण है कि बच्चों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर शिक्षा और स्वास्थ्य के हालात की हकीकत बयां की है। कोरोना के कारण बच्चों के जीवन से मौज-मस्ती और खेलकूद लगभग गायब हो गया है क्योंकि वे सामूहिक तौर पर मेल मिलाप करने से लेकर खेलने कूदने तक से हिचक रहे हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ जो पढ़ाया जा रहा है।

कोरोना के कारण स्कूल बंद है और बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है मगर कई खामियों के चलते उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा व्यवस्था भी उनके सामने कई सवाल खड़े कर रही है। इसी को लेकर कई बच्चों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं। अनूपपुर में 10वीं कक्षा की छात्रा लालिमा वाधवा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। लालिमा ने लिखा है, कोरोना काल के समय में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम बच्चों को स्कूल न खुलने के कारण पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। ऑनलाइन क्लासेज में जो पढ़ाया जाता है वह समझ में नहीं आता, शिक्षकों से भी अच्छे से पढ़ाते नहीं बन रहा है, नेटवर्क कम होने के कारण क्लास से जुड़ नहीं पाते हैं, गांव में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता है, साथ ही हर महीने रिचार्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है।

लालिमा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मेरी इन समस्याओं का समाधान निकाला जाए और हमारे उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास किए जाएं। इसी तरह अनूपपुर जिले की ही 11वीं कक्षा की छात्रा वीणा सिंह ने स्वास्थ्य समस्याओं की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया है। वीणा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है, प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की बहुत कम संख्या है। निशुल्क प्रदान की जाने वाली दवाएं बहुत सीमित होती हैं। शासकीय चिकित्सक अपने निजी दवा खाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इसके साथ ही अधिकांश नर्सिग, पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों व उनके परिजनों से अभद्र व्यवहार भी करते हैं। प्रदेश सरकार को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

आठवीं की छात्रा समृद्धि भटनागर ने खेल-खेल में स्कूल में पढ़ाई कराए जाने की बात कही है। छात्रा का कहना है कि खेल-खेल में हमारी कक्षाएं होनी चाहिए जिससे हमें जल्दी याद हो जाए और हमें उस विषय की जानकारी मिल जाए। हम बच्चों की रुचि जिन विषयों में हो उसके आधार पर हमारा साल भर का परिणाम तैयार किया जाए।

स्कूल की समस्या का जिक्र करते हुए समृद्धि ने लिखा है, स्कूल में कंप्यूटर तो होते हैं पर उनमें से आधे से ज्यादा खराब रहते हैं, जिससे प्रैक्टिकल नहीं कर पाते और बिजली की भी समस्या रहती है। हमारे स्कूल और प्राइवेट स्कूल की किताबें एक जैसी होनी चाहिए, इसके साथ ही स्कूल का समय कम किया जाना चाहिए जैसे हमारे माता-पिता के समय में होता था। सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट स्कूल हो, सभी का कोर्स कम होना चाहिए। हमें भी यूनिफर्म मिलना चाहिए। कई स्कूल में अभी भी बच्चों के लिए बेंच और टेबल नहीं है, उन्हें भी बेंच और टेबल मिलना चाहिए। हमारे स्कूल में अच्छे खेल का मैदान नहीं है, हमारे यहां भी खेल का मैदान होना चाहिए।

बच्चों के बीच पैरवी (एडवोकेसी) का काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट ऑब्जर्वेटरी की प्रेसीडेंट और पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच का कहना है कि सीआरओएमपी बच्चों को अपनी बात ऊपर तक बताने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने (बच्चों) जब भी अपनी समस्याओं को बताया है तो सरकार ने तत्काल पहल की है। वर्तमान दौर में जरुरी है कि इन बातों को लेकर हमें भी पहल करनी चाहिए क्योकि कोरोना ने नई चुनोतियां पेश की है।

एसएनपी

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