comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

सिर्फ चेहरा ही नहीं गर्मियों में आंखों की देखभाल है जरुरी, फॉलों करें ये टिप्स


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों की तेज धूप सिर्फ आपकी त्वचा को ही नहीं बल्कि आपकी आंखों को भी नुकसान पहुंचाती है। ज्यादा तेज धूप की वजह से आंखों में एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। दरअसल, आंखों को दिमाग से जोड़ने वाली बारीक शिराएं आंखों की त्वचा के बहुत नजदीक होती हैं, इसलिए ज्यादा देर धूप में रहने से आंखों को नुकसान पहुंचता है। आंखों में एलर्जिक रिएक्शन होने की वजह से आंखों में जलन होना, आंखें लाल हो जाना, आंखों से पानी आना, आंखों में चुभन होना, कंजंक्टिवाइटिस रोग आदि का खतरा बढ़ जाता है। आंखों को धूप से बचाने के लिए हम आपको बता रहें हैं कुछ ऐसे उपाय, जिससे आप गर्मी के मौसम में अपनी आंखों को बचा सकते हैं। 

- तेज धूप में UV किरणों से आंखों के ऊपर बनी टीयर सेल यानी आंसूओं की परत टूटने या क्षतिग्रस्त होने लगती है। यह स्थिति कॉर्निया के लिए हानिकारक हो सकती है। इससे बचने के लिए घर से बाहर निकालते समय सनग्लास जरुर लगाएं।

- दिन में तीन चार बार ठंडे पानी से आंखें धोएं। इससे आंखों के अंदर की धूल और गंदनी बाहर निकल जाती है और आंखों को ठंडक मिलती है।   

- अक्सर लोग आंखों में चुभन हो, जलन हो या कोई धूल कण चला जाए तो कुछ लोग फौरन ही आंखों को रगड़ने लगते हैं। कभी भी आंखों को रगड़ना नहीं चाहिए। उसे साफ कपड़ों से सहलाना चाहिए। आंखों को रगड़ने से आंखों को नुकसान हो सकता है। 

- गर्मी से बचने के लिए हम एसी का सहारा लेते हैं, लेकिन ज्यादा देर एसी में बैठने से आंखों में सूखापन आ जाता है। आंखों की पेशियां सुकड़ने से उनमें खुजली होने लगती है। ऐसे में कभी भी एसी के ठीक सामने न बैठें।

- अपने पूरे शरीर की तरह ही आंखों के आसपास वाले हिस्से पर भी मालिश करें। इससे आंखों का ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। साथ ही आंखों को आराम मिलता है। दिन में कम से कम एक बार ऐसा जरूर करें। 

- गुलाब जल में रूई भिगो कर आंखों पर रखने से राहत और ताजगी महसूस होती है। साथ ही इससे आंखों की थकान भी दूर होती है। आप चाहे तो ठंडक देने के लिए आंखों पर खीरे के टुकड़े भी रख सकते हैं।

- आंखों को आराम देने के लिए भरपूर नींद लेना बहुत जरूरी है, इसलिए रोज 8 से 9 घंटे जरुर सोएं। आप चाहे तो रात और दिन का समय मिलाकर भी 8 से 9 घंटे पूरे कर सकते हैं। 
 

कमेंट करें
4QihW
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।