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अगर आप भी पीते हैं सिगरेट तो हो जाएं सावधान

January 11th, 2019 23:18 IST

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बदलती लाइफस्टाइल का लोगों के जीवन में भी काफी असर देखने को मिल रहा है। जिसकी वजह से टेंशन, स्ट्रेस होना आम बात हो गई है। ऐसे समय में लोग सिगरेट, शराब आदि का सहारा लेने लग जाते हैं। जिसके कारण कई सारी खतरनाक बीमारी हो सकती हैं- जैसे कैंसर। जिसका हाल ही में जीता- जागता उदाहरण है, फिल्म निर्देशक राकेश रोशन, जो इतनी अच्छी लाइफस्टाइल के बाद भी कैंसर से पीड़ित हो गए हैं। उनके सहयोगियों ने बताया कि राकेश काफी ज्यादा सिगरेट पिया करते हैं। आज हम भी इसी विषय पर बात करने वाले हैं। सिगरेट का कारोबार दिन व दिन लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

एक रिर्सच के अनुसार पता चला है कि केरल में सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने पर बैन लगाने और सिगरेट और गुटखा के खिलाफ कई सारे कैंपेन चलाने के बाद भी वहां के पुरुषों में कैंसर तैजी के साथ फैल रहा है। हैरानी वाली बात जो सामने आई है, वो ये है कि इसमें सबसे ज्यादा संख्या शादीशुदा लोगों की है। जिनकी उम्र 45 से 60 वर्ष की है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो कि सिगरेट नहीं पीते।

सिगरेट पीना आजकल युवाओं में काफी प्रचलित है। धूम्रपान करने से भ्रूण के विकास में, पुरुष के शुक्राणुओं और कोशिकाओं की संख्या को नुकसान पहुंचता है। डॉक्टरो की रिपोर्ट के अनुसार अगर खाना खाने के तुंरत बाद सिगरेट पी जाए तो इसका नकारात्मक प्रभाव 10 प्रतिशत और ज्यादा बढ़ जाता है। इसका मतलब अगर आप खाने के तुंरत बाद सिगरेट पीते हैं तो ऐसे में एक सिगरेट 10 सिगरेट के बराबर काम करती है। जिससे 'आंत और फेफड़ों' का कैंसर होने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है, अगर आप खाली पेट सिगरेट पीते हैं तो इससे आपकी गैस की समस्या के साथ पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाएगी। जानकारों के कहे अनुसार चाय के साथ सिगरेट नहीं पीना चाहिए क्योंकि चाय में कैफीन होता है जो कि सिगरेट के निकोटिन के साथ मिलकर शरीर को भारी नुकसान पहुंचाता है।  

सिगरेट पीने में न केवल पुरुष बल्कि महिलाएं भी इस रेस में पीछे नहीं हैं। खबरों की मानें तो महिलाओं में सबसे ज्यादा खतरा स्तन कैंसर का होता है। लोग मिनटों में सिगरेट का पूरा पैकेट खाली कर जाते हैं। आश्र्चर्य होता है कि लोग अपनी सेहत को लेकर कितने लापरवाह होते हैं। धूम्रपान करने से क्या- क्या नुकसान होते हैं। ये तो हम सभी जानते हैं. सिगरेट के पैकेट पर साफ- साफ लिखे होने के बाद भी लोग सिगरेट, तंबाकू का सेवन करते हैं। जिससे आस- पास के लोगों को भी नुकसान पहुंचता है साथ ही माहौल भी खराब होता है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।