दैनिक भास्कर हिंदी: आखिर गालियां औरतों को लेकर ही क्यों बनी है? जानें इस सवाल का जवाब

September 6th, 2018

डिजिटल डेस्क । इस दुनिया में कोई भी चीज बिना कारण के नहीं होती, हर चीज के होने के पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है। ऐसे ही कई बार कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिनसे हमारा सामना रोज होता है लेकिन हमको उसके पीछे का कारण पता नहीं होता या फिर हम जानने की कोशिश नहीं करते। आमतौर पर हम सब अपने दोस्तों के बीच में गाली का यूज करते हैं और ज्यादातर गालियां औरतों को लेकर ही होती हैं। लोग किसी आदमी को गाली देते हैं, तो उसमें भी औरतें आ जाती है और किसी जानवर को गाली देते हैं, तो उसमें भी औरतें आ जाती हैं। लोग हमेशा गालियों में मां और बहन जैसे शब्दों को ले आते हैं, लेकिन कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? कभी 'तेरे बाप की' या  'तेरे भाई की' ऐसे गाली क्यों नहीं देते हम? आपने नहीं सोचा होगा और आपने तो क्या किसी ने भी इस बारे में नहीं सोचा होगा, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके पीछे का कारण। 

 

 

क्या है गाली का कच्चा चिठ्ठा? 

 

इतिहासकार सुसन ब्राउनमिलर ने एक किताब लिखी थी "Against our will: men, women and rape"। इस किताब में उन्होंने बलात्कार के इतिहास के बारे में बताया था। उनका कहना है कि जब धीरे-धीरे मनुष्य ने विकास करना शुरू किया तो उसे पता चला कि उसके अंग डर पैदा करने के लिए हथियार के रुप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, ये उसकी सबसे बड़ी खोज थी। धीरे-धीरे फिर मर्दों को पता चला कि वो बलात्कार कर सकते हैं, तो उन्होंने बलात्कार करना शुरु कर दिया। उनका मानना है कि शायद इसी के बाद से गाली की शुरुआत हुई और फिर लोगों ने गाली देना शुरु कर दिया। इसके लिए वो मनुष्य की शारीरिक बनावट को दोषी मानती हैं, उनका कहना है कि पुरुष और महिला की लैंगिक बनावट में काफी अंतर है और पुरुष के मुकाबले महिलाओं की बनावट काफी कमजोर है। इसके पीछे आदमियों का ताकतवर होना और औरतों का कमजोर होना भी कारण माना जा सकता है। 

 

 

क्यों देते हैं हम गाली? 

 

इसके पीछे हमारा मूड हो सकता है। दरअसल, जब हम किसी के काम से खुश होते हैं, या फिर खुश रहते हैं, तो हम उसे गाली की बजाय उसकी तारीफ करते हैं। लेकिन जब हमारा दिमाग खराब रहता है या फिर हमें किसी की बेज्जती करनी होती है, तो फिर हम उसके लिए गाली का उपयोग करते हैं। आजकल दोस्तों के बीत में लड़कों का गाली देना आम सा हो गया है, ऐसा इसलिए क्योंकि धीरे-धीरे गाली हमारी लैंग्वेज में शामिल हो जाती है और फिर हम न चाहते हुए भी गाली का इस्तेमाल करने लगते हैं।