Fire Precautions: दिल्ली की तंग गलियों में खरीदने जा रहे हैं घर? आग लगने पर बिल्डिंग में क्या हैं इंतजाम, कैसे कर सकते हैं खुद का बचाव, बिल्डर से जरूर पूछें ये जरूरी सवाल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित होटल फ्लॉरिस स्टे में बुधवार को भीषण आग लगी, जिससे गंभीर हादसा हुआ है। इस हादसे में 21 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है और कई लोग बुरी तरह से घायल हैं। हादसे के समय कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग भी लगा दी है। दिल्ली में कई बार देखा गया है कि अक्सर आग लगने से भारी हादसा होता है। दिल्ली में कई ऐसी जगह हैं जहां पर अक्सर आग देखने को मिलती है। दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़ों के अनुसार, हर रोज लगभग 65 घटनाएं सामने आती हैं। दिल्ली जैसे शहर की मुश्किल ये है कि यहां लोग ज्यादा और रास्ते तंग हो चुके हैं। ऐसे में आग लगने जैसी घटा होती है तो फायर ब्रिगेड का हादसे वाली जगह तक पहुंच पाना भी आसान नहीं होता। तो, फिर क्या करें। क्या ऐसे शहरों में घर लेना या रहना बंद कर दें। या, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में किफायती घर लेना अवॉइड करें। ये दोनों ही बातें मुमकिन नहीं है। मुमकिन है तो ये कि आप किसी बड़ी इमारत में घर लेने से पहले ये चैक कर लें कि बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के लिए जरूरी नियम कायदे पूरे किए गए हैं या नहीं। अगर आप इन नियमों से अनजान हैं, तो यहां हम आपको बता रहे हैं कि घर लेने से पहले आपको किन बातों को अच्छे से जान लेना चाहिए। ताकि कोई भी हादसा होने पर आपका बचना आसान हो सके।
दिल्ली में अक्सर होते हैं आग हादसे
दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 के पहले 4 महीनों में आग से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। जिसके मुताबिक, हर महीने लगभग 1900 से ज्यादा मामले दर्ज किए जाते हैं। वहीं, हर रोज लगभग 65 घटनाओं की जानकारी मिलती है। आंकड़ों के मुताबिक, इन 4 महीनों के समय हर घंटे औसतन 3 मामले दर्ज किए जाते हैं। इसमें सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि सिर्फ अप्रैल के महीने में ही 2300 से ज्यादा घटनाएं दर्ज हुई हैं। ऐसे में ये तो साफ है कि दिल्ली में आग हादसे से बचने के लिए जरूरी नियमों पर ध्यान देना बहुत ही अनिवार्य है।
इन नियमों पर जरूर दें ध्यान
फायर NOC (No Objection Certificate)
बिल्डिंग के पास वैध फायर NOC होनी चाहिए। आपको घर लेने से पहले ये देखना चाहिए कि NOC वर्तमान में वैध है और समय-समय पर रीन्यू हुई हो।
दो या अधिक इमरजेंसी एग्जिट
साथ ही ये भी ध्यान दें कि हर मंजिल से कम-से-कम एक सुरक्षित आपातकालीन सीढ़ी मौजूद हो। बड़े प्रोजेक्ट्स में ऑप्शनल एग्जिट गेट भी होना चाहिए। निकास मार्ग हमेशा खुला और बिना हजार्ड्स के होना चाहिए।
फायर एस्केप सीढ़ियां और फायर अलार्म
फायर एस्केप सीढ़ियां सामान रखने की जगह न बनी हों। सीढ़ियों में पर्याप्त रोशनी और स्पष्ट एग्जिट साइन होने चाहिए। साथ ही पूरी बिल्डिंग में स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म भी होने चाहिए। उनसे जुड़ा कंट्रोल पैनल भी बिल्कुल अच्छे से काम करना चाहिए। साथ ही नियमित परीक्षण का रिकॉर्ड भी होना जरूरी है।
स्प्रिंकलर सिस्टम
विशेषकर ऊंची इमारतों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम होना चाहिए। पार्किंग, कॉरिडोर और कॉमन एरिया में इसकी व्यवस्था जरूर देखें। साथ ही हर मंजिल पर उचित संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर लगे होने जरूरी हैं। साथ ही उन पर सर्विसिंग और रिफिलिंग की तारीख भी लिखी होनी चाहिए।
पानी की उपलब्धता
फायर फाइटिंग के लिए अलग पानी का टैंक और पंप सिस्टम भी होना जरूरी। फायर हाइड्रेंट और होज रील सिस्टम भी मौजूद होने चाहिए। वहीं, ऊंची इमारतों में विशेष फायर लिफ्ट भी मौजूद होना चाहिए, जिससे इमरजेंसी में आराम से निकला जा सके।
बेसमेंट और पार्किंग सुरक्षा
बेसमेंट में धुआं निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए। पार्किंग में फायर डिटेक्शन और स्प्रिंकलर सिस्टम लगे होने चाहिए। सोसायटी समय-समय पर फायर ड्रिल कराती हो। सुरक्षा कर्मियों को अग्निशमन उपकरण चलाने का प्रशिक्षण मिला हो। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के लिए पर्याप्त चौड़ा रास्ता हो।
दिल्ली आग हादसे में क्या कमियां?
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दिल्ली दमकल सेवा के एक अधिकारी ने बताया है कि दिल्ली के जिस रेस्टोरेंट में आग लगी है उस पर काबू पाने के लिए शुरुआती कदम के तौर पर दो वॉटर टेंडर, दो वॉटर बाउजर, एक क्विक रिस्पॉन्स गाड़ी और आग बुझाने वाली और भी यूनिट्स भेजी गई थीं। लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी थीं कि करीब 21 जिंदगियां आग में जलकर खाक हो गईं।
ये लापरवाहियां आईं सामने
सिर्फ 6 कमरों की अनुमति, चल रहे थे 25 कमरे
हादसे के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक होटल को केवल 6 कमरों के संचालन की मंजूरी मिली थी। इसके बावजूद यहां 25 कमरे चलाए जा रहे थे। कुछ कमरे बेसमेंट में भी बनाए गए थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अग्नि सुरक्षा मंजूरी नहीं ली गई थी
बताया जा रहा है कि होटल और रेस्टोरेंट के पास अग्नि सुरक्षा विभाग की एनओसी नहीं थी। अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में भी यह बात सामने आई कि बिल्डिंग के लिए यह अनुमति नहीं ली गई थी।
बाहर निकलने वाले रास्ते पर लगा था ताला
बेसमेंट में मौजूद लोगों के लिए हालात और मुश्किल हो गए थे। जानकारी के अनुसार बाहर जाने वाले रास्ते पर लगे चैनल गेट में ताला लगा था। आग लगने के बाद कई लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके।
मदद पहुंचने में हुई देरी
आग बुझाने वाली टीम तो कुछ ही देर में पहुंच गई, लेकिन घायलों को अस्पताल ले जाने वाली गाड़ियों के पहुंचने में देरी हुई। इससे कई लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल सका।
होटल-रेस्टोरेंट बनाने के लिए जरूरी अनुमति भी नहीं
जांच में यह भी सामने आया है कि होटल और रेस्टोरेंट के संचालन के लिए संबंधित विभागों से जरूरी मंजूरियां नहीं ली गई थीं। साथ ही भवन में आग से बचाव के पर्याप्त उपकरण भी मौजूद नहीं थे।
आग लगने पर इन बातों का रखें खास ख्याल
ऊपर की मंजिल की तरफ ना जाएं
आग लगने पर कई लोग घबराकर ऊपर की तरफ भागते हैं, लेकिन यह बहुत खतरनाक हो सकता है। धुआं तेजी से ऊपर जाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए हमेशा बाहर निकलने के लिए नीचे की तरफ ही जाएं।
लिफ्ट से दूर रहें
अगर आप किसी ऊंची इमारत में हैं तो आग लगने पर लिफ्ट का इस्तेमाल न करें। बिजली जाने पर लिफ्ट बीच में रुक सकती है और आप उसमें फंस सकते हैं। बाहर निकलने के लिए सीढ़ियों का सहारा लें।
खिड़की न खोलें
धुएं से बचने के लिए खिड़की खोलना सही तरीका नहीं है। बाहर की हवा अंदर आने से आग को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है और वह तेजी से फैल सकती है।
बिजली से लगी आग पर पानी न डालें
अगर आग किसी बिजली के उपकरण या शॉर्ट सर्किट से लगी है तो पानी डालने से करंट लग सकता है। ऐसी स्थिति में सूखी रेत या उपयुक्त फायर एक्स्ट्यूंगिशर का इस्तेमाल करें।
सामान बचाने में समय न गंवाएं
पैसे, गहने या जरूरी कागज निकालने के चक्कर में न पड़ें। सबसे पहले अपनी और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें और तुरंत बाहर निकलें।
कहीं छिपने की कोशिश न करें
डर के कारण बिस्तर, अलमारी या किसी बड़े सामान के नीचे छिपना खतरनाक हो सकता है। इससे बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है और बचाव दल को भी आपको ढूंढने में दिक्कत होगी।
खड़े होकर ना भागें
अगर कमरे में ज्यादा धुआं भर गया हो तो खड़े होकर भागने के बजाय झुककर या रेंगते हुए बाहर निकलें। नीचे की तरफ हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है। साथ ही मुंह और नाक को गीले कपड़े से ढक लें।
पहले से किन बातों का रखें ख्याल?
घर की बिजली व्यवस्था पर रखें नजर
घर में लगे तारों और बिजली के कनेक्शन की समय-समय पर जांच करवाते रहें। अगर कोई तार खराब या पुराना हो गया है तो उसे तुरंत बदल दें। एक ही जगह पर जरूरत से ज्यादा भारी बिजली के उपकरण न चलाएं।
गैस इस्तेमाल में बरतें सतर्कता
रसोई में लगी गैस पाइप को 3 से 5 साल के अंदर बदल देना चाहिए। रात को सोने से पहले या घर से बाहर निकलते समय गैस का रेगुलेटर बंद करना न भूलें।
धुएं की पहचान करने वाला उपकरण लगाएं
घर में ऐसा उपकरण लगाएं जो धुआं होते ही चेतावनी दे सके। इसकी बैटरी हर महीने जांचते रहें ताकि जरूरत पड़ने पर यह सही तरीके से काम करे।
आग बुझाने का इंतजाम रखें
रसोई और घर के मुख्य हिस्से में आग बुझाने के लिए फायर एक्स्ट्यूंगिशर जरूर रखें। साथ ही परिवार के लोगों को इसका इस्तेमाल करना भी आना चाहिए।
एग्जिट रास्तों को खाली रखें
दरवाजों और सीढ़ियों के पास कबाड़ या भारी सामान जमा न होने दें, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत बाहर निकला जा सके।
जलने वाली चीजों को सुरक्षित रखें
पेट्रोल, मिट्टी का तेल और पेंट जैसी चीजों को ठंडी जगह पर रखें। माचिस, लाइटर और मोमबत्तियां बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
परिवार को पहले से करें तैयार
घर के सभी लोगों के साथ मिलकर इमरजेंसी स्थिति का प्लान बनाएं। बच्चों और बुजुर्गों को सिखाएं कि आग लगने पर घबराने के बजाय झुककर या रेंगते हुए सुरक्षित जगह तक पहुंचें।
Created On :   3 Jun 2026 6:36 PM IST








