Bhopal Farmer Protest: आंदोलन पर क्यों अमादा प्रदेश का किसान, मूंग दाल की खरीदी सहित इन मांगों को लेकर उग्र हुआ प्रदर्शन, कैसे और क्यों हुई शुरुआत, जानिए पूरी डिटेल
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस वक्त मूंग की फसल को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन जारी है। किसानों को पहले 11 मील चौराहे पर रोकने की कोशिश की गई, उसके बाद वीर सावरकर सेतु के पास किसानों को रोका गया। लेकिन ये कोशिशें ज्यादा काम नहीं आई। दिन गुजरते गुजरते किसान बैरिकेडिंग पार कर भोपाल में घुसने में कामयाब हो गए हैं। रानी कमलापति स्टेशन होते हुए किसान टीटी नगर तक पहुंच गए हैं और शिवराज सिंह चौहान के सरकारी बंगले के घेराव किया है। आंदोलनकारी किसानों की मूल मांग मूंग की खरीदी की है। जिसको लेकर करीब बीस दिन से अलग अलग शहरों में आंदोलन जारी था। जो अब राजधानी भोपाल में पहुंच चुका है।
इस पूरे आंदोलन की एक खास बात ये भी है कि कई किसान अपने साथ बिस्तर, राशन, गैस चूल्हा और खाना बनाने के बर्तन भी लेकर आए हैं। सभी किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक वे वापस गांव नहीं जाएंगे। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर ये आंदोलन क्यों हो रहा है। बता दें, इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा मूंग की पूरी फसल सरकारी दाम पर खरीदने की मांग की है।
क्या है किसान की मांग?
किसानों की सबसे अहम मांग यह है कि सरकार उनकी पूरी मूंग की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे। अभी सरकार सिर्फ तय सीमा तक ही खरीद करती है और इसके बाद बची हुई फसल को खुले बाजारों में बेचना पड़ता है। ऐसा करने से सरकारी दाम से काफी कम कीम मिलती है। ऐसे में किसानों की पूरी मेहनत और लागत निकालना भी बहुत ही मुश्किल हो जाता है।
अभी कैसे खरीदी जाती है मूंग?
इस वक्त मूंग की खरीदी एक सरकारी योजना के अंतर्गत ही की जाती है। इस व्यवस्था में पूरे उत्पादन का सिर्फ एक हिस्सा ही खरीदा जाता है और बाकी की फसल सरकारी खरीद से बाहर हो जाती है। इस वजह से ही बड़ी संख्या में किसानों को अपनी उपज व्यापारियों को कम दाम पर देनी होती है। किसानों का ये भी कहना है कि अगर पूरी फसल की खरीदी की जाए, तो उससे ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
किसानों को किस बात की है नाराजगी?
किसानों ने कहा है कि उड़द, अरहर और मसूर जैसी दूसरी दालों की पूरी खरीदी सरकारी दाम पर की जाती है लेकिन मूंग के मामलों में अलग नियम लागू किए गए हैं। इस बात को लेकर ही अन्नदाताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों ने ये सवाल भी किया है कि जब दूसरी फसलों के किसानों को पूरी खरीदी का फायदा मिल सकता है, तो मूंग उगाने वाले किसानों को यह सुविधा क्यों नहीं मिल रही है।
कैसे हुई आंदोलन की शुरुआत?
किसान संगठनों का कहना है कि उन्होंने कई दिनों तक सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों और सरकार को ज्ञापन भी दिए गए थे। इसके बाद जब कोई ठोस फैसला नहीं मिला, तब उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है। इसके बाद ही बड़ी संख्या में किसान भोपाल में एकजुट हुए हैं। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय तक आंदोलन करने की तैयारी के साथ आए हैं और जरूरत पड़ने तक राजधानी में ही डटे रहेंगे।
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खरीदी के अलावा भी किसानों की हैं कई परेशानियां
मूंग की खरीद को लेकर ही आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन किसानों की शिकायतें इससे भी कहीं और ज्यादा हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद शुरू होने में अक्सर देर कर देती है। पंजीकरण के समय तकनीकी दिक्कतें आती हैं। साथ ही कई बार तय सीमा पूरी होने के बाद भी किसानों की फसल नहीं खरीदी जा सकती है। इसके अलावा भी खाद और दूसरी अहम जीचें भी समय नहीं मिल रही हैं। इसके अलावा खेती का खर्चा भी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन फसल का सही दाम ना मिल पाने से किसानों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ती जा रही है।
सरकार के सामने भी बड़ी चुनौती
यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए कई नई चुनौतियां लेकर आया है। किसान लगातार अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार की तरफ से बातचीत जारी होने की बात कही जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अहम इंतजाम किए गए हैं और किसानों से बातचीत के जरिए ही समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, अब तक पूरी मूंग की सरकारी खरीद को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है लेकिन बातचीत करने की बात कही गई है।
अगर किसानों की मांग पूरी होती है तो क्या बदलेगा?
बता दें, अगर किसानों की मांग पूरी होती है, तो मूंग की पूरी फसल सरकारी दाम पर खरीदी जा सकती है। इससे किसानों को बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी नहीं होगी और उनकी आमदनी भी बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं, दूसरी ओर सरकार पर खरीद, भंडारण और परिवहन का खर्च काफी बढ़ जाएगा। इस वजह से ही इस मांग पर फैसला लेना आसान नहीं माना जा रहा है। ऐसे में कई लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि सरकार किसानों की मांग पर क्या फैसला लेती है।
Created On :   29 July 2026 6:05 PM IST












