मोदी सरकार में इस्तीफे!: मोदी सरकार के इन मंत्रियों को भी देना पड़ा इस्तीफा, कोरोना के बाद 12 मंत्रियों से लिए थे इस्तीफे, नाराजगी के बाद इस मंत्री ने छोड़ा था पद

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में विवादित मामलों को लेकर कितने मंत्रियों ने इस्तीफे दिए। इसकी चर्चा नीट पेपर लीक में भारी विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद तेजी से होने लगी।
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एम जे अकबर
अक्टूबर 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर के खिलाफ देश में चले 'मीटू' आंदोलन के चलते कई महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इस मामले में भारी विरोध के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
हरसिमरत कौर बादल
सितंबर 2020 में शिरोमणि अकाली दल की नेता और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने तीन कृषि कानूनों के विवाद के विरोध में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा नीतिगत मतभेदों और किसान आंदोलन के दबाव की वजह से हुआ था।
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डॉ. हर्षवर्धन
जुलाई 2021 में कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले मोदी सरकार ने 12 मंत्रियों से एक साथ इस्तीफे लिए थे। इसमें कोविड काल के दौरान तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री की देशव्यापी आलोचना और विफलता और विवादों के चलते हुआ।
रविशंकर प्रसाद
सोशल मीडिया कंपनियों (विशेषकर ट्विटर) के साथ सरकार के बढ़ते विवादों और नए आईटी नियमों को लेकर पैदा हुए गतिरोध के बीच तत्कालीन आईटी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पद से हटाया गया।
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रमेश पोखरियाल
नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य कारणों के विवाद के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री पोखरियाल को हटाया गया।
वैसे आपको बता दें नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में सीधे तौर पर विपक्षी जन-आंदोलनों के दबाव में आकर किसी मंत्री के इस्तीफे की परंपरा बेहद कम रही है। लेकिन फिर भी नीतिगत विवादों, चुनावों और प्रदर्शन के आकलन से जुड़े फेरबदल के वक्त कई बड़े इस्तीफे हुए हैं। लेकिन नीट पेपर लीक को लेकर राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर युवा छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते मोदी सरकार को झुकना पड़ा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
इन मंत्रियों के इस्तीफे की उठी मांग
भारत में हर बड़े रेल हादसे के बाद जनता और विपक्ष ने रेल मंत्री के इस्तीफे की मांग जोरों शोरों से उठी, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया गया। 2026 में नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट पर वित्त मंत्री के विवादित बयान को छात्रों ने संवेदनहीन बयान को लेकर तीखी आलोचना की और सरकार व मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की।सितंबर 2024 में बेंगलुरु में चुनावी बॉन्ड मामले में कानून कार्रवाई के बाद विपक्ष ने इस्तीफे की मांग की। 2020 में अर्थव्यवस्था पर महामारी के प्रभाव को एक्ट ऑफ गॉड बताने को लेकर उनका भारी विरोध हुआ। हालांकि वो वित्त मंत्री बनी रहीं।
Created On :   25 July 2026 4:13 PM IST












