Dharmendra Pradhan's Resignation: राहुल-अखिलेश के क्रेडिट लेने का डर या चुनाव की चिंता...GEN Z के सामने क्यों झुकी सरकार? समझिए 7 वजह

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार की बड़ी हार के तौर पर देखा जा रहा है। विरोधियों ने कहना शुरू कर दिया है कि GEN Z के सामने सरकार घुटने टेकने पर मजबूर हो गई। सीजेपी के बीस जुलाई से शुरू हुए प्रोटेस्ट के बीच कई बार देखा गया कि सरकारी तंत्र ने उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की है। उन पर लाठीचार्ज हुआ, वॉटर केनन और आंसू गैस के गोले तक दागे गए। लेकिन GEN Z की आवाज नहीं दबी। आखिरकार मोदी सरकार को वो फैसला लेना पड़ा जिसकी उम्मीद नहीं थी। प्रधान का इस्तीफा हुआ और उसके बाद से अब सब जानना चाहते हैं कि आखिर सरकार युवा प्रोटेस्टर की मांगे मानने को मजबूर क्यों हुई। हम आपको बताते हैं वो सात फेक्टर्स जिसकी वजह से मोदी सरकार GEN Z आंदोलन के सामने झुकी।
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1. लगातार बढ़ता दबाव
NEET मामले को लेकर हर दिन सरकार पर दबाव बढ़ता गया। छात्र, कई संगठन और विपक्ष लगातार सवाल उठा रहे थे। बातचीत के बाद भी मामला शांत नहीं हो रहा था। यही वजह है कि यह मुद्दा लंबे समय तक सुर्खियों में बना रहा। सोशल मीडिया की एक पोस्ट से शुरू हुआ कॉकरोचों का आंदोलन देश व्यापी बनता चला गया। जंतर मंतर पर विरोध तो तेज था ही आंदोलनकारियों ने पूरे देश में आंदोलन करने की अपील की थी। युवाओं के इस प्रदर्शन में अधेड़ और बुजुर्ग मतदाताओं की आवाजें भी शामिल हो गईं। सरकार के सामने मैसेज साफ था कि प्रदर्शन सिर्फ युवा वोटर्स का नहीं है। इससे ज्यादा व्यापक हो चुका है।
2. युवाओं का बड़ा समर्थन
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा जुड़े। जो लोग प्रदर्शन स्थल पर नहीं थे वे भी सोशल मीडिया पर पोस्ट और रील बनाकर अपना समर्थन दिखा रहे थे। कई परिवार भी बच्चों के साथ खड़े नजर आए जिससे आंदोलन का असर और बड़ा दिखने लगा।
3. राहुल-अखिलेश को क्रेडिट
विपक्षी दल लगातार इस मामले को उठा रहे थे। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं ने छात्रों का आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों को राहुल गांधी और अखिलेश यादव का समर्थन मिलता देख लोग इन नेताओं से काफी प्रभावित और खुश हुए। छात्रों को यह लगने लगा कि विपक्ष उनके साथ खड़ा है। लोगों के मन में विपक्ष के लिए अच्छी छवि बनने लगी थी। एक ऐसा विपक्ष जो सरकार से जवाब की मांग कर रहा है। ऐसे में सरकार ये नहीं चाहती थी कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव पूरा क्रेडिट ले लें। यही वजह थी कि सरकार पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता गया।
4. सोशल मीडिया पर बदलता माहौल
प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और रील तेजी से वायरल हो रहे थे। आंदोलन का अलग अंदाज, नए नारे और कुछ चेहरों की बात करने की शैली लोगों तक जल्दी पहुंच रही थी। इससे यह मुद्दा सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बना रहा।
5. चुनाव और बढ़ते जनसमर्थन की चिंता
उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले चुनावों को देखते हुए भी इस मामले को अहम माना जा रहा था। माना गया कि अगर विवाद लंबा चलता, तो इसका असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता था। इसी वजह से सरकार पर जल्द फैसला लेने का दबाव भी बताया गया।
6. बॉलीवुड का खुलकर समर्थन
समय के साथ कई जाने-माने एक्टर्स भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। कुछ लोगों ने खुलकर बयान दिए, जबकि कई लोग बिना सामने आए भी मदद करते रहे। इसी दौरान सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और आंदोलन से जुड़े दूसरे मुद्दों ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
7. आंदोलन लगातार बड़ा होता गया
समय के साथ आंदोलन का असर और बढ़ने लगा। कहा जाने लगा कि एक छात्र के साथ पूरा परिवार जुड़ जाता है इसलिए इसका प्रभाव बहुत बड़े वर्ग तक पहुंचा। वहीं, विपक्ष को लगातार नया मुद्दा मिलता रहा और बातचीत से कोई बड़ा हल नहीं निकल सका। सोशल मीडिया पर प्रदर्शन की रील्स तेजी से वायरल हुईं। GEN Z का अलग अंदाज लोगों को पसंद आया और कई युवा, जो प्रदर्शन में नहीं थे वे भी रील बनाकर समर्थन करने लगे। नए नारे और प्रदर्शन का तरीका लोगों का ध्यान खींच रहा था। कई लोगों ने बिना नाम सामने आए मदद की।
Created On :   25 July 2026 5:09 PM IST













