Dharmendra Pradhan Resign: तीन दशक पहले जिस मुद्दे ने बनाया हीरो, उसी मुद्दे ने इस्तीफा देने पर किया मजबूर, ओडिशा के जमीनी नेता से प्रधान ऐसे बने केंद्र के कद्दावर मंत्री

तीन दशक पहले जिस मुद्दे ने बनाया हीरो, उसी मुद्दे ने इस्तीफा देने पर किया मजबूर, ओडिशा के जमीनी नेता से प्रधान ऐसे बने केंद्र के कद्दावर मंत्री
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। अहम बात ये है कि जिस मुद्दे को लेकर वो हीरो बने थे उससी मुद्दे की वजह से आज उनकी कुर्सी चली गई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच करीब 30 साल पुरानी एक घटना चर्चा में है, जिसमें पेपर लीक के खिलाफ धर्मेंद्र प्रधान खुद सड़कों पर उतरे थे। उस समय भी पुलिस ने उन लाठीचार्ज किया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए थे। इत्तेफाक देखिए कि जिस राजनीतिक घटनाक्रम से उनकी राजनीति चमकी, उसी मुद्दे ने आज उनकी कुर्सी छीन ली।

mint हिंदी ने EdexLive की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि साल 1997 में ओडिशा में कथित पेपर लीक के विरोध में करीब 1,500 छात्रों ने सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया था। छात्रों के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान का हाथ फ्रैक्चर हो गया था।

क्या है पूरा मामला?

80 के दशक में AVBP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के कार्यकर्ता के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र राजनीति का आगाज किया था। आगे चलकर वो एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव भी बने थे। EdexLive की रिपोर्ट में उनके सहयोगियों के हवाले से बताया गया कि 1997 में ओडिशा में एक परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने का मामला सामने आया था।

उस समय प्रधान एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव थे। रिपोर्ट के मुताबिक कथित पेपर लीक के खिलाफ उन्होंने करीब 1500 छात्रों के साथ तत्कालीन ओडिशा कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। आंदोलन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया था, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान को कई चोटें आई थीं। यहां तक की उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया था।

सवालों के घेरे में प्रधान

अब सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र प्रधान की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिन्हें लेकर दावा किया जा रहा है कि ये उनके उसी आंदोलन के समय की हैं। एक तस्वीर में प्रधान के चेहरे पर मलहम पट्टी लगी हुई दिखाई दे रही है। उनके आलोचक इसी घटना की तस्वीरों को शेयर कर सवाल उठा रहे हैं कि जो कभी खुद पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करते थे, वो आज शिक्षा मंत्री रहते हुए उन पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रहे हैं।

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धर्मेंद्र प्रधान कौन हैं?

धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के एक बड़े नेता हैं। वो अब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले वे तेल-गैस मंत्री, इस्पात मंत्री और कौशल विकास मंत्री भी रह चुके हैं। वे ओडिशा से आते हैं और वहीं से उनकी राजनीति शुरू हुई। धीरे-धीरे वे पूरे देश में जाने-माने नेता बन गए। उनका जन्म साल 1969 में ओडिशा के तालचेर शहर में हुआ था। उनके पिता भी नेता थे और पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके थे। बचपन से ही धर्मेंद्र प्रधान का माहौल राजनीति वाला रहा, इसलिए वे कॉलेज के समय से ही राजनीति में उतर गए थे। धर्मेंद्र प्रधान जमीनी नेता के तौर पर जाने जाते हैं। ओडिशा में बीजेपी की जीत के वो बड़े आधार रहे हैं। उस समय ये भी कहा गया था कि वो ओडिशा सीएम की कुर्सी के बड़े दावेदार थे। लेकिन उन्हें केबिनेट मंत्री का पद सौंपा गया।

कहां से की पढ़ाई?

धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा में ही पढ़ाई की। बाद में उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी में मास्टर डिग्री ली। उनकी शादी मृदुला ठाकुर प्रधान से हुई, यह शादी साल 1998 में हुई थी। उनके दो बच्चे हैं- एक बेटा और एक बेटी। बेटे का नाम निशांत है और बेटी का नाम नैमिषा है।

राजनीति की शुरुआत कैसे हुई

कॉलेज के दिनों में धर्मेंद्र प्रधान छात्र संगठन ABVP से जुड़े थे। यहीं से उनकी राजनीति शुरू हुई। बाद में वे भाजपा की युवा शाखा में बड़े पद तक पहुंचे। साल 2000 में वे पहली बार विधायक बने। फिर 2004 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद वे राज्यसभा में भी रहे। आजकल वे संबलपुर सीट से सांसद हैं।

कौन-कौन सी बड़ी जिम्मेदारियां निभाईं

उन्होंने केंद्र सरकार में कई बड़े पद संभाले हैं। पहले तेल और गैस मंत्रालय देखा। फिर इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद कौशल विकास मंत्री बने। साल 2021 से वे शिक्षा मंत्री बने।

Created On :   25 July 2026 3:19 PM IST

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