NEET Paper Leak Case: NEET पेपर लीक बवाल से लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक... कैसे 'कॉकरोचों' ने सरकार को झुकने पर कर दिया मजबूर?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट यूजीसी पेपर लीक मामले को लेकर बीते कई महीनों से देशभर में विवाद चल रहा था, जो कि अब थम गया है। बीते महीने ये देश की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल बना हुआ था। जंतर मंतर पर हफ्तों से कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन चल रहा था। इसके बाद सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी 3 सख्त और अहम मांगें रखी थीं, जिनके पूरे होने तक प्रोटेस्ट जारी रहने वाला था। 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस दिन ही केंद्र सरकार की तरफ से नीट पेपर लीक को रोकने के लिए सख्त कानून वाले बिल को मंजूरी दी है। साथ ही सीजेपी की मांगों पर भी सहमति जताई है। इसके बाद पार्टी ने जंतर मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया है। हालांकि, संगठन ने ये भी साफ कहा है कि वह आगे भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हित से संबंधित अहम मुद्दों पर सरकार की कार्रवाई पर नजर रखेगा। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर ये मामला शुरू कैसे हुआ था और सरकार को झुकने के लिए कैसे मजबूर किया गया है, जो धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कैसे शुरू हुआ था मामला?
बता दें, इस विवाद की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई थी। देशभर में नीट यूजी परीक्षा हुई थी। इस एग्जाम में लगभग 22 से 24 लाख स्टूडेंट्स शामिल थे। परीक्षा खत्म होने के लगभग 4 दिन बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले पेपर लीक हुआ है। कई लोगों को क्वेश्चन पेपर पहले ही मिल गया था। इन शिकायतों के बाद मामला तेजी से बढ़ने लगा था। जांच शुरू हुई और 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को दी गई थी। इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और उन्होंने माना कि पेपर लीक हुआ है। उन्होंने ये भी कहा कि व्यवस्था में गड़बड़ी हुई थी, जिससे ये बड़ी चूक हुई है। इसके बाद फैसला लिया गया कि 21 जून को फिर से परीक्षा कराई जाएगी।
इस पूरे मामले में सीजेपी कैसे उभरी?
इस पूरे मामले के बीच 15 और 16 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई 'कॉकरोच' वाली टिप्पणी सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रही थी। उससे ही प्रेरित होकर 16 मई को अभिजीत दिपके नाम के शख्स ने बहुत ही मजाकिया अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी नाम की एक पार्टी तैयार कर ली। शुरुआत में लोगों ने उसको सिर्फ मजाक में लिया था लेकिन जैसे-जैसे पेपर लीक का मामला बढ़ता रहा, वैसे ही बड़ी संख्या में इस पार्टी से लोग जुड़ते रहे। कुछ दिनों के बाद ही ये संगठन छात्रों के विरोध की सबसे बड़ी आवाज बन गया।
कैसे शुरू हुआ इतना बड़ा आंदोलन?
6 जून को संगठन ने दिल्ली के जंतर मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन शुरू किया था। इसके बाद प्रदर्शन में तीन मुख्य मांगें रखीं। उन मांगों में सबसे पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा थी, दूसरी मांग परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव, तीसरी मांग में जिन छात्रों ने इस पूरे विवाद और मानसिक तनाव के बीच जान गंवाई, है उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाए। इन सबके बाद 20 जून से प्रदर्शन और तेज होने लगा। प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चित समय तक धरना शुरू कर दिया और कहा कि जब तक इस्तीफा नहीं होगा, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हुए और उन्होंने करीब 26 दिन तक भूख हड़ताल की। उनके शामिल होने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों छात्र और युवा जंतर मंतर पहुंचने लगे। इस बीच 21 जून को दोबारा नीट परीक्षा हुई और बाद में उसका परिणाम भी जारी कर दिया गया, लेकिन इससे प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ।
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जुलाई में फिर बढ़ा आंदोलन
जुलाई आते-आते आंदोलन और तेज हो गया और 20 जुलाई को संगठन ने 'चलो संसद' मार्च निकालने का ऐलान किया। पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे। जब लोग आगे बढ़ने लगे तो उस दौरान पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू किए। इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए और इसके बाद भी जंतर मंतर पर धरना जारी रहा। उधर विपक्षी दल भी छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतर आए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की तरफ मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया और इसके बाद विपक्ष भी लगातार तीन मांगें उठा रहा था। जिसमें पहली, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, दूसरी 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की जांच और तीसरी छात्रों से सार्वजनिक माफी शामिल थी।
संसद में भी हुआ भारी हंगामा
इस पूरे आंदोलन के दौरान संसद का मानसून सत्र भी जारी था लेकिन नीट विवाद के चलते दोनों सदनों में लगातार हंगामा जारी रहा था। विपक्ष सांसद हर दिन नारेबाजी करते रहे थे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते रहे थे। कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी। सरकार ने ये भी कहा कि वह चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर ही अड़ा रहा। विपक्ष का कहना था कि पहले इस्तीफा दो और उसके बाद ही बातचीत होगी। 24 जुलाी तक संसद का बड़ा हिस्सा इसी विवाद में चलता रहा।
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प्रधानमंत्री ने दिया संदेश और नए कानून को मिली मंजूरी
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम वीडियो मैसेज जारी किया था और उन्होंने ये भी कहा है कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और ज्यादा सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों की जल्दी सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 24 जुलाई को उन्होंने एक और वीडियो मैसेज जारी करके युवाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरी फैसले ले रही है। उसी दिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त प्रावधान वाले नए ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में फास्ट ट्रैक कोर्ट और दोषियों के लिए कठोर सजा का प्रावधान रखा गया है।
सरकार और सीजेपी के बीच हुई बातचीत
इस पूरे मामले के बीच 24 जुलाई को सीजेपी के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की थी। यह बैठक कॉन्स्टीट्यूशन क्लब और विज्ञान भवन में हुई थी। बैठक में संगठन ने अपनी तीन मांगें दोहराईं थीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, दूसरी मांग जिन नीट अभ्यर्थियों ने आत्महत्या की है उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और तीसरी मांग प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने और 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर सार्वजनिक माफी मांगी है। सरकार ने एफआईआर वापस लेने पर सहमति जताई है और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी हो गया है। इसके बाद मुआवजे को लेकर अभी विचार हो रहा है। कानून के हिसाब से मुआवजा देने पर सहमति होगी।
आखिरकार हुआ इस्तीफा, प्रदर्शन भी खत्म
शुरुआत में सरकार की तरफ से कहा जा रहा था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा फिलहाल विचार में नहीं है और सरकार का ध्यान परीक्षा व्यवस्था सुधारने पर है। बाद में 25 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 2 बजे धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के साथ ही सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की कि वह जंतर मंतर पर चल रहा अपना प्रदर्शन खत्म कर रही है। संगठन ने कहा कि उसकी मुख्य मांग पूरी हो चुकी है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों के हित और बाकी वादों को लेकर वह आगे भी सरकार की कार्रवाई पर नजर रखेगा।
Created On :   25 July 2026 7:37 PM IST













