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केन्द्र के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार की चेतावनी, कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी, इसे टाला नहीं जा सकता

केन्द्र के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार की चेतावनी, कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी, इसे टाला नहीं जा सकता

हाईलाइट

  • देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कहर बरपा रही है
  • केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार की चेतावनी- कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी
  • अभी ये कहना मुश्किल है कि ये कब आएगी और कैसे प्रभावित करेगी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केन्द्र के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की चेतावनी दी है। राघवन ने कहा, संक्रमण के काफी मामले आ रहे हैं। ऐसे में तीसरी लहर जरूर आएगी। इसे टाला नहीं जा सकता है। हालांकि अभी ये कहना मुश्किल है कि ये कब आएगी और कैसे प्रभावित करेगी। लेकिन इसके लिए हमें तैयार रहना होगा। 

राघवन ने कहा कि प्रीवियस इंफेक्शन और वैक्सीन से वायरस बचने के लिए खुद में नए बदलाव लाने की कोशिश करेगा। इसके लिए हमे पहले से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि कोविड वैक्सीन मौजूदा वेरिएंट के खिलाफ कामयाब है। हालांकि वायसर में लगातार आ रहे बदलाव का मुकाबला करने के लिए वैक्सीन को अपडेट करने की आवश्यकता पड़ेगी।

भारत सहित दुनियाभर के वैज्ञानिक अलग-अलग किस्‍म के वैरिएंट का मुकाबला करने की तैयारी कर रहे हैं। विजय राघवन ने ये भी कहा की वायरस के वेरिएंट ओरिजनल स्ट्रेन की तरह ही ट्रांसमिट होते हैं। इसमें नए प्रकार के ट्रांसमिशन की प्रॉपर्टी नहीं होती है।

बता दें कि देश में पहली लहर पिछले साल आई थी। साढ़े तीन महीने तक मामले बढ़ते रहने के बाद पीक 16 सितंबर को आया था। उस दिन एक दिन में 97 हजार 860 नए मामले सामने आए थे। बाद में मामले कम होने लगे थे। करीब दो महीने बाद 19 नवंबर को मामले आधे घटकर 46 हजार रह गए थे। वहीं दूसरी लहर बीते मार्च से शुरू हुई। 1 मार्च को एक दिन में 12,270 मामले आए। इसके बाद हर दिन मामले बढ़ते रहे। अलग-अलग एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि दूसरी लहर का पीक इसी महीने आएगा।

इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में पहले की तुलना में कोरोना संक्रमण के मामलों की रफ्तार 2.4 प्रतिशत तेजी से बढ़ी है। संयुक्त सचिव (स्वास्थ्य) लव अग्रवाल ने कहा, 12 राज्यों में एक लाख से अधिक सक्रिय मामले हैं, सात राज्यों में 50,000 से एक लाख सक्रिय मामले हैं और 17 राज्यों में 50,000 से कम सक्रिय मामले हैं।

महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में 1.5 लाख से अधिक सक्रिय मामले हैं। अग्रवाल ने कहा कि 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 15 प्रतिशत से अधिक जबकि 10 राज्यों में 25 प्रतिशत से अधिक पॉजिटिविटी रेट है। महाराष्ट्र में पॉजिटिविटी रेट 24 प्रतिशत है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।