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देश की अटल शख्सियत के भाषणों के सभी कायल, पेश है कुछ चुनिंदा भाषण

देश की अटल शख्सियत के भाषणों के सभी कायल, पेश है कुछ चुनिंदा भाषण

हाईलाइट

  • अटल बिहारी वाजपेयी ओजस्वी आवाज और शानदार भाषण शैली की वजह से जनता के दिलों में राज करते रहे।
  • अटल जी के भाषणों का विपक्ष भी कायल है और हर कोई उनके भाषण को सुनना पसंद करता है।
  • अटल जी ने साल 2005 में भाजपा के रजत जयंती समारोह में आखिरी बार जनसभा को संबोधित किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में पूर्व प्रधानमंत्री और जनप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी के बारे यह जानकर हैरानी होगी कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता अटलजी एक-दो साल नहीं बल्कि करीब 14 साल से बीमार थे और पिछले करीब 8 साल से बिस्तर पर थे। तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे अटलजी की साल 2015 में आखिरी तस्वीर सामने आई थी। मार्च 2015 में वाजपेयी को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों दिल्ली स्थित उनके घर पर भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 

वाजपेयी जी एक राजनेता होने के साथ ही प्रखर वक्ता भी रहे। उनके दिए गए भाषणों का विपक्ष भी कायल है और हर कोई उनके भाषण को सुनना पसंद करता है। अटल बिहारी वाजपेयी के कई ऐसे भाषण हैं जिनकी चर्चा आज भी होती है। हम आपको उनकी ओजस्वी भाषण शैली के कुछ चुनिंदा अंश बताने जा रहे हैं। 

एक भाषण जिसने सभी को हिलाकर रख दिया

अटलजी का एक भाषण ऐसा था जिसने सभी को हिलाकर रख दिया था। उन्होंने यह भाषण 28 मई 1996 में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान दिया था। इस भाषण में सिर्फ उन्होंने विरोधियों को जवाब दिया, बल्कि भगवान राम का दिया हुआ श्लोक पढ़ते हुए कहा था- भगवान राम ने कहा था कि 'मैं मरने से नहीं डरता, डरता हूं तो सिर्फ बदनामी से डरता हूं।' जिसके बाद विरोधियों ने कभी उन पर ऐसा आरोप नहीं लगाया। बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी पर विरोधी पार्टियों ने सत्ता के लोभ का आरोप लगाया था। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। 

UN में हिंदी में दिया भाषण बना चर्चा का विषय

1977 में संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में दिया गया वाजपेयी का भाषणों में प्रमुख भाषण माना जाता है। साल 1977 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे और वो दो साल तक मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया था। यह भाषण बेहद लोकप्रिय हुआ और पहली बार संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की राजभाषा गूंजी। अटल बिहारी वाजपेयी का यह भाषण यूएन में आए सभी प्रतिनिधियों को इतना पसंद आया कि उन्होंने खड़े होकर अटल जी के लिए तालियां बजाई। 

इस भाषण के दौरान वाजपेयीने वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देते हुए अपने भाषण में उन्होंने मूलभूत मानव अधिकारों के साथ-साथ रंगभेद जैसे गंभीर मुद्दों का जिक्र किया था।उन्होंने भाषण में कहा था, 'मैं भारत की ओर से इस महासभा को आश्वासन देना चाहता हूं कि हम एक विश्व के आदर्शों की प्राप्ति और मानव कल्याण तथा उसके गौरव के लिए त्याग और बलिदान की बेला में कभी पीछे नहीं रहेंगे।'

भाजपा के पहले अधिवेशन में अटलजी ने की थी ये भविष्यवाणी

अटलजी ने साल1980 में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के पहले अधिवेशन में अपने दमदार भाषण से देश की राजनीति को नई दिशा में ले जाने पर बल दिया था। इस भाषण के दौरान उन्होंने कहा, 'भाजपा का अध्यक्ष पद कोई अलंकार की वस्तु नहीं है। ये पद नहीं दायित्व है, प्रतिष्ठा नहीं है परीक्षा है, ये सम्मान नहीं है चुनौती है। मुझे भरोसा है कि आपके सहयोग से देश की जनता के समर्थन से मैं इस जिम्मेदारी को ठीक तरह से निभा सकूंगा।'

उन्होंने कहा भारतीय जनता पार्टी जयप्रकाश के सपनों को पूरा करने के लिए बनी है। भाजपा टूट गई, लेकिन हम जयप्रकाश के सपने को टूटने नहीं देंगे। जयप्रकाश किसी व्यक्ति का नाम नहीं है, जयप्रकाश कुछ आदर्शों का नाम है, कुछ मूल्यों का नाम है। भाजपा राजनीति में, राजनीतिक दलों में, राजनेताओं में, जनता के खोए हुए विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए जमीन से जुड़ी राजनीति करेगी। 'जयप्रकाश का पूरा जीवन उनकी साधना और उनका संघर्ष, कुछ मूल्यों के साथ उनकी प्रतिबद्धता ये हमारी विरासत के अंग हैं। भारत के पश्चिमी घाट को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर मैं यह भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं 'अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा'

कारगिल युद्ध पर अटलजी का यादगार भाषण

दुनिया के सबसे ख़तरनाक और मुश्किल युद्ध क्षेत्रों में से एक है कारगिल। अटलजी ने भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान द्वारा कब्जा की गयी जगहों पर हमला किया और पाकिस्तान को सीमा पार वापस जाने को मजबूर किया। कारगिल युद्ध की विजयश्री का पूरा श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को दिया गया। कारगिल युद्ध में विजयश्री के बाद हुए 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।

पोखरण परमाणु पर 'अटल' जीत 

प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट कर सम्पूर्ण विश्व को भारत की शक्ति का एहसास कराया। अमेरिका और यूरोपीय संघ समेत कई देशों ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए लेकिन उसके बाद भी भारत अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हर तरह की चुनौतियों से सफलतापूर्वक निबटने में सफल रहा।

अटलजी का आखिरी भाषण 

अटलजी पहली बार साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। अटलजी ने साल 2005 में भारतीय जनता पार्टी की रजत जयंती समारोह पर आखिरी बार जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद अटलजी दोबारा कभी भी किसी जनसभा में नहीं बोले। इस जनसभा में वाजपेयी ने सबसे छोटा भाषण दिया था। इस जनसभा में उन्होंने चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा की थी। वाजपेयी उस वक्त भी लखनऊ से सांसद थे। 

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