comScore

कहीं शहीद औंरगजेब को स्पेशल ट्रिब्यूट, तो कहीं औरंगजेब नाम से हो गई मोहब्बत

August 30th, 2018 15:44 IST

डिजिटल डेस्क, ओडिशा। गुरुवार (14 जून) को ईद मनाने घर जा रहे निहत्थे सेना के 44वीं राष्ट्रीय राइफल्स के राइफलमैन औरंगजेब को आतंकियों ने अगवा कर लिया था और उसके बाद गोली मारकर हत्या कर दी। शहीद औरंगजेब को हर कोई नम आंखों से याद कर रहा है। औंरगजेब को ओडिशा के पुरी बीच पर खास तरीके से याद किया गया। यहां रेत कलाकार मानस कुमार साहू ने रेत से शहीद औरंगजेब की कलाकृति बनाई। यह कलाकृति करीब 20 फीट की है।  

अमर रहें शहीद औरंगजेब 

शहीद जवान औरंगजेब को शनिवार को पुंछ स्थित उनके गांव सलानी में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उन्हें सैन्‍य सम्‍मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद जवान के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी थी। अंतिम दर्शन के दौरान शहीद जवान के सम्‍मान में 'शहीद औरंगजेब अमर रहें' के नारे लगे थे।  

नहीं टूटा परिजनों का हौसला

गमगीन माहौल के बावजूद शहीद औरंगजेब के परिवार में देश सेवा का हौसला बना हुआ है। औरंगजेब के पिता और जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के पूर्व सिपाही मोहम्मद हनीफ ने कहा, ‘‘मेरे बेटे ने देश के लिए अपना प्राण न्यौछावर किया। मैं और मेरे बेटे भी देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने के लिए तैयार हैं। औरंगजेब का सबसे छोटा (15 साल) भाई आसिम कहता है कि मैं अपने भाइयों और पिता की तरह सेना में शामिल होना चाहूंगा। 

औरंगजेब के नाम से थी नफरत, अब हुआ अफसोस 

मुगल बादशाह औरंगजेब के दक्षिणपंथी हरकतों के कुछ आंकड़े हैं जो सच्चाई पर तो खरे नहीं उतरते लेकिन इतिहास से अनजान लोग उन्हें ही सच मानकर बैठ जाते हैं और औरंगजेब से नफरत करने लगते हैं। 

औरंगजेब के नाम से नफरत करने की ऐसी ही एक गलती का एहसास एक पुलिसकर्मी को भी हुआ, जब गुरुवार को कश्मीर में शहीद हुए जवान औरंगजेब ने सिपाही की  धारणा को बदल दिया। यूपी पुलिस के सिपाही जितेन्द्र यादव ने ट्विट्टर पर लिखा ”#HeroesInUniform तैमूर की तरह औरंगजेब नाम भी मुझे कभी नहीं भाया, दोनों नाम जब जेहन में आये, क्रूरता का वो भयानक मंजर नजर आया,जो खून में रंगा था, मै कितना गलत था अब समझ आया, नाम से कोई फर्क नहीं पड़ता। दोस्त तुमने इस नाम में भी तिरंगे के रंग भर दिए, तुम्हारी शहादत हमेशा याद रहेगी” 

सोशल मीडिया पर औरंगजेब के अाखिरी पलों का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, आखिरी दम तक वो दुश्मन को देख रहा था, उनके सवालों का जवाब देता रहा। इसी जज्बे से प्रभावित होकर यूपी के इस सिपाही ने अपनी भावुकता का इस तरह से पोस्ट के जरिए बया कर अपनी सोच में बदलाव लाया। एक मशहूर कहावत है भी कि 'नाम में क्या रखा है' जो भी बुला लो'

कमेंट करें
sCYkM