दैनिक भास्कर हिंदी: SC में अयोध्या केस की सुनवाई, जिलानी बोले- मंदिर तोड़कर नहीं, खाली जगह पर बनाई गई थी मस्जिद

September 25th, 2019

हाईलाइट

  • SC में अयोध्या केस की सुनवाई
  • मंदिर तोड़कर नहीं, खाली जगह बना था मस्जिद- जिलानी
  • विश्वास के आधार पर यह तय नहीं होता कि अयोध्या में राम मंदिर था- धवन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मामले पर मंगलवार को सुनवाई हुई। रोजाना सुनवाई का मंगलवार को 30वां दिन था। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन और जफरयाब जिलानी ने कोर्ट में अपनी दलीलें दी। बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच द्वारा इस मामले की सुनवाई की जा रही है।

राजीव धवन ने कहा कि सिर्फ विश्वास के आधार पर यह तय नहीं होता कि अयोध्या में राम मंदिर था। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि भारत में पूजा की कई मान्यताएं हैं, कामाख्या समेत देवी सती के अंग जहां-जहां गिरे, वहां मंदिर हैं।

इस पर जस्टीस बोबडे ने यह कहा कि 'ऐसा एक मंदिर पाकिस्तान में भी है।' बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच में सुनवाई के 29वें दिन (सोमवार को) धवन ने कहा था कि 'हम राम और उनके जन्मस्थान का सम्मान करते हैं। यदि देश में राम और अल्लाह का सम्मान नहीं होगा तो देश खत्म हो जाएगा।'

धवन ने कहा कि विशारद की याचिका में भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में नहीं बताया गया। साथ ही उन्होंने इस मामले से जुड़ी कई पुरानी अर्ज़ियों का जिक्र करते हुए बताया कि मस्जिद पर मुस्लिम पक्ष का कब्जा था। उन्होंने एक हिन्दू पक्ष के गवाह का बयान पढ़ते हुए यह भी बताया कि गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति नहीं थी और ना ही उनकी कोई तस्वीर थी लेकिन तब भी जो भी पूजा करने आते थे, वह रैलिंग की तरफ जाकर गर्भगृह की ओर जाते थे। उन्होंने कहा कि रैलिंग के पास जाकर पूजा किये जाने से उसे मंदिर नहीं मानना चाहिए।

राजीव धवन के बाद जफरयाब जिलानी ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि जन्मस्थान पर भरोसा तो है लेकिन कोई सबूत नहीं है। जिलानी ने बताया कि राम जन्म के लिए तीन आधार बताए गए हैं जिनमें रामचरितमानस और बाल्मिकी रामायण भी शामिल हैं। साथ ही जिलानी ने यह भी दावा किया कि रामचरितमानस और रामायण में राम के जन्मस्थान का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने बताया कि 1949 से पहले मस्जिद के बीच के गुम्बद के नीचे पूजा या रामजन्म का कोई सबूत नहीं मिलता है। इसके बाद जब कोर्ट द्वारा 1949 से पहले वहां नियमित नमाज़ होने का सबूत मांगा गया तो जिलानी ने कहा कि इसका कोई लिखित सबूत नहीं है सिर्फ मौखिक सबूत है।

मंदिर तोड़कर नहीं, खाली जगह बनी थी मस्जिद
सुनवाई के दौरान संवैधानिक बेंच में शामिल जस्टिस बोबडे ने जिलानी से पूछा कि बाबर ने मस्जिद मंदिर तोड़कर बनाई थी या खाली जमीन पर। इस पर जिलानी ने अपने जवाब में कहा कि मस्जिद को मंदिर तोड़कर नहीं बल्कि अयोध्या की खाली जमीन पर बनाया गया था।

8 अक्टूबर तक रखी जाएंगी दलीलें
इस मामले पर नवंबर के मध्य में फैसला आने की उम्मीद है। बता दें कि अब तक चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच के सामने हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के साथ निर्मोही अखाड़े की तरफ से दलीलें पेश की जा चुकी हैं। चीफ जस्टिस 18 सितंबर को कहा था कि 'सभी पक्ष अपनी दलीलें 18 अक्टूबर तक पूरी कर लें। हमें मिल जुलकर कोशिश करनी चाहिए कि सुनवाई तय वक्त में खत्म हो जाए।'

सुनवाई के दौरान बयानबाजी
एक तरफ राम मंदिर पर रोज होने वाली सुनवाई अब तक खत्म नहीं हुई है और दूसरी तरफ साक्षी महाराज ने राम मंदिर बनाने का बयान भी दे दिया। साक्षी महाराज ने कहा कि राम मंदिर की सुनवाई लगभग पूरी हो चुकी है और मुझे लगता है कि आगामी 6 दिसंबर से हम राम मंदिर का निमार्ण शुरू कर देंगे।

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुजफ्फरपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उनका राजनीतिक जीवन ढलान की ओर है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद उनका आधा राजनीतिक मकसद पूरा हो गया है। गिरिराज ने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण उनके जीवन का एक सपना है जिसके पूरा हो जाने के बाद वह राजनीति को प्रणाम कह देंगे।