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अयोध्या: रामनवमी तक तंबू से मुक्त होंगे रामलला, 26 फीट की दूरी से दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु

अयोध्या: रामनवमी तक तंबू से मुक्त होंगे रामलला, 26 फीट की दूरी से दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु

हाईलाइट

  • वर्तमान में 56 फीट दूर से दर्शन करते हैं श्रद्धालु
  • रामलला के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
  • महंत नृत्य गोपाल दास भी बोले- जल्द शुरू होगी पत्थरों की नक्काशी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अयोध्या में रामलला को जल्द ही तिरपाल और तंबू से मुक्ति मिल सकती है। राम मंदिर ट्रस्ट भगवान के लिए फिलहाल एक अस्थायी मंदिर बनाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार जब तक अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक इस अस्थाई मंदिर में ही रामलला के दर्शन-पूजन की व्यवस्था रहेगी। अभी वर्तमान में श्रद्धालु 56 फीट की दूरी से दर्शन कर पाते हैं, अस्थाई मंदिर बनने पर यह दूरी घटकर 26 फीट हो जाएगी। वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने मंगलवार को यहां कहा कि परिसर को मंदिर निर्माण के अनुकूल बनाने में अभी छह माह लगेंगे। उन्होंने कहा कि भक्त दो-तीन वर्षो में श्रीराम के भव्य मंदिर के दर्शन कर सकेंगे।

केंद्र की ओर से गठित राम मंदिर ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में दो अप्रैल को रामनवमी तक रामलला जन्मस्थली में एक अस्थाई मंदिर निर्माण की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में तिरपाल और तंबू के कारण अंदर अंधेरा होता है और सिर्फ एक दीपक जलता ही दिखता है। इससे श्रद्धालु ठीक से दर्शन नहीं कर पाते। सुरक्षा के मद्देनजर अभी भक्त भगवान को भोग भी नहीं लगा पाते।

वर्तमान में 56 फीट दूर से दर्शन करते हैं श्रद्धालु 
विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि उम्मीद है कि दो अप्रैल (रामनवमी) तक यह अस्थाई मंदिर बन जाएगा। प्रस्तावित भव्य मंदिर से पहले अस्थाई मंदिर बनने से श्रद्धालुओं को रामलला का दर्शन करने में काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि गर्भगृह के आसपास ही कहीं सुविधाजनक स्थल पर यह अस्थाई मंदिर बनेगा। भव्य मंदिर बनने तक यहीं पर दर्शन-पूजन की व्यवस्था होगी। बाकी नक्शे के अनुसार प्रस्तावित भव्य मंदिर योजना के अनुसार आगे बनता रहेगा।

रामलला के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को होती है परेशानी
गौरतलब है कि अयोध्या में रामलला अब तक तिरपाल और तंबू में हैं। यहां पहुंचकर दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को करीब एक से डेढ़ किलोमीटर संकरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बीमार व बुजुर्ग व्यक्तियों को काफी परेशानी होती है। अगर एक बार कोई व्यक्ति इस रास्ते में पंक्ति में लगा तो फिर लघुशंका या अन्य किसी परेशानी पर पीछे लौटने में दिक्कत होती है। जूते-चप्पल भी उतारने की व्यवस्था नहीं है, जिससे लोग जूते पहनकर दर्शन करने को मजबूर हैं।

महंत नृत्य गोपाल दास भी बोले- रामलला को अस्थाई मंदिर में शिफ्ट किया जाएगा 
महंत नृत्य गोपाल दास ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से पूर्व अधिगृहित परिसर को श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ और सुगम्य बनाया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। उन्होंने कहा कि समाज का कल्याण वहीं कर सकता है, जिसका व्यक्तित्व जन-जन से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण से पूर्व रामलला को अस्थाई तौर पर परिसर में ही वैदिक विद्वानों की देखरेख में शिफ्ट किया जाएगा, ताकि भक्तों को भगवान के दर्शन होते रहें।

जल्द शुरू होगी पत्थरों की नक्काशी 
दास ने कहा कि अयोध्या को भी काशी की भांति विकसित करना चाहिए। यह विश्व की धार्मिक सांस्कृतिक राजधानी है। इसका स्वरूप भी विश्व के लोगों को आकर्षित करने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शेष बचे पत्थरों की नक्काशी भी शीघ्र प्रारंभ होगी और ट्रस्ट की अगली बैठक तक इस पर निर्णय होगा। 
 

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