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महाराष्ट्र: BJP का चुनावी 'संकल्प' पत्र जारी, 1 करोड़ नौकरियां देने का वादा

October 15th, 2019 19:49 IST
महाराष्ट्र: BJP का चुनावी 'संकल्प' पत्र जारी, 1 करोड़ नौकरियां देने का वादा

हाईलाइट

  • महाराष्ट्र में बीजेपी ने जारी किया संकल्प पत्र
  • घोषणा पत्र में बीजेपी ने हर वर्ग का साधने का प्रयास किया
  • बीजेपी ने घोषणापत्र को 'संकल्प पत्र' नाम दिया

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी ने आज (मंगलवार) अपना संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) जारी कर दिया है। मुंबई में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी का ये घोषणापत्र जारी किया। महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन दोनों ही दलों ने अलग-अलग घोषणापत्र जारी किया है। बीजेपी ने इस घोषणापत्र को 'संकल्प पत्र' नाम दिया है। मैनिफेस्टो का मुख्य केंद्र अर्थव्यवस्‍था को रखा गया है और ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। इसके साथ ही युवाओं को लुभाने के लिए फिर रोजगार का पासा फेंका गया है। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में पांच साल के कार्यकाल के दौरान 1 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया है। 

मुंबई-नागपुर बुलेट ट्रेन शुरू करने का वादा

घोषणा पत्र में मुंबई-नागपुर बुलेट ट्रेन शुरू करने का वादा किया है। भाजपा ने घोषणा पत्र में 16 अहम मुद्दों पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच सालों में महाराष्ट्र को सूखा मुक्त करेंगे। पश्चिम में बहने वाली नदियों से बहकर जाने वाले 167 टीएमसी पानी को गोदावरी की घाटी में मोड़कर मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में पहुंचाया जाएगा। वैनगंगा से बहकर जाने वाला पानी पश्चिम विदर्भ के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ले जाया जाएगा। मराठवाड़ा में वॉटर ग्रिड महत्वाकांक्षी योजना के जरिए 11 बांधों को जोड़कर संपूर्ण संभाग में पाइप के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाएगी। कृष्णा, कोयना व अन्य नदियों के कारण बरसात के कारण बह जाने वाली अतिरिक्त पानी को पश्चिम महाराष्ट्र के स्थायी सूखा प्रभावित इलाकों में पहुंचाया जाएगा।

राज्य में सभी प्रकार की सड़कों की स्थायी रूप से देखभाल व मरम्मत के लिए स्वतंत्र तंत्र का निर्माण करेंगे। यह तंत्र सरकार के पीडब्लूडी विभाग के अधीन होगा। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से सभी बस्तियों को 12 महीने चलने वाले सड़कों से जोड़ेंगे। जिसके लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के दूसरे चरण के माध्यम से 30 हजार किलो मीटर लंबी सड़क बनाएंगे। भारतनेट और महाराष्ट्र नेट के माध्यम से पूरे राज्य को इंटरनेट के माध्यम से जोड़ेंगे। स्वास्थ्य सभी के लिए और सबके लिए स्वास्थ्य की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और महात्मा फुले जनआरोग्य योजना को जोड़ा जाएगा। पैसे के अभाव में कोई भी चिकित्सीय उपचार से वंचित न रहे। यह सुनिश्चित करेंगे। सभी प्रकार के श्रमिकों का पंजीकरण करके उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में ले आया जाएगा। राज्य में सभी पूर्व सैनिक, शहीद जवान और कर्तव्यपालन करते समय मृत्यु को प्राप्त पुलिस कर्मियों के परिवारवालों के पुनर्वसन के लिए विशेष कार्यक्रम क्रियान्वित किया जाएगा। प्रदेश के सभी परियोजनाओं से ग्रसित सभी लोगों के पुनर्वसन के लिए तेजी से अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा महात्मा ज्योतिबा फुले, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और स्वतंत्र वीर सावरकर को भारतरत्न देने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रयास किया जाएगा। 


भाजपा-शिवसेना के घोषणपत्रों पर एक साथ होगा अमल

भाजपा और शिवसेना की ओर से अलग-अलग घोषणापत्र जारी करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों दल हमेशा अलग-अलग घोषणापत्र जारी करते हैं। भाजपा चुनाव बाद शिवसेना के साथ सरकार बनाने वाली है। इसलिए हम भाजपा के घोषणपत्र के वादों को पूरा करेंगे और शिवसेना के घोषणपत्र पर भी अमल करेंगे। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि पिछले पांच सालों में 60 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2014 के पार्टी के घोषणपत्र के 90 प्रतिशत वादों को पूरा कर लिया गया है। जबकि 10 प्रतिशत घोषणाओं पर अमल शुरू है। 
 

संकल्प पत्र से जुड़ी अहम बातें

  • भारत नेट और महाराष्ट्र नेट के माध्यम से संपूर्ण महाराष्ट्र को इंटरनेट से जोड़ेंगे।
  • प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना से कोई भी वंचित न रहे यह सुनिश्चिम करेंगे।
  • ग्राम सड़क योजना के दूसरे चरण के माध्यम से 30 हजार किमी की ग्रामीण सड़कें बनाएंगे।
  • राज्य की सभी सड़कों की स्थायी मरम्मत और देखभाल के लिए स्वतंत्र तंत्र का निर्माण करेंगे।
  • मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से सभी बस्तियों को 12 महीने चलने वाली सड़कों से जोड़ेंगे
  • 2022 तक प्रत्येका घर को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराएंगे।
  • मूलभूत सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।
  • आने वाले पांच सालों में 1 करोड़ नौकरियों का निर्माण करेंगे।
  • 1 करोड़ परिवारों को महिला बचत समूह से जोड़कर  रोजगार के विशेष अवसर उपलब्ध कराएंगे।
  • आने वाले 5 वर्षों कृषि में लगने वाली बिजली को सौर ऊर्जा पर आधारित करके किसानों को दिन में 12 घंटे से अधिक बिजली पहुंचाना सुनिश्चिम करेंगे।
  • कृष्णा कोयना व अन्य नदियों में बाढ़ के कारण बह जाने वाले अतिरिक्त पानी को पाश्चिम महाराष्ट्र के स्थायी सूखे भाग में लेकर जाएंगे।
  • मराठवाड़ा वाटर ग्रिड महत्वकांक्षी योजना के माध्यम से 11 बांधों को आपस में जोड़कर संपूर्ण मराठवाड़ा को पाइप लाइन से आपूर्ति करेंगे।
  • आने वाले 5 वर्षों में महाराष्ट्र को सूखे से मुक्त करेंगे
  • पश्चिम से बहने वाली नदियों के पानी को गोदावरी की घाटी से रुकवाकर मराठवाड़ा व उत्तर महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त भाग में पहुंचाएंगे।

भाजपा का संकल्प पत्र

भाजपा का संकल्प पत्र 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।