दैनिक भास्कर हिंदी: बॉर्डर विवाद: आक्रमणकारी चीन को लद्दाख में जवाब देने की तैयारी, सेना प्रमुख और शीर्ष कमांडरों की मीटिंग शुरू

May 27th, 2020

हाईलाइट

  • सैन्य अधिकारी प्रजेंटेशन के जरिए बॉर्डर का हाल बताएंगे
  • PM मोदी ने मंगलवार को PMO में लद्दाख के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट ली थी
  • भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव बना हुआ है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव बना हुआ है। ऐसे में सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने की अध्यक्षता में सेना प्रमुखों की मीटिंग शुरू हो गई है। इसमें सेना के शीर्ष कमांडर भी भाग ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में लद्दाख में चीनी आक्रमण सहित सभी सुरक्षा मुद्दों पर इसमें चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में चीन सीमा पर डटे कमांडर्स अपना प्लान सामने रख रहे हैं। इस कॉन्फ्रेंस में चीन पर जवाबी ऐक्‍शन का खाका खींचा जा रहा है।

सैन्य अधिकारी प्रजेंटेशन के जरिए बॉर्डर का हाल बताएंगे
बता दें कि आर्मी कमांडर्स की बैठक साल में दो बार होती है। इसमें सेना के सातों कमांड के अफसर भाग लेते हैं। चीन से सटी उत्तरी और पूर्वी कमांड के सैन्य अधिकारी भी इस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आक्रामक तेवर दिखा रहे चीन के खिलाफ रणनीति तय होगी। सभी सैन्य अधिकारी इसमें प्रजेंटेशन के जरिए बॉर्डर का हाल सामने रखेंगे और भारतीय सैनिकों ने क्या कदम उठाया है, इसकी जानकारी देंगे। 

PM मोदी ने मंगलवार को PMO में लद्दाख के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट ली थी
बता दें कि इससे पहले भारत ने चीन को माकूल जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। चीन के खिलाफ कूटनीतिक के साथ ही रणनीतिक प्लान भी तैयार किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार शाम को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में लद्दाख के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट ली थी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल थे।

क्षेत्र में अपनी परियोजनाओं को नहीं रोकेगा भारत
बैठक के बाद सरकार ने तय किया था कि पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा लगातार माहौल खराब करने की कोशिश के बावजूद भारत लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा के साथ रणनीतिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को नहीं रोकेगा। वहीं भारतीय किलेबंदी और सेना की तैनाती चीनियों से मेल खानी चाहिए। यानी चीनी सेना के बराबर भारतीय सैनिक एलएसी पर तैनात रहेंगे।  

हो सकती है आरपार की लड़ाई
आपको बता दें कि चीन ने दौलत बेग ओल्डी, गलवान नाला और पेंग्योंग लेक पर अपने 5000 से ज्यादा सिपाही टेंटों के साथ तैनात कर दिए हैं। भारत ने भी चीन के सैनिकों के सामने बराबर की तादाद में टेंट गाड़ के अपने सैनिक तैनात कर दिए। इससे पहले 6 और 7 मई को चीन और भारत के सैनिकों की सीमा की निगरानी के दौरान पेंग्योंग लेक इलाके में झड़प भी हुई थी। इसके बाद से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है। दरअसल चीन पूर्वी लद्दाख इलाके में भारत की सड़क और अन्य सामरिक तैयारियों को लेकर परेशान है। वह चाहता है कि भारत इस इलाके में सभी तरह के निर्माण कार्य रोक दे, लेकिन भारत किसी भी निर्माण कार्य को रोकने के पक्ष में नहीं है। भारत इस बार चीन को उसी की भाषा में जवाब देने और आरपार के मूड में है।

तीन से चार स्थानों पर तैनात हैं दोनों देशों की सेनाएं
दोनों ओर से सेना तैनात हैं और ऐसे तीन से चार स्थान हैं, जहां पांच मई से ही दोनों ओर के सुरक्षाबल आमने-सामने हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास दोनों पक्षों ने चार स्थानों पर 1000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो क्षेत्र और गलवान घाटी क्षेत्र में कड़ी निगरानी बनाए हुए है। इस क्षेत्र में चीन ने भी तैनाती बढ़ाई हुई है। पैंगोंग त्सो के अलावा ट्रिग हाइट्स, डेमचोक और चुमार ऐसे क्षेत्र हैं जो बेहद संवेदनशील हैं।

5 और 6 मई को सैनिकों के बीच हुई थी झड़प
उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में पांच व छह मई को भारत व चीनी सेना के बीच झपड़ हो गई थी। दोनों सेनाओं के बीच पांच मई को तनाव बढ़ा था और छह मई की सुबह तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं। इस झड़प के दौरान दोनों पक्षों के सैनिकों के घायल होने की खबरें भी आई थीं। सूत्रों ने कहा कि चीन की ओर से बड़े पैमाने पर सैन्य टुकड़ी का गठन किया गया है, जो गतिरोध वाली जगह से बहुत दूर नहीं है।यह भी देखा गया कि चीन द्वारा पैंगोंग झील में गश्त बढ़ाई जा रही है। उन्होंने नावों की संख्या भी बढ़ा दी है।

क्षेत्र में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से दोनों देश आमने-सामने
भारतीय की ओर से क्षेत्र में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से दोनों देश आमने-सामने आ गए हैं। भारत की ओर से किए जा रहे निर्माण से चीन को आपत्ति है। हालांकि भारतीय सेना ने यह सुनिश्चित किया है कि पैंगोंग झील पर कोई निरंतर तौर पर कोई आमना-सामना नहीं हो रहा है और क्षेत्र में सशस्त्र सैनिकों की तैनाती नहीं की गई है। शुक्रवार को भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने लद्दाख में 14 कोर मुख्यालय, लेह का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने एलएसी पर सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर समीक्षा भी की थी।

 

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