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शिवकुमार की ईडी हिरासत पांच दिन बढ़ी, 3 सितंबर को किया गया था गिरफ्तार

शिवकुमार की ईडी हिरासत पांच दिन बढ़ी, 3 सितंबर को किया गया था गिरफ्तार

हाईलाइट

  • दिल्ली की एक अदालत ने डी के शिवकुमार की ईडी हिरासत पांच दिन बढ़ा दी
  • शिवकुमार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 3 सितंबर को गिरफ्तार किया था
  • शिवकुमार पर 200 करोड़ रुपए से ज़्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कर्नाटक कांग्रेस नेता डी के शिवकुमार की ईडी हिरासत पांच दिन बढ़ा दी। शिवकुमार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 3 सितंबर को गिरफ्तार किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत से शिवकुमार के गोलमोल जवाब देने का आरोप लगाते हुए पांच दिनों की हिरासत बढ़ाने की मांग की थी।

ईडी का प्रतिनिधित्व करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा, 'शिवकुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। वो सवालों के जवाब नहीं दे रहे हैं। शिवकुमार ने 200 करोड़ रुपए से ज़्यादा की लॉन्ड्रिंग की है। उनकी बेटी के नाम 108 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है। नटराज ने कहा कि कि शिवकुमार के परिवार और दूसरे साथियों ने 317 बैंक अकाउंट बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया।

सुनवाई के दौरान जज ने ईडी से पूछा कि 9 दिन की कस्टडी में शिवकुमार ने जांच में सहयोग नहीं किया, तो आपको क्यों लगता है कि अगर उनकी कस्टडी बढ़ाई जाती है, तो वो जांच में सहयोग करेंगे? ईडी ने कहा कि हम दूसरे आरोपियों को बुलाकर पूछताछ कर रहे हैं। हम शिवकुमार का दूसरे आरोपियों के बयानों से आमना-सामना कराना चाहते हैं।

शिवकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने हिरासत में पूछताछ के लिए ईडी की याचिका का विरोध किया। सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस नेता की मेडिकल कंडीशन बहुत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में होना चाहिए। वह उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। सिंघवी ने कहा कि शिवकुमार का ब्लड प्रेशर लगातार 170/100 से ज़्यादा है। इतने ज़्यादा ब्लड प्रेशर से स्ट्रोक हो सकता है।

दोनों पक्षों की दलील को सुनने के बाद कोर्ट ने डीके शिवकुमार को 5 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया। सुनवाई के दौरान दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अंदर और बाहर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। शिवकुमार को देखते ही उनके समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।