comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर भूमि घोटाला मामले में 2 और एफआईआर दर्ज की

November 24th, 2020 22:00 IST
 सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर भूमि घोटाला मामले में 2 और एफआईआर दर्ज की

हाईलाइट

  • सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर भूमि घोटाला मामले में 2 और एफआईआर दर्ज की

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जम्मू-कश्मीर में राजस्व विभाग के अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ 25,000 करोड़ रुपये के रोशनी भूमि के घोटाले से जुड़ी दो और प्राथमिकी दर्ज की हैं, जिसके बाद अब कुल दर्ज मामलों की संख्या सात हो गई है।

जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में यह कार्रवाई की है।

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में एजेंसी ने एक अज्ञात राजस्व अधिकारी के अलावा सज्जाद परवेज नामक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े घोटालों में शामिल रोशनी भूमि घोटाले की सीबीआई जांच के दौरान कई बड़े नेताओं, अफसरों और व्यापारियों के नाम सामने आए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने रोशनी अधिनियम का फायदा उठाते हुए अपने या रिश्तेदारों के नाम जमीनें करवा ली हैं।

प्राथमिकी में कहा गया है कि सतर्कता जांच में पाया गया है कि रोशनी अधिनियम के तहत, परवेज यहां का निवासी नहीं है और उसे मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता है।

वह पॉवर ऑफ अटॉर्नी के साथ मूल निवासी अशोक शर्मा और बिपन शर्मा का एक अधिकृत एजेंट था। सतर्कता जांच रिपोर्ट में कहा गया है, इसके बावजूद, अधिकार प्राप्त समिति ने उनके स्वामित्व की अनुमति दी।

एफआईआर में कहा गया है, राजस्व अधिकारियों ने राजकोष को लगभग 97.7 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया।

सीबीआई ने अज्ञात लोक सेवकों और अन्य लोगों के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज की, जहां श्रीनगर में स्वामित्व रखने के लिए अवैध कब्जेदारों के मामलों को निपटाने के दौरान उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी।

कई मामलों में जहां रिकवरी रेट सक्षम अधिकारी द्वारा तय किए गए थे, उन्हें सरकारी खजाने में नहीं भेजा गया था।

मार्च 2014 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य की विधानसभा में रखा गया था और इसमें उल्लेख किया गया था कि 2007-13 के बीच निजी मालिकों को बेची गई जमीन 25,448 करोड़ रुपये के बजाय सिर्फ 76 करोड़ रुपये कमाने में कामयाब रही, जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य था। इस प्रकार रोशनी अधिनियम की आड़ में करोड़ों रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया गया।

एकेके/एएनएम

कमेंट करें
CzLIX
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।