दैनिक भास्कर हिंदी: National Handloom Day:'आई वियर हैंडलूम' से लेकर 'साड़ी ट्विटर' तक, ऐसे दिया जा रहा इसे बढ़ावा

August 7th, 2019

हाईलाइट

  • साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेशनल हैंडलूम डे की शुरूआत की
  • हथकरघा दिवस की शुरुआत सबसे पहले चेन्नई में हुई थी
  • स्मृति ईरानी ने सोशल मीडिया पर ‘आई वियर हैंडलूम’ अभियान की शुरुआत की

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में बुनकरों की स्थिति सुधारने के लिए हर साल 8 अगस्त को नेशनल हैंडलूम डे मनाया जाता है। इसकी शुरूआत साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई थी। यह इस बार का पांचवा हैंडलूम डे है। हथकरघा भारत की एक पुरानी विघा है, जिसके ​जरिए लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र के लिए यह जीवन यापन का एक जरिया है। सबसे खास बाता है कि हथकरघा उधोग भारत के पर्यावरण के अनुकूल है। 

चेन्न्ई में मनाया गया पहला हैंडलूम डे
हथकरघा दिवस की शुरुआत सबसे पहले चेन्नई में हुई थी। पहले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर ‘भारतीय हथकरघा’ लोगो का अनावरण किया था। सा​थ ही कहा गया था कि हथकरघा गरीबी से लड़ने में एक अस्त्र साबित हो सकता है, जैसे स्वतंत्रता के संघर्ष में स्वदेशी आंदोलन था। मोदी जी का मानना है कि खादी और हथकरघा उत्पाद भी वही उत्साह प्रदान करते हैं, जैसा कि मां के प्रेम से प्राप्त होता है। 

इसलिए मनाया जाता है हथकरघा दिवस
साल 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने बुनकरों की समस्या को गंभीरता से लिया और इस पर काम शुरु किया। यही कारण रहा कि साल 2015 में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने का निर्णय किया गया। 

7 अगस्त ही क्यों?
हथकरघा दिवस मनाने का दिन 7 अगस्त ही इसलिए चुना गया, क्योंकि इस दिन का विशेष महत्व है। उल्लेखनीय है कि घरेलू उत्पादों और उत्पादन इकाइयों को नया जीवन प्रदान करने के लिए 7 अगस्त 1905 को देश में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था। स्वदेशी आंदोलन की याद में ही 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री ने 2015 में हथकरघा दिवस की शुरुआत करते हुए कहा था कि सभी परिवार घर में कम से कम एक खादी और एक हथकरघा का उत्पाद जरूर रखें।
 
सरकार ने किए ये प्रयास
सरकार ने 29 जुलाई, 2015 को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में अधिसूचित किया था। सरकार का प्रयास है कि गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और हथकरघा उद्योग का सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्तिकरण किया जा सके। सरकार कहती रही है कि वह बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने उस्ताद योजना के तहत बुनकरों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था कराई जिससे उन्हें तकनीकी रूप से और समृद्ध किया जा सके।

इतना ही नहीं साल 2015 में जब राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत हुई। उस वक्त कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी थी। उन्होंने हथकरघा पर बने परिधानों को लोकप्रिय बनाने और बुनकर समुदाय को मदद पहुंचाने के लक्ष्य के साथ सोशल मीडिया पर ‘आई वियर हैंडलूम’ अभियान की शुरुआत की थी। जिसका असर यह हुआ कि कई मशहूर हस्तियों ने जमकर समर्थन किया था। इस अभियान के तहत मशहूर हस्तियों ने 'आई वियर हैंडलूम' हैशटैग के साथ हैंडलूम वस्त्र पहने और तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की। 
 
गुवाहाटी में हो रहा कार्यक्रम
इस बार हथकरघा दिवस का समारोह असम की राजधानी गुवाहाटी में हो रहा है। लेकिन इस खास दिन के उपलक्ष्य में कई जगहों पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिनमें हथकरघा उद्योग के प्रति जागरूकता लाने के अलावा बुनकरों को सम्मानित किया जा रहा है। इस दौरान खादी और हथकरघा उद्योग के लिए चल रही सरकारी योजनाओं से भी लोगों को अवगत कराया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।

भारत का प्राचीन उद्योग है हथकरघा 
प्राचीन काल से ही भारत में हथकरघा उधोग का विशेष महत्व रहा है। उस वक्त जीविका का एकमात्र साधन भी यही था।  हथकरघा उद्योग से निर्मित सामानों का विदेशों में भी खूब निर्यात किया जाता है। माना जाता है कि इस उद्योग के विभिन्न कार्यों में लगभग 7 लाख व्यक्ति लगे हुए हैं। लेकिन अगर उनकी आर्थिक स्थिति की बात की जाये तो कहा जा सकता है कि तमाम सरकारी दावों के बावजूद उनकी स्थिति दयनीय ही बनी हुई है। 

हालांकि 2017 में सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए कहा था कि देश में जगह जगह स्थापित बुनकर सेवा केंद्रों (डब्ल्यूएससी) पर बुनकरों को आधार व पैन कार्ड जैसी अनेक सरकारी सेवाओं की पेशकश की जाएगी। ये केंद्र बुनकरों के लिए तकनीकी मदद उपलब्ध करवाने के साथ-साथ एकल खिड़की सेवा केंद्र बने हैं, लेकिन सेवाओं का सही लाभ नहीं मिल पाने की शिकायतें भी बुनकर लगातार करते हैं

हालही में चलाया गया था साड़ी ट्विटर ट्रेंड
कुछ समय पहले एक प्रतिष्ठित अखबार में बुनकरों के लिए एक आर्टीकल छपा था। जिसमें तथ्यों को गलत तरीके से पेश गया था। इसका विरोध करते हुए सोशल मीडिया की माइक्रो ब्लागिंग साइट ट्विटर पर 'हैशटैग साड़ी ट्विटर' ट्रेंड चलाया गया। तमाम नाम चीन महिलाओं ने इस ट्रेंड में हिस्सा लिया और अपनी तस्वीरें 'हैशटैग साड़ी ट्विटर' के साथ पोस्ट की। इस दौरान ट्विटर पर एक अनआफिशियल साड़ी डे घोषित हो गया।