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गलवान घाटी पर चीन का दावा अस्वीकार्य : भारत

June 21st, 2020 00:00 IST
 गलवान घाटी पर चीन का दावा अस्वीकार्य : भारत

हाईलाइट

  • गलवान घाटी पर चीन का दावा अस्वीकार्य : भारत

नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। सरकार ने शनिवार को कहा कि लद्दाख की गलवान घाटी पर चीन का दावा अस्वीकार्य है और स्पष्ट किया कि हिंसक सघर्ष चीनी सैनिकों के वास्तविक नियंत्रण रेखा के भारतीय हिस्से में घुसपैठ करने के कारण हुआ, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए।

सरकार की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले एक सर्वदलीय बैठक में कहा था कि लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में कोई घुसपैठ नहीं हुई है, और न तो किसी भारतीय सीमा चौकी पर कब्जा हुआ है। इसके बाद गलवान घाटी में सोमवार रात हुए हिंसक संघर्ष को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।

प्रधानमंत्री के संदिग्ध बयान के बाद चीन ने शनिवार सुबह पूरी गलवान घाटी पर अपनी संप्रभुता का दावा कर दिया।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में सरकार ने अब कहा है कि चीन का गलवान घाटी पर दावा अस्वीकार्य है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने जोर देकर कहा कि गलवान घाटी के संबंध में रुख ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट है। उन्होंने कहा, चीनी पक्ष द्वारा एलएसी के संबंध में अब अतिरंजित और अपुष्ट दावा करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।

सरकार ने कहा है कि बीजिंग के ताजा दावे चीन के अतीत के खुद के रुख के अनुरूप नहीं हैं।

एलएसी पर हिंसक झड़प के लिए जिम्मेदार घटनाक्रमों के संबंध में चीन के दावे का बिंदुवार खंडन करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि मई 2020 के प्रारंभ से ही चीनी पक्ष इलाके में भारत के सामान्य, पारंपरिक पेट्रोलिंग पैटर्न में बाधा डाल रहा है।

उन्होंने कहा, इसके परिणामस्वरूप आमना-सामना हुआ, जिसे ग्राउंड कमाडर्स ने द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल्स के प्रावधानों के तहत सुलझाया। हम इस तर्क को स्वीकार नहीं करते कि भारत एकतरफा यथास्थिति बदल रहा था। इसके विपरीत हम इसे बरकरार रखे हुए थे।

सरकार ने कहा कि उसके बाद मई मध्य में चीनी पक्ष ने भारत-चीन सीमा इलाकों के वेस्टर्न सेक्टर के दूसरे इलाकों में एलएसी पर घुसपैठ करने की कोशिश की।

बयान में कहा गया है, इन कोशिशों पर हमारी तरफ से उचित जवाब दिया गया।

उसके बाद दोनों पक्षों में स्थापित कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से चर्चा शुरू हुई, ताकि एलएसी पर चीनी गतिविधियों के कारण उत्पन्न हालात को सुलझाया जा सके।

सरकार ने कहा कि दोनों पक्षों के वरिष्ठ कमांडरों की छह जून को बैठक हुई और दोनों देश तनाव कम करने और एलएसी से दूर हटने की एक प्रक्रिया पर सहमत हुए, जिसमें दोनों तरफ से पहल होनी थी। दोनों पक्ष एलएसी का सम्मान और उसका अनुपालन करने तथा यथास्थिति बिगाड़ने वाली किसी गतिविधि में शामिल न होने पर सहमत हुए थे।

सरकार ने नई दिल्ली में कहा, लेकिन चीनी पक्ष गलवान घाटी इलाके में एलएसी के संबंध में बनी इन सहमतियों से पीछे हट गया और उसने एलएसी के पार ढाचे खड़े करने चाहे। जब इस कोशिश को विफल किया गया, तब चीनी सैनिकों ने 15 जून, 2020 को हिंसक कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप जानें गईं।

सरकार ने दोहराया कि भारतीय सैनिक गलवान घाटी सहित भारत-चीन सीमा इलाकों के सभी सेक्टरों में एलएसी से भलीभांति परिचित हैं।

बयान में कहा गया है, वे यहां ईमानदारी के साथ इसका पालन करते हैं, जैसा कि वे हर जगह करते हैं। भारतीय पक्ष ने कभी भी एलएसी के पार जाकर कोई कार्रवाई नहीं की। वास्तव में वे इस इलाके में एक लंबे समय से बगैर किसी घटना के गस्त कर रहे हैं। भारतीय सेना द्वारा खड़े किए गए ढांचे स्वाभाविक रूप से एलएसी के अपने हिस्से में हैं।

विदेश् मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 17 जून को बातचीत की थी और जयशंकर ने 15 जून की हिंसक घटना के पीछे के घटनाक्रमों पर भारत की सख्त आपत्ति से अवगत कराया था।

प्रवक्ता ने कहा, दोनों पक्ष नियमित रूप से संपर्क में हैं और सैन्य व कूटनीतिक तंत्र की प्रारंभिक बैठकों पर फिलहाल चर्चा चल रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।