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आज राज्यसभा में पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, क्या है उच्च सदन का गणित?

आज राज्यसभा में पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, क्या है उच्च सदन का गणित?

हाईलाइट

  • नागरिकता (संशोधन) विधेयक को बुधवार को राज्यसभा में दोपहर 2 बजे पेश किया जाएगा
  • विधेयक पारित होने के लिए कम से कम 121 सदस्यों का समर्थन प्राप्त करना होगा
  • लोकसभा में इस बिल के समर्थन में 311 जबकि विरोध में 80 वोट पड़े थे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नागरिकता (संशोधन) विधेयक को बुधवार को राज्यसभा में दोपहर 2 बजे पेश किया जाएगा। ये विधेयक लोकसभा से तो आसानी से पास कर दिया गया, लेकिन उच्च सदन में बिल को पास करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन को बाहरी समर्थन की आवश्यकता होगी। लोकसभा में इस बिल के समर्थन में 311 जबकि विरोध में 80 वोट पड़े।

राज्यसभा में, विधेयक पारित होने के लिए कम से कम 121 सदस्यों का समर्थन प्राप्त करना होगा। महत्वपूर्ण विधेयकों पर राज्यसभा में संख्याओं के प्रबंधन में भाजपा की हालिया सफलताओं को देखते हुए, यह संभावना नहीं है कि नागरिकता विधेयक उच्च सदन में किसी बाधा का सामना करेगा। 240 सदस्यों की प्रभावी ताकत वाली भाजपा नीत एनडीए के सूत्रों ने कहा कि उन्हें राज्यसभा में 124-130 वोट मिलने का अनुमान है।

एनडीए और बिल का समर्थन कर रहे दलों का आंकड़ा 125 पर पहुंच रहा है। आंकड़ों के मुताबिक उच्च सदन में भाजपा के पास अकेले 83 वोट है। जबकि गठबंधन वाले दल जदयू 6, सिरोमणी अकाली दल 3, एआईएडीएमके 11, बीजेडी 7, वाईएसआरसीपी 2 और आरपीआई, एलजेपी व एसडीएफ एक एक सीट के साथ सरकार के साथ हैं। 10 मनोनीत और स्वतंत्र सांसदों में से सात बिल के पक्ष में हैं। लोकसभा में बिल पर सरकार का समर्थन देने वाली शिवसेना राज्यसभा में विरोध में जा सकती है। शिवसेना के राज्यसभा में तीन सांसद हैं।

विपक्षी खेमें की बात की जाए तो टीआरएस का समर्थन मिलने के चलते कांग्रेस उत्साहित है, जिसके उच्च सदन में 6 सांसद हैं। अब तक कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का साथ दे चुकी टीआरएस ने इस बिल का विरोध करने का फैसला लिया है। ऐसे में विपक्षी खेमे के पास कांग्रेस (46), टीएमसी (13), बीएसपी (4), समाजवादी पार्टी (9), डीएमके (5), आरजेडी (4), लेफ्ट (6), एनसीपी (4) और टीआरएस (6) के साथ कुल 97 वोट है। शिवसेना, आम आदमी पार्टी और कुछ अन्य दलों के सदस्यों को मिलाकर यह आंकड़ा 110 पर पहुंचता है।

बता दें कि इस बिल में पड़ोसी तीनों देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। इस बिल पर लोकसभा में चर्चा के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने अपने जवाब में कहा था, ये कानून किसी एक धर्म के लोगों के लिए नहीं लाया गया है। ये सभी प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए है। इसलिए इसमें आर्टिकल-14 का उल्लंघन नहीं होता। ये संविधान के हिसाब से पूरी तरह ठीक है। 

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