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मंजूरी मिली तो मप्र में ​जल्द ही बाढ़ पीड़ितों में बंटेंगे 16 हजार करोड़

मंजूरी मिली तो मप्र में ​जल्द ही बाढ़ पीड़ितों में बंटेंगे 16 हजार करोड़

हाईलाइट

  • सीएम कमलनाथ ने पीएम मोदी को सौंपी रिपोर्ट
  • मध्यप्रदेश में बारिश के कारण हुए जान-माल और संपत्ति नुकसान की जानकारी दी
  • सीएम ने राहत राशि के लिए मांगा 16 हजार करोड़ का पैकेज

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में भारी बारिश के कारण हुए जान-माल और फसलों को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ लगातार केंद्र सरकार से मुआवजे के लिए राशि की मांग कर रहे हैं। इस सिलसिले में सीएम कमलनाथ शुक्रवार को प्रधानमंत्री निवास पर प्रधानमंत्री मोदी से मिलने पहुंचे।

इस मुलाकात में कमलनाथ ने पीएम मोदी को मध्यप्रदेश में भारी बारिश के कारण बर्बाद हुई फसलों के नुकसान की एक रिपोर्ट सौंपी। साथ इस रिपोर्ट में बाढ़ के कारण हुए जानमाल और संपत्ति को पहुंचे नुकसान का ब्यौरा भी दिया। इस रिपोर्ट में कमलनाथ ने 9 हजार करोड़ रुपए के बाढ़ राहत पैकेज की मांग की है। यह राहत राशि बाढ़ पीड़ितों और किसानों को बांटी जाएगी।

प्रधानमंत्री पीएम मोदी भी फिक्रमंद
सीएम कमलनाथ ने बताया कि राज्य में हुए नुकसान की रिपोर्ट भी पीएम नरेंद्र मोदी को दी है। मध्यप्रदेश में बारिश और बाढ़ से मची तबाही और बर्बादी को लेकर वो भी चिंतित हैं। पीएम मोदी ने सहानभूति पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

दोबारा सर्वे करा रह केंद्र सरकार
सीएम कमलनाथ ने बताया कि केंद्र सरकार जान-माल और फसलों के नुकसान का दोबारा सर्वे करा रही है। अभी बारिश पूरी तरह रुकी नहीं है, इसलिए नुकसान का प्रतिशत और बढ़ सकता है।

केंद्र से मंजूरी मिलते बांटी जाएगी राहत राशि
कमलनाथ और पीएम मोदी ने प्रदेश के हालात पर करीब एक घंटे चर्चा की। पीएम से मिलकर निकलने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बताया कि उन्होंने बारिश और बाढ़ से प्रदेश में हुई तबाही और फसलों के नुकसान की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को दी है। साथ ही इस नुकसान की भरपाई के लिए 9 हजार करोड़ रुपए का पैकेज मांगा है। यदि यह पैकेज केंद्र की ओर से मंजूर कर लिया जाता है तो जल्द ही किसानों और बाढ़ पीड़ितों को रा​हत राशि दी जाएगी।

पूरे देश में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान
मध्यप्रदेश में इस बार भारी बारिश और बाढ़ के कारण करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। लाखों मकानों को नुकसान पहुंचा और सैकड़ों घर ढह गए। दर्जनों लोगों और पशुओं की जान चली गई। सोयाबीन, उड़द, कपास, मक्का की फसल चौपट हो गई है। सब्जी और फलों की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कपास, सोयाबीन, मक्का, उड़द का कम उत्पादन होने के कारण पूरे देश में अब इनकी कीमत बढ़ जाएगी।

अतिवृष्टि और बाढ़ से 674 जानें गईं, केंद्र से मांगे 7,100 करोड़ रुपए

मध्यप्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से फसल और संपत्ति का तो नुकसान हुआ ही है, 674 लोगों की जान भी गई है। प्रदेश में हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 7154 करोड़ 28 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मांगी है। प्रदेश के राजस्व विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए ब्यौरे के अनुसार प्रदेश के 52 में से 39 जिलों में अतिवृष्टि और बाढ़ से बहुत अधिक क्षति हुई है। राज्य में जून से सितंबर माह के बीच हुई वर्षा से लगभग 60 लाख 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की 16 हजार 270 करोड़ रुपए की फसल प्रभावित हुई है। इसमें लगभग 53 लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 33 प्रतिशत तक फसल क्षतिग्रस्त हुई है।

विभाग के अनुसार, प्रदेश में अतिवृष्टि से 55,372 कच्चे-पक्के मकान, 4,098 पक्के मकान तथा 55 हजार 267 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसी क्रम में 3,649 झोपड़ियां और 3,274 पशु शेड भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रदेश में बाढ़ और आकाशीय बिजली से 674 लोगों की मृत्यु हुई, 18 लोग शारीरिक अपंगता के शिकार हुए तथा तीन लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। लगभग 1,515 दुधारू पशु, 373 भारवाही पशु तथा 3,270 मुर्गियों की क्षति हुई है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।