comScore

कांग्रेस जमीनी लड़ाई पर रखती है यकीन : अजय कुमार लल्लू

October 18th, 2019 11:45 IST
कांग्रेस जमीनी लड़ाई पर रखती है यकीन : अजय कुमार लल्लू

हाईलाइट

  • कांग्रेस जमीनी लड़ाई पर रखती है यकीन : अजय कुमार (साक्षात्कार)

लखनऊ, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपना खोया जनाधार वापस लाने को बेताब है। कुशीगर जिले के तमकुही से दो बार विधायक रहे अजय कुमार लल्लू प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। प्रियंका गांधी के करीबियों में शुमार लल्लू अब संगठन को मजबूत कर सत्ता के शिखर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

लल्लू ने आईएएनएस से खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ट्विटर पर नहीं, बल्कि जमीन की लड़ाई पर यकीन रखती है। नई कमेटी घोषित होने के बाद पुराने और बुजुर्ग नेताओं की नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सभी लोग एक विचारधारा के साथ जुड़े हैं। किसी को कोई नाराजगी नहीं है। सभी एक छत के नीचे रहने वाले लोग हैं। सबमें सामंजस्य है। मन भिन्नता हो सकती है, लेकिन कोई नाराज नहीं है। सभी पार्टी को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। किसी ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है, यह इसे पुष्ट कर रहा है।

बकौल लल्लू, सोनभद्र उभ्भा की घटना के बाद कांग्रेस के आंदोलन से सरकार की चूल्हें हिल गई थीं। प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस ने बड़ा आंदोलन किया। हमें चुनार के किले में बंद करवाया गया। यह धरातल की लड़ाई थी। उन्नाव कांड, चिन्मयानंद कांड और गांधी जयंती पर प्रियंका की पदयात्रा पर 50 हजार कार्यकर्ता सड़कों पर थे। इन सब आंदोलनों के अलावा बहुत सारे लोग हमसे उत्साही ढंग से आंदोलित हुए। कांग्रेस ने आम आदमी का ध्यान खींचा है। इस जमीन पर लड़ाई को हम आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने कहा, जनता ने हम पर भरोसा किया है। कांग्रेस अपने दम पर सत्तापक्ष की नीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। सरकार की विफलता, गन्ना किसान की समस्या, बदहाल कानून-व्यवस्था, गिरती अर्थव्यवस्था और उप्र सरकार के घमंड के खिलाफ हम जनता के बीच जा रहे हैं। जनता के साथ जुड़ रहे हैं। उन्हीं से गठबंधन कर रहे हैं। हम खोये विश्वास और जनाधार को पाने का प्रयास कर रहे हैं।

एक सवाल के जवाब में लल्लू ने कहा कि वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ेगी। कांग्रेस का समझौता जनता से हो रहा है, किसी दल से नहीं।

उन्होंने कहा, मुझ जैसे साधारण कार्यकर्ता को सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी है। प्रदेश कार्यकारिणी में ऐसे लोग लाए गए हैं, जिनका आंदोलन में इतिहास रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, पार्टी में अभी तक जो संवादहीनता रही है, उसे हम दूर करने का प्रयास करेंगे। रचनात्मक, संरचनात्मक और आंदोलनात्मक ढंग से एक-एक कार्यकर्ता तक पहुंचेंगे। जनभागीदारी के माध्यम से हम बड़ा जन आंदोलन खड़ा करेंगे।

उन्होंने कहा कि अन्य दलों से भाजपा के लड़ने का सोशल मीडिया और संगठन का हथियार काफी मजबूत है, लेकिन यह सब हवा-हवाई साबित होगा। वजह यह कि हिंसा, नफरत और भ्रम फैलाकर कुछ दिन राज किया जा सकता है, बहुत दिनों तक नहीं। सत्य परेशान हो सकता है, हार नहीं सकता। अंत में जीत न्याय व अहिंसा की होगी। गांधी जी के विचारों को आगे ले जाने वाली कांग्रेस को वर्ष 2022 में जरूर जीत मिलेगी।

सोनिया, राहुल और प्रियंका के बीच में फंसी कांग्रेस को निकालने की बात पर उन्होंने कहा कि यह मीडिया का मापदंड है। तीनों लोग एकजुट हैं। पूरी पार्टी एकजुट है। सभी साथ बैठकर निर्णय लेते हैं।

लल्लू ने कहा, अनुशासनहीनता से कोई समझौता नहीं होगा। हरचंदपुर विधायक राकेश सिंह के खिलाफ सात माह पहले याचिका डाली जा चुकी है। निर्णय विधानसभा अध्यक्ष को लेना है। सरकार के दबाव में निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। अदिति सिंह को भी नोटिस दिया गया है। जवाब अभी नहीं मिला है। संगठन के कार्य से मैं लगातार बाहर दौरे पर हूं। विधानसभा में पता कराता हूं कि क्या हुआ?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत सभी छोटे बड़े नेता अनुशासन की डोर से बंधे हैं। पार्टी लाइन तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं है।

भाजपा सरकार के बीते ढाई सालों के लेखा-जोखा के बारे में अजय कुमार ने कहा, भाजपा पूरी तरह फेल है। बेरोजगार नवयुवकों के साथ अत्याचार कर रही है। संविदा कार्मचारियों को परेशान कर रही है। 25 हजार होमगार्डो को निकाल शायद दिवाली का तोहफा दिया है। सारी भर्तियां कोर्ट में लंबित हैं। कानून-व्यवस्था बची ही नहीं है। प्रदेश आज अराजकता की भेंट चढ़ चुका है। अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है। कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन कर सरकार की पोल खोलेगी।

कमेंट करें
ZL8BX
NEXT STORY

राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


Whats-App-Image-2021-07-27-at-15-01-16

इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

Whats-App-Image-2021-07-27-at-16-17-50

डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

NEXT STORY

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।