दैनिक भास्कर हिंदी: संत समागम में बोले दिग्विजय- भगवा पहनकर मंदिरों में कर रहे हैं बलात्कार

September 17th, 2019

हाईलाइट

  • दिग्विजय सिंह ने संत समागम को किया संबोधित
  • सनातन धर्म में बदलाव करने वालों पर की टिप्पणी
  • आज भगवा पहनकर लोग बलात्कार कर रहे हैं - दिग्विजय सिंह

डिजिटल डेस्क,भोपाल। कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने आज (मंगलवार) भोपाल में चल रहे संत समागम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होने कहा सनातन धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करने वाले और धर्म में मन मुताबिक बदलाव करने वालों पर जमकर निशाना साधा। दिग्विजय ने कहा, भगवा वस्त्र पहनकर लोग चूर्ण बेच रहे हैं। भगवा वस्त्र पहनकर बलात्कार हो रहे हैं। मंदिरों में बलात्कार हो रहे हैं। क्या यही हमारा धर्म है ? हमारे सनातन धर्म में जिन लोगों ने बदलाव किया है। उन्हें ईश्वर कभी माफ नहीं करेगा। 

दिग्विजय ने कार्यक्रम को जय सिया राम के नारे से संबोधित करते हुए कहा, सनातन धर्म विश्व का सबसे पुराना धर्म है। बाकि जितने भी धर्म हैं वो अलग-अलग विचार धारा के द्वारा उत्पन्न हुए हैं, लेकिन आज विश्व में अगर कोई सबसे प्राचीनतम धर्म है तो वो है सनातन धर्म। सनातन धर्म का कभी अंत नहीं हो सकता है। लोग अपना परिवार छोड़कर साधु-संत बनते हैं, लेकिन आज भगवा पहनकर लोग धर्म को क्षति पहुंचाने का काम कर रहे हैं। 

दिग्विजय ने कहा कि जय श्री राम का नारा कुछ राजनीतिक पार्टियों का है, लेकिन हमें जय सिया राम कहना चाहिए हम जय श्रीराम में सीता मां को क्यों भूल जाते हैं। इस दौरान मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि कमलनाथ जी को मैं बधाई देता हूं कि उन्होंने आनंद विभाग को समाप्त कर आध्यात्म विभाग बनाया। क्योंकि आनंद के कई मतलब होते हैं। दिग्विजय ने कहा, धर्म का उपयोग राजनीति में नहीं होना चाहिए। भगवान राम सबके हैं। हर धर्म हमें अच्छा बनने की शिक्षा देता है।

समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, चुनाव प्रचार में साधु संतों का ठेका लेने का दावा करने वालों के पेट में आज दर्द हो रहा होगा। हमारी सरकार ने 9 महीने में नीति और नीयत का परिचय दे दिया है। हमारी सरकार प्रचार प्रसार में पर विश्नवास नहीं करती है। ये सरकार जनता की सेवा के लिए कर्तव्य निभाने का काम करने वाली सरकार है। सीएम कमलनाथ ने कहा, छिंदवाड़ा में हनुमान मंदिर बनाने पर विरोधियों के पेट में दर्द हुआ था। हमारे मंदिर में जाने और साधु-संतों से मेल मुलाकात पर विरोधियों के पेट में दर्द होता है। आज के युवाओं को अध्यात्मिक से जोड़ा जाए, ये हमारा कर्तव्य होना चाहिए।