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बड़ी कामयाबी: देश में तीन तरह की वैक्सीन के टेस्ट पूरे, चौथी की तैयारी, इस काम में जुटे 30 ग्रुप

May 29th, 2020 09:58 IST

हाईलाइट

  • राघवन ने कहा कि वैक्सीन बनाने की कोशिश तीन तरह से हो रही
  • 100 से अधिक वैक्सीन पर काम कर रहे 30 ग्रुप
  • विज्ञान और तकनीक से जीतेंगे लड़ाई: डॉ. वीके पॉल

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोरोना के खिलाफ जंग में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। देश में तीन तरह के टेस्ट विकसित किए जा चुके हैं, जबकि चौथी की भी पूरी तैयारी है। एक टेस्ट आईआईटी दिल्ली और एक चित्रा इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है। कोरोनावायरस पर गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी गई। कॉन्फ्रेंस में नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य, इंडियन मेडिकल काउंसिल फॉर रिसर्च (आईसीएमआर) और भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने भी हिस्सा लिया। नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने बताया कि कोरोना के खिलाफ हम जंग वैक्सीन और दवाओं से जीतेंगे। हमारे देश के विज्ञान और तकनीकी संस्थान और फार्मा इंडस्ट्री बहुत ही मजबूत हैं।

भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रोफेसर के. विजय राघवन ने बताया कि देश में 30 ग्रुप कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है। 

100 से अधिक वैक्सीन पर कर रहे काम
राघवन ने बताया कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि साधारणतः वैक्सीन 10-15 साल में बनता है और इसकी लागत 200 मिलियन डॉलर के करीब होती है। अब हमारी कोशिश है कि इसे एक साल में बनाया जाए, इसलिए एक वैक्सीन पर काम करने की जगह हम लोग एक ही समय में 100 से अधिक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं।

प्रोफेसर के. विजय राघवन ने बताया कि किन-किन तरह के वैक्सीन बन सकते हैं
राघवन ने कहा कि वैक्सीन बनाने की कोशिश तीन तरह से हो रही हैं। एक तो हम खुद कोशिश कर रहे हैं। दूसरा बाहर की कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और तीसरा हम लीड कर रहे हैं और बाहर के लोग हमारे साथ काम कर रहे हैं। अभी आरटी-पीसीआर टेस्ट होता है। यह जेनेटिक मटीरियल टेस्ट है। दूसरी तरह भी टेस्ट हो सकता है जो अभी उपलब्ध नहीं है। दवा बनाने के लिए स्टूडेंट्स का हैकाथॉन किया जा रहा है। इसमें जल्दी दवा बनाने की होड़ होगी। इसके बाद ICMR इसकी जांच करेगी।

  1. mRNA वैक्सीन वायरस के जेनेटिक मेटिरियल को ही लेकर जब आप इन्जेक्ट कर लेते हैं।
  2. स्टैंडर्ड वैक्सीन जो वायरस के कमजोर वर्जन को लेकर बनाया जाता है पर उससे बीमारी नहीं फैलती।
  3. किसी और वायरस की बैकबोन में कोरोना के वायरस की प्रोटीन कोडिंग को लगाकर के वैक्सीन बनाया जाता है।
  4. वायरस का प्रोटीन लैब में बनाकर उसको एक किसी दूसरे स्टीमुलस के साथ लगाया जाता है। ये चार तरह के वैक्सीन सब लोग बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 

विज्ञान और तकनीक से जीतेंगे लड़ाई
कोरोना वायरस को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ जो विश्व की लड़ाई है। उसमें अंतिम लड़ाई जो जीती जाएगी वो विज्ञान और तकनीक के माध्यम से जीती जाएगी। ये लड़ाई वैक्सीन से जीती जाएगी। उन्होंने कहा कि कितनी बीमारियां होती हैं और कारगर दवाई होती है तो हमें चिंता करने की जरूरत भी नहीं होती है। साइंस और तकनीक एक फाइनल फ्रंटियर है इस लड़ाई में। हमारे देश का विज्ञान और तकनीक का जो बेस है वो मजबूत है। सीमित संसाधनों के बावजूद हमने आधार बहुत मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि देश की फार्मा इंडस्ट्री को फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है। हमारे यहां बनाई गई कई वैक्सीन दवाएं सारे विश्व में जाती हैं और जान बचाती हैं।

प्रेस ब्रीफिंग की मुख्य बातें :-

  • हमें अपनी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना होगा। 
  • दुनिया में भारत का वैक्सीन उत्पादन शीर्ष स्तर पर है। 
  • वैक्सीन कंपनियां उत्पादन के साथ रिसर्च में भी जुटीं। 
  • वैक्सीन की सुरक्षा और गुणवत्ता बहुत जरूरी है। 
  • हमारे संस्थान चार चरह की वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। 
  • नई दवा बनाना वैक्सीन विकसित करने की तरह ही मुश्किल काम है।
  • 30 समूह वैक्सीन विकसित करने के काम में लगे हैं।
  • इलाज के लिए मुख्य तरह से दो तरह की दवाएं मौजूद।
  • खुद को और सतहों को साफ रखना बहुत जरूरी है।
  • सोशल डिस्टेंसिंग, ट्रैकिंग और टेस्टिंग बहुत जरूरी।
  • जेनेटिक मैटरियल के लिए किया जाता है टेस्ट।
  • वायरस का पता लगाने के लिए एंटीबॉडी टेस्ट भी किए जाते हैं।   
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