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Report: कोरोनावायरस के लॉकडाउन से बची करीब 9000 लोगों की जान, रोड एक्सीडेंट में होने वाली मौतों में 62% की कमी आई

Report: कोरोनावायरस के लॉकडाउन से बची करीब 9000 लोगों की जान, रोड एक्सीडेंट में होने वाली मौतों में 62% की कमी आई

हाईलाइट

  • लॉकडाउन ने करीब 9000 लोगों की जान बचाई
  • लॉकडाउन के दौरान सड़क की मौतों में 62% की कमी आई
  • 24 मार्च से 31 मई 2020 के बीच 5,409 लोगों की मौत रोड एक्सीडेंट में हुई

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने करीब 9000 लोगों की जान बचाई। 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ओर से सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में ये बात सामने आई है। कमेटी को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक 2019 की तुलना में 24 मार्च से 31 मई 2020 के बीच लॉकडाउन के दौरान सड़क की मौतों में 62% की कमी आई है। साल 2019 में इस अवधि के दौरान रोड एक्सीडेंट में 14,385 लोगों की जान गई थी जबकि 2020 में 5,409 लोगों की मौत रोड एक्सीडेंट में हुई है। 

रोड एक्सीडेंट की कुल संख्या में 68% की कमी
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में ये भी सामने आया है कि रोड एक्सीडेंट की कुल संख्या में 68% की कमी आई है। 2019 में इस अवधि के दौरान 37,018 मामले सामने आए थे जबकि इस साल ये आंकड़ा 11,645 रहा है। रोड एक्सीडेंड में घायल हुए लोगों की बात की जाए तो इसमें 72.70 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। 2019 में रोड एक्सीडेंड में 36,453 लोग घायल हुए थे जबकि इस साल ये संख्या 9,667 रही है। 

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मरने वालों की संख्या में सबसे ज्यादा कमी महाराष्ट्र में
रोड एक्सीडेंट में मरने वालों की संख्या में सबसे ज्यादा कमी महाराष्ट्र में देखने को मिली है जहां  ये संख्या 2655 से घटकर 1032 पर आ गई है। दूसरे नंबर पर राजस्थान है जहां 1706 से ये संख्या घटरकर 535 हो गई है। वहीं तीसरे नंबर पर गुजरात है जहां 2019 में इस अवधि के दौरान रोड एक्सीडेंट में 1404 लोगों की जान गई थी जबकि इस बार 535 लोगों की मौत हुई है। वहीं अगर प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो रोड एक्सीडेंट में होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा 90% की कमी उत्तराखंड में देखने को मिली है। दूसरे नंबर पर 88.7% के साथ केरल है।

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चार राज्यों ने नहीं किया डेटा प्रस्तुत
चार प्रमुख राज्य जिन्होंने इस अवधि के लिए अभी तक डेटा प्रस्तुत नहीं किया है, वे हैं उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और मध्य प्रदेश। दिल्ली ने भी डिटेल्स प्रोवाइड नहीं की है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता, जो प्रति 100 दुर्घटनाओं में मृत्यु है, इन 69 दिनों के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में अधिक थी। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान प्रत्येक 100 दुर्घटनाओं में 39 लोग मारे गए थे, इस वर्ष के दौरान यह बढ़कर 46 हो गया।

पहली तिमाही में में मौतों की संख्या में कमी
2020 की पहली तिमाही में भी 2019 की तुलना में लोगों की मौत और घायलों की संख्या में गिरावट देखी गई है। इस साल जनवरी से मार्च के बीच मरने वालों की संख्या में 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। 8.9% की गिरावट उत्तर प्रदेश में, 8.3% की गिरावट महाराष्ट्र, 14.8% की गिरावट ओडिशा, 14.4% की गिरावट तमिलनाडु और 17.1 प्रतिशत की गिरावट केरल में देखने को मिली है। संख्या के लिहाज से बात करें तो सबसे ज्यादा कमी उत्तर प्रदेश  में देखने को मिली है जहां  ये संख्या 5838 से घटकर 5317 पर आ गई है। यानी मरने वालों की संख्या में 521 की कमी आई है।  

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।