comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

दिल्ली चुनाव : निर्वाचन विभाग की नजर कम मतदान वाले विधानसभा क्षेत्रों पर

January 11th, 2020 21:30 IST
 दिल्ली चुनाव : निर्वाचन विभाग की नजर कम मतदान वाले विधानसभा क्षेत्रों पर

हाईलाइट

  • दिल्ली चुनाव : निर्वाचन विभाग की नजर कम मतदान वाले विधानसभा क्षेत्रों पर

नई दिल्ली, 11 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे राज्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की नजर हर उस विधानसभा क्षेत्र पर लगी हुई है, जहां लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान का प्रतिशत कम रहा था। चिह्न्ति किए गए इन विधानसभा क्षेत्रों में मतदान बढ़ाने को लेकर निर्वाचन अधिकारी कार्यालय दिन-रात जुटा है।

इसी के मद्देनजर राज्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. रणबीर सिंह ने शनिवार को पूर्वी दिल्ली जिला निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा के साथ एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की।

पूर्वी जिले में 30 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जागरूकता अभियान के पहले दिन पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, मंडावली विधानसभा क्षेत्र के वीथ्री-एस मॉल में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया। इस जागरूकता अभियान के तहत तमाम संबंधित इलाकों में बैनर भी लगाए जा रहे हैं, ताकि सड़क चलते राहगीर को भी मतदान में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित और जागरूक किया जा सके। साथ ही प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन किया जा रहा है। इस सत्र के तहत चुनाव प्रक्रिया संबंधी सवाल पूछे जा रहे हैं।

निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की टीमों ने इसी अभियान के तहत मतदाता हेल्पलाइन मोबाइल नंबर 1950, मोबाइल एप सी विजिल और मोबाइल एप वोटर हेल्पलाइन संबंधी जानकारी भी मतदाताओं को दी।

जागरूकता अभियान में लगी टीमों ने मतदाताओं से आग्रह किया कि अगर उन्हें चुनाव संबंधी कोई शिकायत है, आदर्श चुनाव आचार संहिता का कहीं उन्हें उल्लंघन होता नजर आ रहा है, तो वे तुरंत मोबाइल एप सी विजिल के जरिये दिल्ली निर्वाचन कार्यालय को अवगत करा सकते हैं।

अभियान के तहत दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा संबंधी जानकारियां भी दी जा रही हैं। दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए वॉयस एसेस और स्पीकिंग फीचर चुनने की सुविधा के प्रति जागरूक कराया गया। इस दौरान कलाकारों की एक टीम ने नुक्कड़ नाटक के जरिये भी मतदाताओं में जागरूकता पैदा करने की कोशिश की।

इसी तरह का जागरूकता अभियान अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी चलाया जाएगा, जिनमें पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान का प्रतिशत उम्मीद से कम रहा था।

कमेंट करें
Mlj64
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।