दैनिक भास्कर हिंदी: कर्नाटक चुनाव : 12 मई को होगी वोटिंग, 15 मई को आएंगे नतीजे

March 27th, 2018

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। इलेक्शन कमीशन मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ओपी रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि 12 मई को कर्नाटक की सभी 224 सीटों के लिए एक ही चरण में वोटिंग होगी। जबकि नतीजे 15 मई को घोषित किए जाएंगे। इलेक्शन कमीशन से पहले ही बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने ट्वीट कर बता दिया था कि कर्नाटक में 12 मई को चुनाव होंगे। बता दें कि कर्नाटक विधानसभा का कार्यकाल 28 मई को खत्म हो रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की बड़ी बातें : 

- VVPAT से कर्नाटक में चुनाव कराए जाएंगे।
- हर पोलिंग बूथ पर VVPAT मशीन का इस्तेमाल होगा।
- कर्नाटक में 56 हजार पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे।
- दिव्यांगों और महिलाओं के लिए विशेष इंतजाम होंगे।
- तारीखों का ऐलान होते ही आचार संहिता भी लागू।
- कर्नाटक में एक ही चरण में चुनाव, 12 मई को वोटिंग।
- 15 मई को कर्नाटक के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
- कर्नाटक में इस वक्त 4.96 करोड़ वोटर।

बीजेपी आईटी हेड ने पहले ही कर दिया दावा

 

 

EC की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही सुबर 11 बजकर 8 मिनट पर बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने चुनावों की तारीखों के बारे में बता दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में 12 मई को कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी, जबकि 18 मई को नतीजे डिक्लेयर किए जाएंगे। हालांकि बाद में उन्होंने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया।

इलेक्शन कमीशन ने इस पर क्या कहा?

बीजेपी आई हेड की तरफ से तारीख लीक करने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ओपी रावत ने कहा कि इस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि 'कुछ चीजें लीक हुई हैं, जिसके लिए इलेक्शन कमीशन उचित कार्रवाई करेगा। इसकी जांच की जाएगी और भरोसा रखें कि कानूनी तौर पर सही कदम उठाए जाएंगे।'


कर्नाटक में पिछली बार क्या थे नतीजे?

कर्नाटक में 2013 में विधानसभा चुनाव हुए थे और कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाई थी। 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने यहां की 224 सीटों में से 122 सीटें जीती थी, जबकि बीजेपी ने 40 और एचडी देवगौडा की जनता दल (सेक्यूलर) ने भी 40 सीटों पर कब्जा किया था। विधानसभा चुनावों में बीजेपी भले ही कुछ खास न कर पाई हो, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने यहां की 28 सीटों में से 17 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ 9 सीटें ही गई थी।

बीजेपी के लिए अहम क्यों?

- 2013 में बीजेपी सत्ता से अलग हो गई थी।
- कर्नाटक जीत से 2019 के चुनाव के लिए राह आसान होगी।
- दक्षिण भारत का एकमात्र राज्य जहां बीजेपी सत्ता में रही।
- अगर जीते तो दक्षिण भारत में पार्टी विस्तार करने में मदद मिलेगी।

कांग्रेस के लिए अहम क्यों?

- देश में अकेला बड़ा राज्य जाहां कांग्रेस की सरकार।
- सत्ता बरकररार रखना राहुल के लिए चुनौती।
- अगर हारी तो पंजाब ही एकमात्र बड़ा राज्य बचेगा।
- जीती को 2019 के लिए कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ेगा।

कांग्रेस ने लिंगायतों को अलग धर्म की मंजूरी दी

हाल ही में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की मंजूरी दी है।  कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में लिंगायतों की आबादी करीब 18-20% है। इसके साथ ही बीजेपी के सीएम कैंडिडेट के दावेदार बीएस येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में लिंगायत अभी तक बीजेपी के पक्ष में माना जा रहा था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने लिंगायतों को अलग धर्म की मंजूरी देकर बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। 

बीजेपी की बढ़ी मुश्किलें

लिंगायतों को अलग धर्म की मंजूरी देने का मास्टरस्ट्रोक खेलकर कांग्रेस ने बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कांग्रेस ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसका बीजेपी न ही विरोध कर सकती है और न ही समर्थन। यही कारण है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लिंगायतों के मठों के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। राज्य की 224 सीटों में से कम से कम 100 सीटों पर लिंगायत असर डालते हैं और इसी वजह से कोई भी पार्टी लिंगायतों को नाराज करना नहीं चाहता। लिंगायतों के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि साल 2013 में चुनाव के वक्त बीजेपी ने बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाया था तो लिंगायतों ने बीजेपी को वोट नहीं दिया था और बीजेपी हार गई थी। क्योंकि येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं और इस बार बीजेपी ने येदियुरप्पा को सीएम कैंडिडेट बनाया है।