दैनिक भास्कर हिंदी: किसान आंदोलन: कन्याकुमारी से कश्मीर तक साइकिल मार्च निकलेंगे किसान, 20 राज्यों के लोगों को करेंगे जागरूक

February 27th, 2021

हाईलाइट

  • 70 से 80 लोग साइकिल यात्रा में होंगे शामिल
  • देश के किसानों को एक जगह पर इकट्ठा करने का प्रयास
  • सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता रही बेनतीजा

डिजिटल डेस्क, गाजीपुर बॉर्डर। कृषि कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को अब तीन महीने हो चुके हैं, ऐसे में दिल्ली की सीमाओं किसानों ने अपना डेरा डाला हुआ है, वहीं दूसरी ओर इस आंदोलन को तेज करने और देशभर में इन कानूनों के खिलाफ लोगों को जानकारी देने के लिए एक साइकिल मार्च निकाला जाएगा।

इस साइकिल मार्च से कन्याकुमारी से कश्मीर तक 8308 किलोमीटर का सफर पूरा किया जाएगा, इसका उद्देश्य लोगों को कृषि कानून के बारे में जानकारी देना है। वहीं 12 मार्च को इस साइकिल यात्रा की शुरुआत की जाएगी। हालांकि ये यात्रा 20 राज्यों से होते हुए गुजरेगी और जो लोग साइकिल नहीं चला सकते, वह दूसरे वाहनों से इसमें शामिल हो सकेंगे।

70 से 80 लोग साइकिल यात्रा में होंगे शामिल
साइकिल यात्रा में शामिल हो रहे किसानों के अनुसार अब तक करीब तीनों बॉर्डर से 50 से अधिक लोगों ने इस यात्रा में दिलचस्पी दिखाई है। वहीं साइकिल यात्रा में युवा से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हो रहे हैं। यात्रा में शामिल होने वाले अक्षय ने बताया कि हम एक साइकिल यात्रा निकाल रहे हैं, जो की कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक होगी। हम इस यात्रा के माध्यम से आंदोलन के बारे में जागरूक करेंगे और लोगों को इन कृषि कानूनों को लेकर बताएंगे। 12 मार्च से इसकी शुरुआत की जाएगी, इस यात्रा में शामिल होने के लिए सिंघु, टिकरी और गाजीपुर में मिलाकर करीब 70 से 80 लोग हैं।

देश के किसानों को एक जगह पर इकट्ठा करने का प्रयास
संजय सिंह ने यात्रा के बारे में बताया कि हम कन्याकुमारी से 20 राज्य होते हुए करीब 8308 किलोमीटर की एक यात्रा कर रहे हैं। जिसका नाम किसान साइकिल मार्च है। कॉरपोरेट सेक्टर का शिकंजा जिस तरह सरकार पर कसता जा रहा है, उसके विरोध में पूरे देश के किसानों को एक जगह पर इकट्ठा करने का प्रयास करेंगे।

सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता रही बेनतीजा
सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। दूसरी ओर फिर से बातचीत शुरू हो इसके लिए किसान और सरकार दोनों तैयार हैं, लेकिन अभी तक बातचीत की टेबल पर नहीं आ पाए हैं। दरअसल तीन नए अधिनियमित खेत कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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